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राष्ट्र निर्माण के लिए व्यक्ति निर्माण आवश्यक – रामेश्वर दास

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पानीपत. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख रामेश्वर दास ने कहा कि संघ का कार्य गत 97 वर्षों से सतत चल रहा है. देशभर में 61 हजार शाखाएं प्रतिदिन लगती हैं और लाखों स्वयंसेवक इन शाखाओं में अभ्यास करने के लिए आते हैं. प्रत्येक वर्ष इन दिनों में संघ शिक्षा वर्ग लगते हैं और यह संघ शिक्षा वर्ग स्वयंसेवकों के लिए प्रशिक्षण शिविर होते हैं. इस वर्ष देशभर में 104 स्थानों पर ऐसे वर्ग लग रहे हैं. इन संघ शिक्षा वर्गों का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण करना है. क्योंकि संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी का मानना था कि अगर व्यक्ति ठीक होगा तो देश भी ठीक होगा.

रामेश्वर दास शनिवार को पट्टी कल्याणा में स्थित सेवा धाम में आयोजित उत्तर क्षेत्र संघ शिक्षा वर्ग, द्वितीय वर्ष (सामान्य) के समापन कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सम्बोधित कर रहे थे. कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में उद्योगपति सुरेंद्र कुमार आर्य ने शिरकत की.

वर्ग कार्यवाह डॉ. चंद्रप्रकाश ने वृत्त निवेदन किया. वर्ग में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली पांचों राज्यों के 308 स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया. कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण से किया गया. इसके बाद स्वयंसेवकों ने शारीरिक प्रदर्शन किया. ध्वजावतरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.

रामेश्वर दास ने कहा कि व्यक्ति निर्माण से ही देश का निर्माण संभव है. उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक बार स्कूल के कुछ विद्यार्थी विनोबा जी के पवनार आश्रम में गए तो उन्होंने विद्यार्थियों से पूछा कि क्या आपने कभी भारत का मानचित्र देखा है. विनोबा जी ने भारत के मानचित्र के टुकड़े विद्यार्थियों को देते हुए उन्हें जोड़ने के लिए कहा. विद्यार्थियों के काफी परिश्रम के बाद भी जब उनसे मानचित्र नहीं जुड़ा तो उन्होंने एक व्यक्ति के चित्र के टुकड़े उन्हें दिए तो विद्यार्थियों ने बड़े आराम से वो टुकड़े जोड़ दिए. बाद में जब उस चित्र को पलट कर देखा तो उसके पीछे भारत का मानचित्र बना हुआ था. विनोबा जी ने विद्यार्थियों को बताया कि जिस तरह आपने एक व्यक्ति के चित्र से भारत का मानचित्र बनाया है, ठीक उसी तरह यदि भारत का निर्माण करना है तो व्यक्तियों का निर्माण करना होगा. जो बात विनोबा जी ने उस समय कही थी ठीक वही बात डॉ. हेडगेवार जी ने 1925 में कही. संघ आज भी व्यक्ति निर्माण के कार्य में ही लगा है.

इस तरह के संघ शिक्षा वर्गों से निर्मित स्वयंसेवक समाज के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर समाज निर्माण और राष्ट्र जीवन को सुखी बनाने का काम करते हैं. जैसे श्रमिकों के क्षेत्र में भारतीय मजदूर संघ, कृषि क्षेत्र में भारतीय किसान संघ, विद्यार्थियों के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती, धार्मिक क्षेत्र में विश्व हिन्दू परिषद, सामाजिक समरसता में भारत विकास परिषद, वनवासी कल्याण आश्रम आदि ऐसे संगठन समाज के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब-जब भी समाज पर कोई आपदा या संकट आते हैं तो संघ के स्वयंसेवक मदद के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़े होते हैं. पंजाब में आतंकवाद के दौरान स्वयंसेवकों ने देश की एकता व अखंडता के लिए अनेक बलिदान दिए और आपसी भाईचारा बना कर रखा. कश्मीर में आतंकवाद हुआ, वहां भी कश्मीरी हिन्दुओं की सहायता की. तुरंत प्रभाव से जम्मू-कश्मीर समिति का गठन कर पीडि़तों की सहायता की. 1995 में हरियाणा के डबवाली में अग्निकांड हुआ तो वहां भी स्वयंसेवकों ने अपने प्राणों की आहुति देकर भी आग में फंसे हुए बच्चों को बचाया.

उन्होंने बताया कि देशभर में स्वयंसेवकों द्वारा सवा लाख सेवा कार्य चल रहे हैं. इसके अतिरिक्त प्रांतों में भी अपने सेवा कार्य चला रहे हैं. जैसे कि यह सेवा साधना केंद्र जहां हम बैठे हैं, वह भी बन रहा है. इस सेवा केंद्र में भी कई तरह के सेवा कार्य चल रहे हैं. इसके साथ-साथ संघ के स्वयंसेवकों द्वारा धर्म जागरण, ग्राम विकास, गौसेवा, परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरस्ता और पर्यावरण 6 प्रकार की गतिविधियां भी चलाई जा रही हैं. कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वह भी संघ के कार्य को समझें और संघ द्वारा संचालित किसी भी सेवा के कार्य से जुड़कर समाज सेवा में अपना योगदान दें.

वर्ग कार्यवाह डॉ. चंद्रप्रकाश ने बताया कि इस 20 दिवसीय वर्ग में पांच राज्यों से 308 स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है. इनको प्रशिक्षण देने के लिए 38 शिक्षक व अन्य प्रबंधन के लिए 25 प्रबंधकों ने वर्ग में अपना सहयोग किया.

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