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पथ संचलन – “एक ध्वज, 7.48 घंटे, 14 बस्ती, 48.4 किलोमीटर, 2000 से अधिक स्वयंसेवक”

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विजयादशमी के उपलक्ष्य में कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए पथ संचलन संघ रचना की समस्त बस्तियों में आयोजित किया गया. पथ संचलन के दौरान पुष्प वर्षा, रंगोली बनाकर, आरती उतारकर स्वयंसेवकों का स्वागत हुआ. सभी संचलनों को एक स्वरूप देते हुए एक ही ध्वज को क्रमशः सभी 14 बस्तियों में निकाला गया.

सभी संचलनों को एक स्वरूप देते हुए एक ही ध्वज के साथ क्रमशः सभी 14 बस्तियों में संचलन निकला. संचलन का मार्ग कुल 48.4 किलोमीटर रहा. पूरे संचलन का घर-घर से आरती उतारकर, रंगोली बनाकर, पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया गया.

संचलन का समापन कार्यक्रम किला मैदान पर हुआ, जिसमें सभी संचलनों में सहभागी स्वयंसेवक उपस्थित रहे. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अमित वाणी रहे. मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रान्त बौद्धिक प्रमुख सुनील जी बाहुल ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि 96 वर्ष पूर्व हिन्दू समाज के संगठन के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई थी. आने वाले समय में संघ स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण कर लेगा. एक समय था, जब लोग अपने आप को हिन्दू कहने में शर्म महसूस करते थे. उस समय डॉ. हेडगेवार ने समाज मे हिन्दू संगठन का विश्वास दिलवाया. आज प्रत्येक हिन्दू को अपने आप को हिन्दू कहने में गर्व महसूस करता है.

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी स्वयंसेवकों ने अभूतपूर्व सेवा की है. पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता के लिए संघ के स्वयंसेवक कार्य कर रहे हैं. संघ कार्य ईश्वरीय कार्य है.

संचलन के चरैवेति स्वरूप के कारण उत्साहित स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर गणवेश बनवाने के लिए प्रयास किया. जिसके कारण गणवेश इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन एवं राजस्थान के बांसवाड़ा से गणवेश मंगवाया गया.

नया घोष मेरठ से बुलवाया गया था. बहुत अधिक संख्या में संचलन होने के कारण घोष की 4 नई इकाइयों का निर्माण किया गया. जिसमें 60 वादकों ने घोष वादन किया.

आगामी माह में सह सरकार्यवाह जी का प्रवास धार नगर में होना है. उनके प्रवास को आधार मानकर अपने क्षेत्र में संघ कार्य को मजबूती प्रदान करने के लिए स्वयंसेवक तेजी से प्रयास में जुट गए हैं. इसलिए आगामी माह में संघ का एक विराट स्वरूप नगर में देखने को मिलेगा.

 

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