You Are Here: Home » Posts tagged "आपातकाल"

    कर्मयोगी सोहन सिंह जी का राष्ट्र को सम्पूर्ण समर्पण

    एक ऐसी पद्धति जिस पर चलकर असंख्य कर्म योगियों ने अपने जीवन को खपा दिया व इस राष्ट्र मंदिर को महकाया. उन्हीं पूजनीय डॉक्टर हेडगेवार की माला के मोती उस पथ के पथिक स्वर्गीय श्री सोहन सिंह जी थे. जिन्होंने दधिची की तरह अपने जीवन को गला दिया. जीवन का हर क्षण, हर पल राष्ट्र को समर्पित कर दिया. उनका चयन भारतीय वायुसेना में हो गया था, किन्तु देश सेवा के निमित्त उन्होंने नौकरी को ठुकरा दिया था. राष्ट्रीय आपातकाल के ...

    Read more

    08 अक्तूबर / पुण्यतिथि – लोकनायक जयप्रकाश नारायण

    लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने जहां एक ओर स्वाधीनता संग्राम में योगदान दिया, वहां 1947 के बाद भूदान आंदोलन और खूंखार डकैतों के आत्मसमर्पण में भी प्रमुख भूमिका निभाई. 1970 के दशक में तानाशाही के विरुद्ध हुए आंदोलन का उन्होंने नेतृत्व किया. इन विशिष्ट कार्यों के लिए शासन ने 1998 में उन्हें मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया. जयप्रकाश जी का जन्म 11 अक्तूबर, 1902 को उ.प्र. के बलिया जिले में हुआ था. पटना में पढ़ ...

    Read more

    23 जुलाई / पुण्यतिथि – आपातकाल के शिकार पांडुरंग पंत क्षीरसागर

    नई दिल्ली. पांडुरंग पंत क्षीरसागर का जन्म वर्धा (महाराष्ट्र) के हिंगणी गांव में हुआ था. बालपन में ही स्थानीय शाखा में जाने लगे. आगामी शिक्षा के लिए नागपुर आकर वे इतवारी शाखा के स्वयंसेवक बने, जो संख्या, कार्यक्रम तथा वैचारिक रूप से बहुत प्रभावी थी. बालासाहब देवरस जी उस शाखा के कार्यवाह थे. शीघ्र ही वे बालासाहब जी के विश्वस्त मित्र बन गये. उनकी प्रेरणा से पांडुरंग जी ने आजीवन संघ कार्य करने का निश्चय कर लिया ...

    Read more

    आपातकाल, पुलिसिया कहर और संघ – भाग 3

    संघर्ष की भूमिगत सञ्चालन व्यवस्था प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 25 जून 1975 को समूचे देश में थोपा गया आपातकाल एक तरफा सरकारी अत्याचारों का पर्याय बन गया. इस सत्ता प्रायोजित आतंकवाद को समाप्त करने के लिए संघ द्वारा संचालित किया गया सफल भूमिगत आन्दोलन इतिहास का एक महत्वपूर्ण पृष्ठ बन गया. सत्ता के इशारे पर बेकसूर जनता पर जुल्म ढा रही पुलिस की नजरों से बचकर भूमिगत आन्दोलन का सञ्चालन करना कितना कठिन हुआ होगा ...

    Read more

    आपातकाल, पुलिसिया कहर और संघ – भाग 2

    सत्ता प्रायोजित आतंकवाद इलाहबाद हाईकोर्ट द्वारा सजा मिलने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने अपने राजनीतिक अस्तित्व और सत्ता को बचाने के उद्देश्य से जब 25 जून 1975 को रात के 12 बजे आपातकाल की घोषणा की तो देखते ही देखते पूरा देश पुलिस स्टेट में परिवर्तित हो गया. सरकारी आदेशों के प्रति वफ़ादारी दिखाने की होड़ में पुलिस वालों ने बेकसूर लोगों पर बेबुनियाद झूठे आरोप लगाकर गिरफ्तार करके जेलों में ठूंसना शुरू ...

    Read more

    आपातकाल, पुलिसिया कहर और संघ

    भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 में उस समय एक काला अध्याय जुड़ गया, जब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सभी संवैधानिक व्यवस्थाओं, राजनीतिक शिष्टाचार तथा सामाजिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर मात्र अपना राजनीतिक अस्तित्व और सत्ता बचाने के लिए देश में आपातकाल थोप दिया. उस समय इंदिरा गांधी की अधिनायकवादी नीतियों, भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा और सामाजिक अव्यवस्था के विरुद्ध सर्वोदयी नेता जयप्रकाश नार ...

    Read more

    इंदिरा गांधी की सबसे बड़ी राजनीतिक भूल – सालों से जेल में बंद शेख अब्दुल्ला को बाहर निकाल सौंप दी थी सत्ता की चाबी

    एक समय में महाराजा हरिसिंह ने जवाहरलाल नेहरू को आगाह किया था कि शेख अब्दुल्ला पर भरोसा नहीं करना चाहिए. सरदार पटेल भी शेख से नाराज़ रहते थे क्योंकि वे उसकी मंशा को समझ चुके थे. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने प्रधानमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा था कि शेख पर जरुरत से ज्यादा विश्वास देशहित में नहीं है. फिर भी नेहरू के अड़ियल रवैये ने सबकी सलाह को अनसुना कर दिया. उसी रास्ते पर उनके बेटी और देश की प्रधानमंत्री इंदि ...

    Read more

    14 जून / जन्मदिवस – प्रसिद्धि से दूर : भाऊसाहब भुस्कुटे

    नई दिल्ली. संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी की दृष्टि बड़ी अचूक थी. उन्होंने ढूंढ-ढूंढकर ऐसे हीरे एकत्र किये, जिन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन और परिवार की चिन्ता किये बिना पूरे देश में संघ कार्य के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. ऐसे ही एक श्रेष्ठ प्रचारक थे 14 जून, 1915 को बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) में जन्मे गोविन्द कृष्ण भुस्कुटे, जो भाऊसाहब भुस्कुटे के नाम से प्रसिद्ध हुये. 18 वीं सदी में इनके अधिकांश पूर् ...

    Read more

    जब हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री के खिलाफ सुनाया था निर्णय

    सारी परिस्थितियों के बीच 23 मई 1975 को सुनवाई पूरी होने पर जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने फैसला सुरक्षित रख लिया. आखिरकार फैसले का दिन (12 जून 1975) आया. जस्टिस सिन्हा ने इंदिरा गांधी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उनका चुनाव रद्द कर दिया और 06 साल तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया. यही फैसला देश में आपातकाल का केंद्र बिंदु बना. “जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कोर्ट में आएं, तब कोई भी सुरक्षाकर्मी चाहे वह सुरक्षा के ...

    Read more

    संघ और राजनीति

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना के समय से ही स्वयं को सम्पूर्ण समाज का संगठन मानता, बताता रहा है. स्वतंत्रता के पश्चात भी संघ की इस भूमिका में कोई अंतर नहीं आया. इसलिए स्वतंत्रता के पश्चात 1949 में संघ का जो संविधान बना उस में भी यह स्पष्ट है कि यदि कोई स्वयंसेवक राजनीति में सक्रिय होना चाहता है तो वह किसी भी राजनैतिक दल का सदस्य बन सकता है. यह संविधान भारतीय जनसंघ की स्थापना के पहले बना है. जनसंघ की स्थापन ...

    Read more

    हमारे न्यूज़लेटर के लिए साइन अप करें

    VSK Bharat नवीनतम समाचार के बारे में सूचित करने के लिए अभी सदस्यता लें

    Scroll to top