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सेविका समिति द्वारा 108 स्थानों पर सूर्य नमस्कार श्रृंखला का आयोजन

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जयपुर. राष्ट्र सेविका समिति की सेविकाओं ने 108 स्थानों पर पतंजलि को सहज नमन कर सूर्य नमस्कार श्रृंखला बनाई. मरुभूमि में सेविकाओं द्वारा प्रातः सात बजे जोधपुर (सूर्यनगरी) से आरम्भ श्रृंखला का समापन सायं सात बजे जैसलमेर (स्वर्णनगरी) में हुआ. समिति की प्रचारिका ऋतु ने इसे एक कीर्तिमान बताया.

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राष्ट्र सेविका समिति, राजस्थान के आंचलिक स्तरों पर तीन आयोजन हुए. दक्षिण राजस्थान के 11 ज़िलों के योग शिविर का प्रारंभ माधुरी दीदी के मार्गदर्शन के साथ हुआ तथा समापन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अ.भा. योग प्रमुख व क्षेत्र प्रचारक प्रमुख श्रीवर्धन ने मुद्रा विज्ञान का अभ्यास करवाया. शिविर का प्रचार कार्य व तकनीकी पक्ष का संचालन दीपिका व रीना द्वारा किया गया. पूर्वी राजस्थान के 12 ज़िलों में समापन के अवसर पर 100 महिलाएं अपने परिजनों के साथ अत्यंत उत्साह पूर्वक जुड़ीं. पश्चिमी राजस्थान के सभी दस जिलों में समापन के अवसर पर सेविकाओं के योगासन प्रात्यक्षिक के बाद मनीषा विजय संतजी ने अपने विचार प्रकट किए.

सेविका समिति जिला टोलियों द्वारा समाज के शारीरिक व मानसिक शक्ति की वृद्धि हेतु अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस से पूर्व 1 से 20 ज़ून तक अधिकांश ज़िलों में, कहीं कहीं दो या तीन ज़िले मिलाकर कुल 17 स्थानों पर सप्त दिवसीय ई- योग शिविर आयोजित किए गए. इन शिविरों में महिलाओं ने कुशल योग शिक्षिकाओं के निर्देशन में उत्साह के साथ प्रतिदिन एक घंटा योगाभ्यास किया. सभी शिविरों में 825 परिवार जुड़े.

जयपुर की योग शिक्षिका एवं सेविका गुलशन ने कहा कि सेविकाओं द्वारा स्वयं सतत योग का संकल्प लेते हुए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को योग के बारे में जागृत कर स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करना, प्रतिदिन योगाभ्यास द्वारा प्रतिरोधक क्षमता एवं प्रतिरक्षा तंत्र के साथ अपनी प्राचीनतम संस्कृति का ज्ञान प्राप्त कराना तथा घर घर योग पहुंचाना ही इस श्रृंखला के आयोजन का लक्ष्य था. समिति आगे भी ऐसे प्रयास करती रहेगी.

उन्होंने बताया कि शिविरों में कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए चक्र शुद्धि एवं प्राणायाम का विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया गया, साथ ही सूर्य नमस्कार, आसन तथा मुद्राओं के बारे में भी सिखाया गया. सूक्ष्म व्यायाम, अनुलोम, विलोम, सूर्य भेदन, चन्द्रभेदन व भस्त्रिका प्राणायाम आदि का भी अभ्यास कराया गया.

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