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सेवा – मुस्लिम बस्ती ने देखा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सच्चा स्वरूप

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स्वयंप्रेरणा महिला मंडल का कोरोनामुक्ति अभियान – १

योगिता साळवी

वह महिला कह रही थी, हम पर अल्ला का नूर है, हम बीफ खाते हैं, कोरोना हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता. यह सुनकर मैं हैरान हो गयी. सोचने लगी कि इस महिला को कैसे समझाऊं? मैंने उनसे कहा, इस बस्ती के बहुत से लोग सऊदी, रियाध जैसे मुस्लिम शहरों में नौकरी के लिए जा चुके हैं. वे भी बीफ खाते होंगे. फिर भी आज सऊदी और पाकिस्तान में कोरोना का संक्रमण दिखाई देता है. उन्हें मेरी बात शायद समझ में आने लगी थी.

यह घटना है, मुंबई के विक्रोली की एक मुस्लिम बस्ती की. इस बस्ती को विक्रोली का मुस्लिम केंद्र भी कहा जा सकता है. सभी फतवे, आदेश और आन्दोलन यहीं से शुरू होते हैं. बस्ती के प्रवेश द्वार पर ही मीट की दुकानें दिखाई देती हैं, मांस की टिपिकल बदबू महसूस होती है. बस्ती की छोटी-छोटी गलियां और हरे रंगों से सजे हुए घर भी दिखाई देते हैं. अन्य धर्म से संबंधित बस्ती में कोई काम हो तो ही आते दिखाई देते हैं. कोरोना संक्रमण के प्रति जागरूकता के लिए बस्ती में जाना था. उस समय ३८ तबलीगी महाराष्ट्र से गायब हो गए थे. संदेह था कि कहीं तबलीगी आकर यहां मुस्लिम बस्ती में न रहने लगें.

मैं और संस्था की अन्य सात सदस्य जागरूकता अभियान के लिए बस्ती में गए थे. गुड को चीटियां लग जाएं तो जैसा दिखता है, वैसे ही हर खुली जगह पर लोग इकठ्ठा खड़े हुए दिखाई दे रहे थे. बुरकाधारी महिलाएं आ-जा रही थीं. गली में सब हमेशा की तरह चल रहा था. गली के बाहर पुलिस की गाड़ी घूम रही थी. माइक से अनाउंस किया जा रहा था – घर के बाहर न निकलें, इधर-उधर मत घूमें.

बस्ती की महिलाओं के साथ मैंने कोरोना के बारे में चर्चा की. ज्यादातर महिलाएं कोरोना क्या है, यह भी बता नहीं पाई. एक महिला ने कहा – चीन के लोगों ने चमगादड़ खाए, इसलिए कोरोना फ़ैल गया. तो हमने बताया – कोरोना के कारण सांस लेने में दिक्कत होती है और लोक तड़प-तड़पकर मर जाते हैं. यह एक ऐसी बीमारी है, जिसके संक्रमण से परिवार, गांव, शहर नष्ट हो जाते हैं. एक महिला ने कहा कोरोना से तबाही हो जाएगी. तो मैंने कहा, तबाही टालनी हो तो नियमों का पालन करें, मास्क लगाएं, सेनेटाइज़र का उपयोग करें, बार-बार हाथ धोएं. बस्ती में सभी पुरुष बिना मास्क के घूमते हैं, यह आप बंद कर सकती हैं. बाहर के किसी व्यक्ति के कारण आप की बस्ती में किसी को कोरोना हुआ तो उसके कारण उसका परिवार और बाद में बस्ती संक्रमित हो जाएगी. ये सब आप रुकवा सकती है. यह आप के हाथ में है.

मुस्लिम बस्ती में मेरा प्रवेश कैसे संभव था? इसी दौरान भाजपा कार्यकर्ता सुरेश यादव की सहायता से आसिफ कुरैशी बस्ती में दोनों सम 100 लोगों को भोजन पैकेट वितरित कर रहे थे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माध्यम से मैं एक अन्य क्षेत्र में राशन किट का वितरण कर रही थी. आसिफ को जानकारी मिली तो मुझसे राशन किट के बारे में पूछा. मैंने कहा, आप संघ के कार्यकर्ताओं/स्वयंसेवकों से संपर्क करें, समाज की सहायता के लिए संघ के स्वयंसेवक हमेशा तैयार रहते हैं. आसिफ ने दस बार मुझसे पूछा, मैं कॉल करुं क्या? मुझे नहीं लगता कि मेरी बात सुनेंगे. मैंने कहा, जैसा आप समझ रहे हो, वैसा नहीं है. आप अवश्य फोन कीजिए. आसिफ ने किशोर मोघे को फोन किया और फोन के पश्चात संघ कार्यकर्ताओं की व्यवस्था से बस्ती में वितरण के लिए आसिफ को राशन किट उपलब्ध हुए.

बस्ती में संघ का नाम लेना एक गुस्ताखी था. पर, संघ का सच्चा स्वरूप कोरोना के कारण बस्ती ने देखा. और इस घटना की वजह से मैं इस बस्ती में प्रवेश कर पाई. शुरूआत में लगा कि क्या कोई मेरी बात सुनेगा या नहीं. पर, सभी ने मेरी बात न केवल सुनी, बल्कि महिलाओं ने संकल्प किया कि बस्ती में किसी भी संदेहजनक व्यक्ति को प्रवेश नहीं देंगे. कोरोना के बारे में बस्ती की अन्य महिलाओं एवं रिश्तेदारों को भी बताएंगी. कोरोना के कालखंड में सभी विक्रोली वासियों को लग रहा था कि परिसर में सबसे ज्यादा संक्रमण और रुग्ण इसी बस्ती में होंगे. क्योंकि नियम तोड़ने वाले लोग यहां ज्यादा हैं. पर, मुझे यह बताते हुए आनंद होता है कि इस बस्ती में कोरोना के नियमों का पालन भी किया गया और कोरोना के संक्रमण पर रोक लग गयी. इसका श्रेय बस्ती की महिलाओं को जाता है. जिन्होंने अपने परिवार के लिए, बच्चों के लिए नियमों का पालन आवश्यक समझा.

नोट – कोरोना संक्रमण काल में मुंबई की अनेक बस्तियों में जाकर वहां कार्य करने का एवं जागरण का काम स्वयंप्रेरणा महिला मंडल ने किया. इस मंडल द्वारा मुस्लिम बस्ती, दलित बस्ती, देवदासी बस्ती ऐसी अनेक बस्तियों में यह कार्य किया गया. कार्य के अनुभवों को मंडल की अध्यक्ष, पत्रकार योगिता सालवी ने प्रकट किया है. अलग अलग बस्तियों के अनुभव लेखमाला में हमारे साथ साझा करेंगी.

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