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पद्मश्री दामोदर गणेश बापट जी मौन साधक थे – दत्तात्रेय होसबाले जी

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सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने पद्मश्री डॉ. दामोदर गणेश बापट जी के जीवन पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया.

रायपुर. रोहिणीपुरम् रायपुर स्थित सरस्वती शिक्षा संस्थान के सभागार में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में पद्मश्री डॉ. दामोदर गणेश बापट जी के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘सेवाव्रती कर्मयोगी – पद्मश्री डॉ. दामोदर गणेश बापट’ का विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने किया.

दामोदर गणेश बापट जी कुष्ठ रोगियों के सेवा के लिए संचालित चाम्पा के निकट कात्रे नगर, सोंठी आश्रम स्थित भारतीय कुष्ठ निवारक संघ के कार्य में अपना जीवन समर्पित करने वाले सेवाव्रती थे. उनके उल्लेखनीय कार्य के लिए उन्हें 2018 में पद्मश्री सम्मान से पुरस्कृत किया गया.

बापट जी के जीवन पर आधारित पुस्तक के लेखक प्रचारक सुनील किरवई जी है. पुस्तक की प्रस्तावना संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने लिखी है. पुस्तक विमोचन के अवसर पर भारतीय कुष्ठ निवारक संघ के सचिव सुधीर देव जी ने भूमिका रखते हुए कहा कि, दामोदर गणेश बापट जी ने ‘नेकी कर दरिया में डाल’ कहावत को चरितार्थ किया. वे अपने बारे में कहीं कुछ कहते नहीं थे. किन्तु कात्रेनगर कुष्ठाश्रम प्रकल्प को ठीक दिशा में विकसित किया. देवपहरी का सेवा धाम हो या पामगढ़ का अंधत्व निवारण केंद्र हो, सब में किसी न किसी रूप में बापट जी दिखाई देते हैं.

सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि, “बापट जी मौन साधक थे. उनके प्रत्यक्ष जीवन से अनेक लोगों को प्रेरणा प्राप्त हुई है. यह पुस्तक बापट जी द्वारा किये गए कार्य को पढ़ने के लिए सहायक होगी.”

बापट जी ने जो किया वह कहीं लिखित रूप में उपलब्ध नहीं है. क्योंकि वे प्रसिद्धिपरांग्मुख थे. ऐसे व्यक्ति के बारे में सामग्री एकत्रित करना सरल नहीं होता, बहुत परिश्रम करके संकलन करना होता है. सुनील किरवई जी ने यह कार्य किया है.

 

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