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“भाषणवीर राहुल जी” एक बार धरातल पर जाकर तो देखें

सौरभ कुमार

राहुल गांधी ने विद्या भारती द्वारा संचालित स्कूलों की तुलना पाकिस्तान के मदरसों से की. पकिस्तान के मदरसे जहां नफरत की घुट्टी पिलाई जाती है, जहां जिहाद के नाम पर बेगुनाहों के सर काटना सिखाया जाता है. कट्टरपंथी तैयार किए जाते हैं. तमाम अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान में संचालित 10,000 से ज्यादा मदरसों में लाखों आतंकी तैयार किए जाते हैं. ये मदरसे चोला तो धार्मिक शिक्षा का ओढ़े हुए हैं, लेकिन इनका काम दुनिया भर में आतंकवाद एक्सपोर्ट करना है.

राहुल गांधी ने जिन छात्रों की तुलना पाकिस्तान के आतंकवादियों से की है, वो आज समाज जीवन के हर क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं. वो सेना की वर्दी में देश की सुरक्षा के लिए सीमा पर बलिदान भी दे रहे हैं और खेलों में देश के लिए स्वर्ण पदक भी ला रहे हैं. विद्या भारती के ये छात्र प्रशासनिक पदों पर देश का भविष्य गढ़ रहे हैं, और तो छोड़िए जिस कांग्रेस पार्टी के राहुल गांधी राजकुमार हैं…उसके भी विधायक, और संभावना है कि विद्या मंदिर से पढ़े सांसद, कार्यकर्ता भी होंगे.

राहुल गांधी एक बार धरातल पर जाकर देखें कि जिन विद्यार्थियों को उन्होंने आतंकवादी बताया है तो शायद उन्हें होश आ जाए और माफ़ी मांग लें.

जब गलवान घाटी में चीन की सेना के साथ हुए मुठभेड़ में भारत के जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया तो पूरा देश रोया था. उस दिन जब चीन के 300 सैनिक कटीले तारों और डंडों के साथ खड़े थे, तो अपने मात्र 20 सैनिक लेकर खाली हाथ उनसे भिड़ जाने वाले, उस कड़कड़ाती ठण्ड में भी चीनी सैनिकों के छक्के छुड़ा देने वाले कर्नल बी. संतोष बाबू विद्या मंदिर के ही छात्र रहे हैं. राहुल जी, विद्या मंदिरों में छात्रों को राष्ट्रभक्ति की शिक्षा दी जाती है. सर्वोच्च बलिदान देने से भी नहीं हिचकिचाते.

राफेल का भारत आगमन तो आपको याद ही होगा, राफेल को लेकर ऊलजुलूल बयानबाजी के कारण आपको सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगनी पड़ी थी. उस राफेल को भारत लेकर आने वाली पहली टीम में शामिल रहे स्क्वॉड्रन लीडर दीपक चौहान भी विद्या मंदिर के ही छात्र रहे हैं.

एक बार प्रियंका दीदी ने टीवी पर सबको बड़े गर्व से बताया था कि आप बहुत स्पोर्टी हैं, शायद खेलों में आपकी रुचि है. राहुल जी भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी नवदीप सैनी, भारतीय महिला नेट बॉल टीम की सदस्य अपर्णा सिंह, एशियाई यूथ एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2019 के स्वर्ण पदक विजेता विपिन कुमार, कांस्य पदक विजेता दीपक यादव, दुनिया भर में अपना परचम फहराने वाली कबड्डी टीम के कोच श्रीनिवास रेड्डी, एशियाई पैरा गेम्स 2018 के स्वर्ण पदक विजेता तरुण ढिल्लों भी शिशु मंदिर/विद्या मंदिर/विद्या भारती के विद्यालय के ही छात्र रहे हैं.

राहुल जी आप भले ही मंत्री न रहे हों, लेकिन पारिवारिक विरासत के कारण प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आपका मिलना-जुलना रहता ही होगा, शायद आप उनका सम्मान भी करते हों. राहुल जी, राजस्थान के पूर्व डीजीपी ओम प्रकाश गल्होत्रा जी, हरियाणा के आईएएस रोशन लाल जी, कॉर्बेट नेशनल पार्क देहरादून के डायरेक्टर आईएफएस सुरेन्द्र मेहरा जी जैसे अनेक प्रशासनिक अधिकारी भी शिशु मंदिरों के पूर्व छात्र रहे हैं.

विद्या भारती के हजारों विद्यालयों में शिक्षा, संस्कार, राष्ट्र सेवा का भाव जागृत किया जाता है. देश के सभी हिस्सों में विद्या भारती 12,000 से ज्यादा औपचारिक विद्यालयों में 34 लाख से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ते हैं (ये बच्चे सिर्फ हिन्दू नहीं हैं, इनमें 80,000 से ज्यादा मुस्लिम और ईसाई बच्चे भी हैं). कई विद्यालय तो ऐसे दूरस्थ अंचलों में हैं, जहां स्वतंत्रता के 70 वर्षों के बाद भी सरकारें तक नहीं पहुंच पाई हैं. हजारों स्थानों पर एकल विद्यालय और संस्कार केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में भी शिक्षा की अलख जग रही है.

इसलिए, राहुल जी एक बार बंद वातानुकूलित कमरे से बाहर निकलिए, इस देश को–इसके समाज को देखिए. इस राष्ट्र के स्पंदन को उसकी भावना को समझिए, तब शायद आप इस तरह लाखों छात्रों और उनके परिवारों का अपमान करने से पहले, राष्ट्र के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वालों को आतंकवादी कहने या उनके साथ तुलना करने से पहले एक बार सोचेंगे.

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