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अड़ियल और गैर ज़िम्मेदार ट्विटर अब रूस के राडार पर, राष्ट्र विरोधी भावनाएं भड़काने का आरोप

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर के अड़ियल और गैर ज़िम्मेदार रवैये के साथ विभिन्न देशों के आंतरिक मामलों में घुसपैठ के खिलाफ भारत के बाद रूस से भी आवाज बुलंद होने लगी है. भारत की तरह रूस ने भी ट्विटर पर राष्ट्र विरोधी भावनाएं भड़काने और अशांति पैदा करने का आरोप लगाया है. रूस ने कार्रवाई की चेतावनी भी दी है.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कर दिया कि हालात बिगड़ने पर वह सेवा को बंद करने का फैसला लेने से नहीं हिचकेंगे. यदि कोई भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उनके देश के खिलाफ किसी भी प्रकार की शत्रुतापूर्ण गतिविधि में पाया जाता है तो वह इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे. देश के खिलाफ कोई भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई स्वीकार्य नहीं होगी. रूस में यह बात विपक्षी नेता एलेक्सेई नवलनी समर्थकों के आंदोलन को लेकर कही गई है.

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि आगामी सितंबर में होने वाले देश के संसदीय चुनाव पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष रहें, इसके लिए रूस हरसंभव प्रयास करेगा. आशंका है कि विपक्षी नेता नवलनी के सहारे विदेशी ताकतें देश के मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास कर सकती हैं. लेकिन रूस ऐसा नहीं होने देगा. राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि नवलनी सीआइए का हथियार हैं. उनके जरिये पश्चिमी खुफिया एजेंसियां रूस को अस्थिर करना चाहती हैं.

उल्लेखनीय है कि रूस के विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी ने दावा किया था कि उन्होंने रूसी खुफिया एजेंसी के एक एजेंट से उन्हें जहर देने की बात कबूलवा ली है. नवलनी को 17 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था, उनकी गिरफ्तारी के विरोध में रूस के 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन हुए. राजधानी मॉस्को में प्रदर्शनकारियों ने पुश्किन स्क्वायर का घेराव किया. 18 जनवरी को रूस की अदालत ने विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी को 30 दिनों के लिए हिरासत में भेज दिया था.

पुतिन ने कहा कि जब तक हम अपने स्वयं के विकल्प के साथ नहीं आ जाते हैं, तब तक विदेशी सेवाओं को प्रतिबंधित करना संभव नहीं होगा. अपने देश की कुछ कंपनियों जैसे यैंडेक्स और सबेरबैंक का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पास अच्छी संभावनाएं हैं. जब बड़ी तकनीकी कंपनियां यह देखेंगी कि एक विकल्प मौजूद है और उनका इस बाजार में एकाधिकार नहीं है, तो फिर वे अलग तरह से कार्य करेंगी.

इससे पहले, विदेशी इंटरनेट को प्रतिबंधित करने के लिए रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष ने भी संकेत दिए थे. रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने कहा था कि रूस के प्रति प्रतिकूल कार्यों के संदर्भ में विदेशी इंटरनेट ट्रैफिक को कम करने की संभावना भी है.

उल्लेखनीय है कि 15 अगस्त, 2014 को तत्कालीन रूसी प्रधानमन्त्री दिमित्री मेदवेदेव के रूसी-भाषा के ट्विटर अकाउंट (25 लाख से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स) को हैक कर लिया गया था. इसके साथ ही इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आलोचना करते हुए ट्विटों की बाढ़ सी आ गई थी. सबका एक ही निचोड़ था कि व्लादिमीर पुतिन ‘ग़लत’ थे. हैकर ने सबसे पहले लिखा, “मैं इस्तीफ़ा दे रहा हूं, मैं सरकार के कामों पर शर्मिंदा हूं, मुझे माफ़ करना.” अकाउंट हैक करने वाले ने लिखा कि मेदवेदेव अब स्वतंत्र फ़ोटोग्राफ़र के रूप में नया करियर शुरू करेंगे. रूस के हैकरों के एक समूह शाल्टे-बोल्टे, ने इस साइबर हमले की ज़िम्मेदारी ली थी.

समूह ने यह भी दावा किया कि उसने प्रधानमंत्री के जीमेल अकाउंट और आईफ़ोन में भी घुसपैठ कर ली है, ध्यान देने वाली बात ये है कि मेदवेदेव के अंग्रेज़ी-भाषा वाले अकाउंट पर इसका कोई असर नहीं पड़ा.

नवम्बर 2020 में भी रूसी सांसदों ने फेसबुक, ट्विटर और एल्फाबेट इंक के यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफोर्म पर रोक लगाने के लिए संसद में एक कानून पेश किया था. सोशल मीडिया मंच पर रोक लगाने का प्रस्ताव था. सांसदों ने इन सोशल मीडिया मंचों पर रूसी मीडिया के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया था.

सत्तारूढ़ पार्टी के रूसी सांसदों को शिकायत मिली थी कि ट्विटर ने कुछ रूसी मीडिया कंपनियों के अकाउंट्स पर ‘सरकार समर्थित मीडिया’ का लेबल लगाया है. इससे पहले भी ट्विटर ने सरकार के अधिकारियों और वरिष्ठ कर्मचारियों के अकाउंट पर भी ऐसे लेबल लगाए थे, रूस ने तब भी इसका विरोध किया था.

भारत सरकार ने 26 जनवरी को दिल्ली में कृषि कानून विरोधी आंदोलन के नाम पर लाल किले में हुई हिंसा के बाद ट्विटर से स्थायी रूप से कई अकाउंट्स को हटाने के लिए कहा था, लेकिन ट्विटर ने ऐसा नहीं किया. परिणामस्वरुप भारत सरकार ने ट्विटर के विकल्प के रूप में देश के नागरिकों को ‘कू’ जैसी स्वदेशी कंपनी का उपयोग करने की अप्रत्यक्ष सलाह दी. साथ ही ट्विटर को भी कड़ी कार्रवाई के प्रति चेताया था. भारत के बाद अब रूस ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर को चेतावनी दी है, साथ ही उसके विकल्प की तलाश में लग गया है.

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