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सरदार भगत सिंह भारतीयता और राष्ट्रभाव के संवाहक थे

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मेरठ. सरदार भगत सिंह भारत, भारतीयता और राष्ट्रभाव के सम्वाहक थे. राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत भगत सिंह भारतीय ज्ञान, दर्शन और अध्यात्म से प्रेरित थे. श्रीमद्भगवत गीता, वेदों का ज्ञान, भगत सिंह की लेखनी और व्यवहार दोनों में परिलक्षित होता है.

सरदार भगत सिंह के बलिदान दिवस पर विश्व संवाद केन्द्र पर ‘भगत सिंह का राष्ट्रभाव एवं पत्रकारिता’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. पवन शर्मा ने संबोधित किया. उन्होंने कहा कि 16-17 वर्ष की आयु के युवा खेल-कूद मनोरंजन आदि में अपना समय व्यतीत करते हैं. उस समय भगत सिंह देश की विषम परिस्थितियों के बीच क्रांतिकारी आंदोलनों द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने के लिये प्रयासरत थे. भगत सिंह भारत माता के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहते थे – जिसकी मां बेड़ियों में जकड़ी हुई हो उसे नींद कैसे आ सकती है. हम युवा भारत माता को मुक्त कराकर उसका सम्मान वापस दिलाने के लिये अपने प्राण न्यौछावर करने को कटिबद्ध हैं. भगत सिंह न केवल राष्ट्रीय वरन् अन्तरराष्ट्रीय विचारधाराओं का भी अध्ययन करते थे, परन्तु वे भारतीय विचारधारा से प्रभावित थे.

भगत सिंह आत्मा की अमरता में विश्वास रखते थे. यही कारण था कि उन्होंने फांसी के फंदे को इस विश्वास के साथ हंसते हुए गले लगाया था कि अगले जन्म में मैं फिर मां भारती की सेवा के लिये जन्म लूंगा. भगत सिंह को उर्दू व पंजाबी भाषा का ज्ञान था, परन्तु वो समग्र भारत में राष्ट्रीय विचार के प्रसार के लिये हिन्दी के समर्थक थे.

डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि आज के युवाओं को भगत सिंह से प्रेरणा लेते हुए अध्ययनशील होना पड़ेगा. तभी वे एक अच्छे पत्रकार बन सकेंगे, उनके द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट गुणवत्ता पूर्ण हो सकेगी. ज्ञान का स्थान तकनीक नहीं ले सकती.

 

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