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कोरोना संकट काल में बच्चों की शिक्षा का स्वयंसेवकों ने संभाला जिम्मा

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भोपाल (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हमेशा से ही संकट के समय में समाज के साथ अग्रिम पंक्ति में खड़ा हुआ दिखाई देता है. आज पूरे देश में कोरोना एक महासंकट के रूप में सामने आया है. इस महामारी के चलते सरकार ने एहतियात बरतते हुए लॉकडाउन के पहले चरण में ही समस्त शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया. पूरे देश में बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही थी, छोटे-छोटे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे थे. जिसकी वजह से उनका शैक्षणिक विकास में बाधा उत्पन्न हो गई थी. विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में तथा गरीब वर्ग के लिए समस्या अधिक थी. संकट के समय में गंभीरता दिखाते हुए समाज के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया.

कोरोना के कारण प्रभावित हुई शिक्षा व्यवस्था को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्यभारत प्रांत के स्वयंसेवकों ने मोहल्ला पाठशाला के माध्यम से बच्चों को उनके घरों में ही विषयगत शिक्षा के साथ- साथ नैतिक शिक्षा व संस्कारों का पाठ पढ़ाना शुरू किया है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने भोपाल प्रवास के दौरान स्वयंसेवकों से बच्चों की शिक्षा के लिए कार्य करने का विचार करने को कहा था. जिससे किसी भी वर्ग या क्षेत्र के बाल की शिक्षा में व्यवधान न हो.

इसके पश्चात स्वयंसेवकों ने मोहल्ला पाठशाला/कोचिंग/कक्षा का प्रकल्प प्रारंभ किया है. मध्यभारत प्रांत के विदिशा, गुना, शिवपुरी,  मुरैना, राजगढ़, नर्मदापुर, भोपाल, ग्वालियर विभाग के लगभग सभी जिलों में बाल गोकुलम केंद्र यानि मोहल्ला पाठशाला का संचालन शुरू किया गया है. इसके साथ ही विद्याभारती, सेवा भारती, एकल विद्यालय सहित सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं  ने कोरोना से संबंधित प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए बच्चों को उनके मोहल्लों में जाकर छोटे-छोटे समूह में पढ़ाना शुरू किया है.

बाल गोकुलम केंद्र का मुख्य उद्देश्य है कि संकट की घड़ी में जब सभी विद्यालय, कोचिंग संस्थान बंद पड़े हैं तो ऐसे समय में बच्चों की शिक्षा का कार्य ना रुके और बच्चों को लगातार उनकी पढ़ाई कराई जा सके. ऐसे समय में यदि इन बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है तो सीधे तौर पर यह समाज का बड़ा नुकसान होगा.

31 जिलों में 264 स्थानों पर चल रहे 516 केंद्र

मध्यभारत प्रांत द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार 22 अगस्त तक मध्यभारत प्रांत के 31 जिलों में 264 स्थानों पर 516 बाल गोकुलम केंद्र चलाए जा रहे हैं और भविष्य में प्रांत के अन्य जिलों और विशेषकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र, जहाँ बच्चों की पढ़ाई में बाधा आ रही है, उन क्षेत्रों तक इन केंद्रों को चलाने की योजना है. गोकुलम केंद्र की सहायता से हजारों विद्यार्थी नियमित अपनी कक्षाएं ले रहे हैं, गोकुलम केंद्रों में बच्चों को नियमित गृह कार्य दिया जा रहा है और दूसरे दिन गृह कार्य को जाँच कर बच्चों को सभी विषय अलग-अलग रूप से पढ़ाए जा रहे हैं.

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