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    सोलर उर्जा श्योर है, प्योर है और सेक्योर है

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    मध्यप्रदेश के रीवा में प्रधानमंत्री ने किया एशिया के सबसे बड़े सोलर प्लांट का उद्घाटन

    भोपाल (विसंकें). मध्यप्रदेश के रीवा में शुक्रवार के सुबह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एशिया के सबसे बड़े सोलर पॉवर प्लांट का उद्घाटन किया. इस सोलर पॉवर प्लांट की क्षमता 750 मेगावाट की है, इस परियोजना में एक सौर पार्क के अंदर स्थित 500 हेक्टेयर भूमि पर 250-250 मेगावाट की तीन सोलर एनर्जी यूनिट्स शामिल हैं. यह परियोजना सालाना लगभग 15 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर कार्बन उत्सर्जन को कम करेगी.

    प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किया, इस दौरान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं मंत्री भी उपस्थित रहे. यह परियोजना राज्य के बाहर एक संस्थागत ग्राहक को आपूर्ति करने वाली पहली रिन्युएबल एनर्जी परियोजना भी है. यह दिल्ली मेट्रो को अपने कुल उत्पादन का 24 प्रतिशत बिजली देगी, जबकि शेष 76 प्रतिशत बिजली मध्य प्रदेश के राज्य बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को आपूर्ति की जाएगी. यह परियोजना ग्रिड क्षमता की चुनौती को जीतने वाली देश की पहली सौर परियोजना है. साल 2017 की शुरुआत में उस समय की मौजूदा सौर परियोजना की लागत लगभग 4.50 रुपये प्रति यूनिट थी, जो अब 2.97 रुपये प्रति यूनिट है और अगले 15 वर्षों तक 0.05 रुपये प्रति यूनिट की वृद्धि की जाएगी. 25 साल की अवधि के लिए 3.30 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध होगी जो अपने आप में ऐतिहासिक है.

    इस सौर पार्क को रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (आरयूएमएसएल) ने विकसित किया है जो मध्य प्रदेश उर्जा विकास निगम लिमिटेड (एमपीयूवीएन) और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की ईकाई सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) की संयुक्त कंपनी है. सौर पार्क के विकास के लिए आरयूएमएसएल को 138 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय मदद दी गई है. सरकार का लक्ष्य है कि 2022 तक देश में 170 गीगावाट (1.70 लाख मेगावाट) अक्षय ऊर्जा उत्पादन हो, जो देश की कुल उर्जा आवश्यकता का 60 प्रतिशत है. इसमें से 100 गीगावाट सोलर पावर का लक्ष्य है. ऐसे में यह परियोजना भारत को अपने लक्ष्य के और नजदीक ले जाएगी.

    यह चिर-पुरातन पहचान लेकर स्वाभिमान और शक्ति के साथ खड़ा ‘अपना’ भारत है

    क्या बोले प्रधानमंत्री ?
    परियोजना का शुभारम्भ करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इस प्लांट से हम दुनिया के टॉप-5 देशों में पहुंच गए हैं. ये 21वीं सदी का सबसे अहम कदम है. ये श्योर है, प्योर है और सेक्योर है. श्योर इस लिए क्योंकि दूसरे स्रोत खत्म हो सकते हैं, लेकिन सूरज दुनिया में हमेशा चमकेगा. प्योर इसलिए क्योंकि ये पर्यावरण को प्रदूषण नहीं करता, सुरक्षित रखता है. सेक्योर इसलिए क्योंकि आत्मनिर्भरता का एक बड़ा प्रतीक है, प्रेरणा है.

    बिजली की जरूरत बढ़ती जा रही है, ऐसे में बिजली की आत्मनिर्भरता बहुत जरूरी है, तभी आत्मनिर्भर भारत बन सकता है. इसमें सौर ऊर्जा एक बहुत बड़ी भूमिका निभाने वाली है और हमारा प्रयास भारत की इसी ताकत को विश्वास देने की है. आत्मनिर्भरता और प्रगति की बात करते हैं, तो अर्थव्यवस्था की बात जरूर आती है. बिजली आधारित परिवहन के लिए नए-नए रिसर्च भी होने वाले हैं, जिससे आम आदमी का जीवन बेहतर होगा और पर्यावरण की रक्षा होगी. एक उदाहरण देते हुए पीएम ने कहा 6 साल में करीब 36 करोड़ एलईडी बल्ब पूरे देश में बांटे जा चुके हैं. 1 करोड़ से अधिक बल्ब देश में स्ट्रीट लाइट में लगाए हैं. सुनने में सामान्य है, लेकिन यह बड़ी बात है. जब ये एलईडी बल्ब नहीं था, तो इसकी जरूरत का अनुभव होता था, लेकिन तब कीमत बहुत अधिक थी. 6 साल में क्या बदला, एलईडी बल्ब की कीमत आज 10 गुना कम हो गई है.

    अक्षय उर्जा के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है भारत
    ब्रिटेन की अकाउंटेंसी फर्म अर्नेस्ट एंड यंग (ईवाई) ने अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के लिए आकर्षक देशों की सूची में भारत को दूसरा स्थान दिया था. ईवाई ने अपनी सूची में भारत को अमेरिका से ऊपर जगह दी है. इसका कारण उसने भारत सरकार की ऊर्जा नीति और अक्षय ऊर्जा की दिशा में प्रयासों को बताया है.
    आंकड़ों के अनुसार बीते तीन साल में भारत में सौर ऊर्जा का उत्पादन अपनी स्थापित क्षमता से चार गुना बढ़ कर 12 हजार मेगावाट पार कर गया है. एक अनुमान के अनुसार साल 2040 तक भारत आबादी के मामले में चीन को पीछे छोड़ सकता है. ऐसे में भविष्य की इस मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा का प्रयोग करना समझदारी भरा कदम है.

    झारखंड में बनेगा तैरता सोलर प्लांट
    अक्षय ऊर्जा के अभियान को और आगे बढ़ाते हुए रांची के गेतलसूद और धुर्वा डैम पर कुल 150 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन करने की योजना है. इन दोनों संयंत्रों को स्थापित करने के लिए हाल ही में विश्व बैंक ने निवेश के लिए सहमति दे दी है. जल संसाधन विभाग और वन विभाग से एनओसी मिल गई है. अगले वर्ष जुलाई से सौर ऊर्जा का उत्पादन शुरू हो जाएगा. गेतलसूद डैम के 1.6 वर्ग किमी क्षेत्र में 100 और धुर्वा डैम के 0.8 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 50 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन करने के लिए सेकी संयंत्र लगाएगा. दोनों संयंत्रों को स्थापित करने में 600 करोड़ रुपये का निवेश होगा है. सेकी के आकलन के अनुसार करीब 1000 लोगों को रोजगार मिलेगा. सौर ऊर्जा अधिकतम 3.5 रुपये प्रति यूनिट की दर से मिलेगी.

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