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अनूठा शिवधाम

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भोपाल. देश और दुनिया में भगवान शंकर के अनूठे मंदिर देखने को मिलते हैं. ऐसा ही अनूठा शिव धाम मौजूद है – विदिशा जिले के गंजबासौदा तहसील से महज 10 किलोमीटर दूर ग्राम गमाखर में. जहां एक छोटे से पहाड़ के गर्भ में विराजमान हैं भगवान शिव शंकर. लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि इस छोटे से पहाड़ के आसपास दूर दूर तक किसी अन्य पहाड़ का नामोनिशान मौजूद नहीं है. कहा जाता है कि यह छोटा सा पहाड़ पहले एक चट्टान के रूप में यहां पर स्थित था. लेकिन देखते ही देखते इसका आकार बढ़ता गया और वह चट्टान अब एक पहाड़ का रूप ले चुकी है.

स्वयं प्रगट हुआ पहाड़ग्रामीणों ने कराया जीर्णोद्धार

गमाखर गांव के ग्रामीण बताते हैं कि यह पहाड़ प्राचीन काल में स्वयं ही प्रकट हुआ है और इसी पहाड़ के गर्भ में मौजूद हैं भगवान शिव शंकर. समय के साथ पहाड़ का आकार बदलता गया और धीरे-धीरे यह एक विशाल पहाड़ के रूप में नजर आने लगा. भगवान शंकर के इस प्राचीन मंदिर में क्षेत्र ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से भी भक्तों का तांता दर्शन के लिए लगा रहता है और इसी के चलते गमाखर के ग्रामीणों ने समय के साथ इस मंदिर का जीर्णोद्धार करा कर आधुनिक रूप में इस मंदिर को ढालने का कार्य किया.

मंदिर को लेकर कई किंवदंतियां

गमाखर गांव के ग्रामीण मंदिर को लेकर कई किंवदंतियां बताते हैं. ग्रामीणों के अनुसार मंदिर का संबंध त्रेता युग से भी है. त्रेता युग में जब राम सेतु का निर्माण कार्य चल रहा था, तब गमाखर से भी पत्थर मंगाने का कार्य हुआ, लेकिन राम सेतु का निर्माण पूर्ण हो जाने पर इस चट्टान को यहीं छोड़ दिया और तब से यह चट्टान भगवान भोलेनाथ के मंदिर के रूप में परिवर्तित हो गई. इसी प्रकार पहाड़ से जुड़ी हुई एक अन्य कथा है कि पहाड़ में एक जगह ऐसी भी है, जहां से 24 घंटे ओंकार की आवाज सुनाई देती है. जैसे मंदिर में दर्शन करने आने वाले लोग कान लगाकर जरूर सुनते हैं.

इसी प्रकार मंदिर की एक और विशेषता बताई जाती है. कहा जाता है कि इस पहाड़ की किसी भी चट्टान पर कोई व्यक्ति अगर पत्थर से अपना नाम लिखता है तो कुछ समय बाद वह नाम ऐसे नजर आने लगता है जैसे किसी कारीगर ने छेनी हथौड़ी से उसे टाक दिया हो.

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