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संवेदनहीनता नहीं, कर्तव्यभाव की पराकाष्ठा…..

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अप्रैल 2020 में कोरोना अपने उच्च स्तर पर था और तभी उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री महंत आदित्यनाथ योगी जी के पूर्वाश्रम (सन्यास से पूर्व) पिताजी का उत्तराखण्ड के पैतृक निवास पर निधन हो गया.

योगी आदित्यनाथ जी ने अपने परिवार को एक पत्र लिखा – “मैं आना चाहता हूं, लेकिन मेरी प्राथमिकता प्रदेश की 21 करोड़ जनता को वैश्विक बीमारी से बचाना है. उन्हीं सक्रियताओं के कारण नहीं आ पा रहा, मैं बाद में दर्शनार्थ आऊंगा.” हाल ही में कुछ समय पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी अपने निवास पर गए और पिताजी की स्मृति को प्रणाम किया और परिजनों से मिले.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपई जी का अंतिम समय सभी को स्मरण होगा. जब अटल जी की स्थिति गंभीर हो गई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के बाद सीधे उन्हे देखने गए. बहुत बार गए. अंतिम यात्रा में कई किलोमीटर पैदल चले, लेकिन अंतिम संस्कार के तुरंत बाद केरल में आयी भीषण बाढ़ का निरीक्षण और राहत कार्यों के लिए रवाना हो गए.

आज भी ऐसा ही है, प्रधानमंत्री का अपनी मां से लगाव तो पूरी दुनिया को पता है. किंतु, फिर भी वे हम सामान्यजनों की तरह तीसरे तक भी नहीं रुके, मुक्तिधाम से ही अपने तय कार्यक्रमों में व्यस्त हो गए और अन्य से भी यही आग्रह किया.

यह संवेदनहीनता का नहीं……कर्तव्यभाव की पराकाष्ठा का प्रतीक है.

इसी कर्तव्यभाव को हम अन्य देशवासियों को भी अपनाने की आवश्यकता है…

रामायण धारावाहिक में रविंद्र जैन गाते है –

“भावुकता से कर्तव्य बड़ा, कर्तव्य निभे बलिदानों से.

दीपक जलने की रीत नहीं छोड़े डरकर तूफानों से…”

अमन व्यास

 

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