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सीमावर्ती क्षेत्रों में जन सांख्यिकीय असंतुलन से राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा बढ़ा – भय्याजी जोशी

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जन सांख्यिकीय असंतुलन – राष्ट्रीय सुरक्षा एवं आर्थिक विकास

उदयपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भय्याजी जोशी ने कहा कि जब हमारा संविधान जाति भेद की बात नहीं करता तो समाज में धर्मभेद का विचार कहाँ से आ गया, इस प्रश्न पर सोचा जाना चाहिए. संप्रदाय विशेष की बढ़ती ताकत से सीमावर्ती क्षेत्रों में जन सांख्यिकीय असंतुलन और राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा बढ़ा है. बढ़ते जन सांख्यिकीय असंतुलन के पीछे तुष्टिकरण की नीति भी जिम्मेदार है.

इतिहास विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय एवं प्रताप गौरव केंद्र के संयुक्त तत्त्वाधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि जन सांख्यिकीय असंतुलन का प्रश्न विचारणीय है. जानकारी के अभाव में भ्रांतियों का निर्माण होता है और कुछ लोग योजनापूर्वक ऐसी भ्रांतियाँ भी फैलाते हैं, इसी कारण भ्रांत धारणाएँ प्रचारित होती हैं. जन सांख्यिकीय असंतुलन के विषय में भी ऐसा ही कुछ है.

उन्होंने कहा कि भारत युवाओं का देश है. आज भी विश्व में हमारी विशेष पहचान है और आगामी कुछ वर्षों में हम और अधिक सशक्त रूप में विश्व के समक्ष खड़े होंगे. हमारा संविधान अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक का विभेद नहीं करता, पर इस संबंध में समाज में भ्रांतियाँ योजनाबद्ध रूप से फैलायी जा रही है. जन सांख्यिकीय असंतुलन के पीछे के कारणों में घुसपैठ, जन्मदर वृद्धि और धर्मांतरण को भी जिम्मेदार ठहराया.

संगोष्ठी के निदेशक प्रो. कैलाश सोडाणी ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि हमारा बहुसंख्यक समाज अभिव्यक्ति को लेकर संकोच में है. अब उन्हें इस स्थिति से बाहर आना होगा. धर्मनिरपेक्ष और गंगा जमुनी तहजीब के देश में जन सांख्यिकीय असंतुलन के आँकड़ों पर चिंतन-मनन अपेक्षित है. उन्होंने समसामयिक मुद्दों यथा- कश्मीरी पंडितों की समस्या, हिजाब आदि मुद्दों पर भी अपनी बात कही. उन्होंने कहा कि नकारात्मक मतदान और सिद्धांतहीन मतदान देश के प्रजातंत्र के लिए खतरा है.

संगोष्ठी के उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि देश में सुशासन और उन्नति के लिए बढ़ रहे जन सांख्यिकीय असंतुलन पर ध्यान देना आवश्यक है. जनसंख्या और विकास का सीधा संबंध है. इस पर अब विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. वर्ष 2011 की जनगणना के आँकड़े जन सांख्यिकीय असंतुलन को दर्शाते हैं जो चौंकाने वाले हैं.

अध्यक्षता पूर्व कुलपति एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रो. बी.एल. चौधरी ने की. उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में निवासरत लोगों में राष्ट्रीयता का भाव जगाना आज के समय की महती आवश्यकता है. अब हमें क्षेत्रीयता को त्यागते हुए राष्ट्र के विषय में सोचना चाहिए.

कार्यक्रम के आरंभ में संगोष्ठी समन्वयक अनुराग सक्सेना ने संगोष्ठी के विषय और स्वराज-75 की अवधारणा पर प्रकाश डाला और प्रताप गौरव केंद्र की विविध गतिविधियों एवं संकल्पना की जानकारी दी.

प्रो. दिग्विजय भटनागर, संगोष्ठी आयोजन सचिव ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीष श्रीमाली ने किया.

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