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रोशनी भूमि घोटाला – घोटाले में शामिल लोगों की सूची में फारुक अब्दुल्ला की बहन का नाम भी शामिल

जम्मू कश्मीर. प्रदेश में रोशनी भूमि घोटाले में संलिप्त लोगों के नाम सामने आ रहे हैं. उच्च न्यायालय के आदेश के बाद मामले की जांच सीबीआई कर रही है. वहीं, प्रशासन घोटाले में संलिप्त लोगों के नाम सार्वजनिक कर रहा है. प्रतिदिन सत्ता में रहकर बड़े-बड़े घोटाले करने वालों की सच्‍चाई उजागर हो रही है. आम लोगों का हवाला देकर सरकारी योजनाओं को लागू करने वाले राजनीतिक दल भी, अपने लाभ को अधिक तरजीह देते हैं.

रोशनी कानून के तहत जमीन हासिल करने वाले 130 लोगों की दूसरी सूची में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की बहन का नाम भी शामिल है. बहन सुरैया मट्टू ने भी रोशनी एक्ट का लाभ उठाते हुए तीन कनाल 12 मरले भूमि अपने नाम की. उन्होंने एक्ट के तहत भूमि अपने नाम करने के लिए एक करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा कराने थे, वे भी आज दिन तक जमा नहीं करवाए हैं.

फारूक अब्दुल्ला ने मुख्‍यमंत्री रहते वर्ष 2001 में जम्मू-कश्मीर के गरीब किसानों का हवाला देकर एक्ट को लागू किया था. इस एक्ट का लाभ उठाकर किसान जिन सरकारी भूमियों पर कई सालों से खेती-बाड़ी कर रहे हैं, वे अपने नाम कर पाएंगे. परंतु सीबीआइ द्वारा अभी तक की गई जांच में यह सामने आ रहा है कि पीडीपी, कांग्रेस के बड़े-बड़े मंत्री, नेता ही नहीं उनके साथ जुड़े बड़े व्यापारियों, व्यावसायियों ने भी अधिनियम के नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्ति पर कब्‍जा जमाया. दूसरे राजनीतिक दलों, नौकरशाहों ने भी घोटाले को उजागर करने के बजाय बहती गंगा में हाथ धोना मुनासिब समझा.

नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रधान, पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने वर्ष 1998 में जम्मू के गांव सुंजवां में खसरा नंबर 21 पर अलग-अलग जमीन मालिकों से तीन कनाल भूमि खरीदी. जब डॉ. अब्दुल्ला ने इस भूमि पर मकान का निर्माण शुरू किया तो उन्होंने उसके साथ लगती सात कनाल भूमि भी अपने अधीन ले ली. राजस्व विभाग के अनुसार, अतिक्रमण की गई वन भूमि की कीमत आज करीब 10 करोड़ रुपये के करीब है.

उसी दौरान सैयद अली अखून ने सुंजवान गांव में 1 कनाल सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया. उनके अलावा एक पूर्व न्यायाधीश के बेटे पर भी एक कनाल सरकारी भूमि कब्जाने का आरोप है. यही नहीं, एक दूसरे को देख अतिक्रमण का यह सिलसिला तेज हो गया. एक एडवोकेट (1 कनाल), जेएंडके बैंक के पूर्व चेयरमैन (1.5 कनाल) और कश्मीर के प्रसिद्ध व्यावसायी (1.5 कनाल) ने भी उसी गांव की सार्वजनिक भूमि पर कब्जा जमा लिया. उक्त क्षेत्र में करीब 30 कनाल वन भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है. इस भूमि का रियल एस्टेट बाजार में मूल्य लगभग 40 करोड़ है.

इस लंबी सूची में डॉ. फारूक अब्दुल्ला की बहन सुरैया मट्टू का नाम भी शामिल है. उन्होंने भी इस एक्ट के तहत 3 कनाल 12 मरला भूमि अपने नाम की. नेशनल कॉन्फ्रेंस का जम्मू कार्यालय भी सरकारी भूमि पर बना हुआ है. यह भूमि 3 कनाल 16 मरले के करीब है. रोशनी एक्ट लागू होने पर नेकां ने यह भवन अपने नाम पर करवा लिया. इसके अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस का श्रीनगर स्थित नवाई-ए-सुबह ट्रस्ट का कार्यालय भी सरकारी भूमि पर बना है. यह भूमि भी 3 कनाल 16 मरले के करीब थी जो अब नेकां के नाम है.

घोटाले में अपने नाम की चर्चाओं को लेकर नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि मैं रोशनी योजना का लाभार्थी नहीं हूं. मैंने अपने श्रीनगर या जम्मू निवास के लिए रोशनी योजना का लाभ नहीं उठाया है.

रोशनी एक्ट के तहत जम्मू जिले के मैरा मांदरिया गांव में 383 लोगों ने 483 एकड़ सरकारी जमीन हासिल की है. वहीं, जम्मू दक्षिण में 854 लोगों ने 370 एकड़ सरकारी जमीन अपने नाम करवाई. जम्मू पश्चिम में 15 लोगों ने सरकारी जमीन और जम्मू के खौड़ इलाके में 419 लोगों ने 405 एकड़ कृषि भूमि अपने नाम करवाई है. वहीं, 97 अन्य ने नजूल की चार एकड़ जमीन अपने नाम करवाई है.

इनपुट – दैनिक जागरण

 

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