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स्मरण रहे कारसेवकों का बलिदान – 30 अक्तूबर, 1990

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शैलेश मिश्रा

आज ही के दिन अयोध्या में मुलायम सरकार ने निहत्थे कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं, जिसमें दर्जनों कारसेवक बलिदान हुए थे.

30 अक्तूबर, 1990 को विश्व हिन्दू परिषद ने कारसेवा की शुरुआत की थी. आल इंडिया बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी, कांग्रेस पार्टी, मार्क्सवादी पार्टी और कुछ छद्म धर्मनिरपेक्ष पार्टियों द्वारा इस कारसेवा को समूचे विश्व में मस्जिद के लिए खतरा बताया गया था.

जबकि ये सर्वविदित है कि अयोध्या रामलला की जन्मस्थली है और उस जन्मस्थली को तोड़कर एक अवैध इमारत का निर्माण किया गया था.

परन्तु, वोटों के लालच में तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह और उस समय के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह मस्जिद बचाने की दौड़ में शामिल हो गए.

लगभग 40 हजार CRPF के जवान और 2 लाख 65 हजार सुरक्षा बलों के भारी भरकम सुरक्षा के बावजूद लगभग एक लाख कारसेवक सुबह अयोध्या पहुंच गए. कारसेवकों ने सरयू नदी के पुल पर चलना शुरू किया और तभी पुलिस बलों ने उन पर लाठीचार्ज शुरू कर दिया, बावजूद इसके कारसेवक तनिक भी ना डरे और न ही भागे.

दिन के लगभग 11 बजे तक अयोध्या जैसे छोटे से शहर में कारसेवकों की संख्या 3 लाख को पार कर गयी. पुलिस के जवानों ने कारसेवकों पर हमला करने के बजाय उनका सम्मान शुरु कर दिया.

पुलिस के जवानों को कारसेवकों पर हमला करने के लिए उकसाया गया और पुलिस ने कारसेवकों पर अश्रु गैस के गोले बरसाए.

और तभी पुलिस महानिदेशक ने खुद निहत्थे साधुओं पर लाठी चार्ज शुरू कर दिया. ये देख कर कारसेवक भी रोष में आ गए और वे सारे बैरिकेडिंग को तोड़कर जन्मस्थान तक पहुंच गए और तभी पुलिस ने बिना किसी सूचना, बिना चेतावनी के उन पर गोली चला दी. इसके बावजूद कारसेवक अपने लक्ष्य तक पहुंच चुके थे; और तब पुलिस ने उन पर सीधे गोलियां बरसानी शुरु कर दीं.

इस गोलीबारी में कम से कम 100 कारसेवक बलिदान हो गए और कई लापता हो गए, बाद में कई कारसेवकों के शव सरयू नदी में तैरते मिले थे.

उनके शवों को बालू के बोरों से बांध दिया गया था ताकि वे तैरकर ऊपर ना आ सकें, महिलाओं और साधुओं तक को नहीं छोड़ा गया.

मुलायम सरकार का यह कृत्य बाबर, औरंगजेब और गजनवी के कुकृत्यों का स्मरण कराता है.

सैकड़ों कारसेवकों के बलिदान का ही परिणाम है कि आज श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ हो गया है. आगामी कुछ वर्षों में मंदिर निर्माण का कार्य पूरा होगा, यही बलिदानी कारसेवकों को श्रद्धांजलि होगी.

बलिदानी कारसेवकों को शत-शत नमन

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