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“राम काज कीन्हे बिनु मोहि कहां विश्राम”

गंजबासौदा. “राम काज कीन्हे बिनु मोहि कहां विश्राम” त्रेता युग में इसी ध्येय वाक्य को लेकर भगवान हनुमान प्रभु श्री राम के काम में बगैर किसी विश्राम के लगे. लंका विजय तक बिना किसी विश्राम के हनुमान जी ने राम काज किया, ठीक उसी तरह कलयुग में भी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होते ही राम भक्त मंदिर निर्माण में अपना सहयोग देने जुट गए हैं.

श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण हेतु देशभर में निधि समर्पण अभियान प्रारंभ हो गया है. अभियान के दौरान अनेक अनूठे, प्रेरक व उत्साहवर्धक अनुभव भी सामने आ रहे हैं. ऐसा ही एक उदाहरण विदिशा जिले के गंजबासौदा से सामने आया, जहां निधि समर्पण अभियान में लगे एक कार्यकर्ता ने अनूठा संकल्प लिया है. अभियान के खंड प्रमुख जितेंद्र दांगी ने अभियान पूरा होने तक चप्पल-जूता न पहनने का संकल्प लिया है. पूरे अभियान के दौरान जितेंद्र अपने कार्य क्षेत्र में नंगे पैर ही घूम कर लोगों से समर्पण राशि एकत्रित करेंगे.

नहीं खाएंगे घर का खाना

यही नहीं जितेंद्र दांगी ने बताया कि वह निधि समर्पण अभियान के पूरे होने तक अपने घर में रात्रि विश्राम नहीं करेंगे और ना ही वह घर (अपने घर का) का भोजन करेंगे. इस दौरान समाज में संपर्क करते हुए लोगों के घर ही भोजन करेंगे और अपने कार्य क्षेत्र के किसी कार्यकर्ता के यहां पर रात्रि विश्राम करेंगे.

60 से 70 गांवों तक करेंगे नंगे पैर संपर्क

कुरवाई खंड में लगभग 140 गांव आते हैं, जिनमें से वह अभी तक 30 से 40 गांव की यात्रा बगैर चप्पलों के कर चुके हैं. इसके साथ ही यह अभियान जब तक चलेगा तब तक वह खंड के लगभग 60 से 70 गांव तक संपर्क करने जाएंगे, इस दौरान वह पदवेश धारण नहीं करेंगे.

श्रीराम मंदिर निधि समर्पण अभियान से संगठनों की बैठक की गई थी, इसी दौरान गंजबासौदा में भी पूरे जिले के कार्यकर्ताओं को धन संग्रह से संबंधित बैठक में बुलाया गया था. इसी बैठक में जितेंद्र दांगी जी ने निर्णय कर लिया था कि वह पूरे अभियान के दौरान अपने संकल्प पर अडिग रहेंगे, उन्होंने अपने संकल्प के पीछे रामायण को अपनी प्रेरणा बताया. जब भगवान श्री राम वनवास गए थे, तब वे भी 14 बरस नंगे पैर जंगलों में घूमे थे तो अब तो लगभग 500 वर्षों के संघर्ष के बाद मंदिर निर्माण का शुभ समय आया है तो मेरा यह संकल्प तो कुछ भी नहीं.

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