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आत्मनिर्भर भारत – तेजस, आर्टिलरी गन, मिसाइल, एंटी टैंक माइंस सहित 156 रक्षा उत्पादों के निर्यात को स्वीकृति

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नई दिल्ली. रक्षा उत्पादों में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने के साथ ही भारत ने वैश्विक स्तर पर भी अपनी पकड़ बनाने को लेकर कदम बढ़ा दिए हैं. रक्षा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारत ने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस सहित विभिन्न हथियारों, उपकरणों के निर्यात को स्वीकृति प्रदान की है. सरकार ने तेजस, आर्टिलरी गन, विस्फोटक, टैंक और मिसाइल, एंटी टैंक माइंस सहित कुल 156 रक्षा हथियारों, उपकरणों के निर्यात को स्वीकृति प्रदान की है. इनमें 19 एरोनॉटिकल सिस्टम्स, 16 परमाणु-जैविक-रासायनिक उपकरण, 41 आयुध और लड़ाकू सिस्टम, 28 नौसैनिक सिस्टम, 27 इलेक्ट्रॉनिक और कम्युनिकेशन सिस्टम, 10 जीवन सुरक्षा आइटम, 4 मिसाइल सिस्टम, 4 माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और 7 अन्य मैटेरियल शामिल हैं.

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत सरकार रक्षा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना चाहती है. इसीलिए वह बड़े पैमाने के रक्षा निर्यात पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है. भारत सरकार ने 2025 तक 35,000 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पाद निर्यात करने का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा 100 से अधिक रक्षा उत्पादों के आयात पर चरणबद्ध रूप से प्रतिबंध की घोषणा भी की है. रक्षा उत्पादन निर्यात संवर्धन नीति-2020 का मकसद रक्षा निर्यात के जरिये मित्र देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को बेहतर बनाना है.

रक्षा उत्पादों की सूची रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा जारी की गई है. इससे पहले, आकाश मिसाइल थी, जिसे निर्यात के लिए मंजूरी दी गई थी, लेकिन अब ‘बियांड विजुअल रेंज’ (बीवीआर) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल अस्त्र, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल नाग और ब्रह्मोस वेपन सिस्टम निर्यात के लिए तैयार हैं. आकाश सतह से हवा में मार करने वाली एक मिसाइल प्रणाली है जो कम दूरी की एयर डिफेंस प्रदान करती है.

अस्त्र मिसाइल बियांड विजुअल हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है जो भारतीय वायु सेना की सुखोई 30 एमकेआई के साथ इंटीग्रेटेड है. आने वाले समय में, अन्य भारतीय लड़ाकू विमानों के भी अस्त्र के साथ इंटीग्रेटेड किया जाएगा. ब्रह्मोस सेना, नौसेना और वायु सेना द्वारा उपयोग के लिए एक सुपरसोनिक मिसाइल है. इस यूनिवर्सल मिसाइल को जहाजों, मोबाइल लांचर, पनडुब्बियों और एयरक्राफ्ट से लॉन्च किया जा सकता है.

सरकार अब रक्षा उत्पादन निर्यात प्रोत्साहन नीति 2020 के अनुसार, 2025 तक 5 अरब अमेरिकी डॉलर के रक्षा उपकरणों के निर्यात को हासिल करने का लक्ष्य लेकर अपने रक्षा निर्यात को बढ़ा रही है. आत्मनिर्भरता के लिए निर्यात बढ़ाने और घरेलू रक्षा उद्योग का निर्माण करने के उद्देश्य से, नीति 1,75,000 करोड़ रुपये (25 अरब डॉलर) के टर्नओवर का लक्ष्य रखती है. यह नीति भारतीय उद्योग से घरेलू खरीद को दोगुना करने की भी है.

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