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सुपरसोनिक मिसाइल स्मार्ट का सफलतापूर्वक परीक्षण

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नई दिल्ली. भारत ने चीन और पाकिस्तान के साथ तनाव के बीच सोमवार को सुपरसोनिक मिसाइल असिस्टेड रिलीज ऑफ टॉरपीडो (स्मार्ट) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. यह परीक्षण ओडिशा के समुद्री तट पर किया गया. यह एक ऐसी प्रणाली है – जिसमें टॉरपीडो के साथ मिसाइल भी होती है. पनडुब्बी रोधी जंग में यह तकनीक नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा सकती है.

परीक्षण के दौरान रेंज और अल्टीट्यूड (ऊंचाई) तक मिसाइल की उड़ान, नोज कोन को अलग करने, टारॅपीडो के रिलीज और विलोसिटी रिडक्शन मैकेनिज्म के फैलाव (वीआरएम) सहित मिशन के सभी लक्ष्य हासिल किए गए. स्मार्ट के बारे में, डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी ने कहा कि पनडुब्बी रोधी जंग (एएसडब्ल्यू) में स्मार्ट एक गेंमचेंजर तकनीक डेमोस्ट्रेशन है. परीक्षण के दौरान की घटनाओं की निगरानी ट्रैकिंग स्टेशनों (रडार, इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सिस्टम्स) द्वारा तट के जरिए और डाउन रेंज शिप के साथ टेलीमेट्री स्टेशनों द्वारा की गई. स्मार्ट के लिए आवश्यक तकनीक को तैयार करने में डीआरडीओ की विभिन्न लैब जैसे डीआरडीएल, आरसीआई हैदराबाद, एडीआरडीई आगरा, एनएसटीएल विशाखापट्टनम ने अहम भूमिका निभाई.

क्या है स्मार्ट

यह एक तरह की सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल है. इसके साथ एक कम वजन का टॉरपीडो लगा है जो पेलोड की तरह इस्तेमाल होता है. दोनों मिलकर इसे एक सुपरसोनिक एंटी-सबमरीन मिसाइल बना देते हैं यानि इसमें मिसाइल के फीचर्स भी मिलेंगे और पनडुब्बी नष्ट करने की क्षमता भी. पूरी तरह तैयार होने पर इस हथियार प्रणाली की रेंज 650 किलोमीटर होगी. इतनी ज्यादा रेंज वाली प्रणाली की मौजूदगी नौसेना को दुनिया की सबसे खतरनाक नौसेनाओं की सूची में और ऊपर पहुंचा देगी.

देश के पास वरुणास्त्र नामक एक पनडुब्बी रोधी टॉरपीडो पहले से है जो जीपीएस की मदद से अपने लक्ष्य को भेद सकता है. स्मार्ट इसकी तुलना में काफी हल्का है. एक टन से अधिक वजनी वरुणास्त्र अपने साथ 250 किलो तक का वॉरहेड ले जा सकता है. उसका गाइडेंस सिस्टम भी उन्नत है. भारत के पास ब्रह्मोस सुपरसोनिक एंटी-शिप और लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल भी है.

चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव को देखते हुए डीआरडीओ अति सक्रिय हो गया है. पिछले कुछ हफ्तों से वह लगातार परीक्षण कर रहा है. शौर्य मिसाइल के नए वर्जन का भी शनिवार को सफल परीक्षण किया गया. यह मिसाइल 800 किलोमीटर दूर तक लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम है. इसके लिए पिछले महीने एमबीटी अर्जुन टैंक से लेज़र गाइडेड एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का परीक्षण किया गया था. एजीटीएम हर तरह के टैंक को नष्ट करने में सक्षम होगा. इसके अलावा ‘अभ्यास’ हाई स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (हीट) का भी सफलतापूर्वक परीक्षण हुआ.

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सफलता के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) को बधाई दी. उन्होंने ट्वीट किया कि डीआरडीओ ने सफलतापूर्वक सुपरसोनिक मिसाइल असिस्टेड रिलीज ऑफ टारपीडो, स्मार्ट का परीक्षण किया है. यह पनडुब्बी रोधी युद्ध में स्टैंड ऑफ क्षमता के लिए एक प्रमुख तकनीकी सफलता होगी. वह इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए डीआरडीओ और अन्य स्टेकहोल्डरों को बधाई देते हैं.

 

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