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    23 जुलाई / पुण्यतिथि – आपातकाल के शिकार पांडुरंग पंत क्षीरसागर

    नई दिल्ली. पांडुरंग पंत क्षीरसागर का जन्म वर्धा (महाराष्ट्र) के हिंगणी गांव में हुआ था. बालपन में ही स्थानीय शाखा में जाने लगे. आगामी शिक्षा के लिए नागपुर आकर वे इतवारी शाखा के स्वयंसेवक बने, जो संख्या, कार्यक्रम तथा वैचारिक रूप से बहुत प्रभावी थी. बालासाहब देवरस जी उस शाखा के कार्यवाह थे. शीघ्र ही वे बालासाहब जी के विश्वस्त मित्र बन गये. उनकी प्रेरणा से पांडुरंग जी ने आजीवन संघ कार्य करने का निश्चय कर लिया ...

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    आपातकाल, पुलिसिया कहर और संघ – भाग 3

    संघर्ष की भूमिगत सञ्चालन व्यवस्था प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 25 जून 1975 को समूचे देश में थोपा गया आपातकाल एक तरफा सरकारी अत्याचारों का पर्याय बन गया. इस सत्ता प्रायोजित आतंकवाद को समाप्त करने के लिए संघ द्वारा संचालित किया गया सफल भूमिगत आन्दोलन इतिहास का एक महत्वपूर्ण पृष्ठ बन गया. सत्ता के इशारे पर बेकसूर जनता पर जुल्म ढा रही पुलिस की नजरों से बचकर भूमिगत आन्दोलन का सञ्चालन करना कितना कठिन हुआ होगा ...

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    आपातकाल, पुलिसिया कहर और संघ – भाग 2

    सत्ता प्रायोजित आतंकवाद इलाहबाद हाईकोर्ट द्वारा सजा मिलने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने अपने राजनीतिक अस्तित्व और सत्ता को बचाने के उद्देश्य से जब 25 जून 1975 को रात के 12 बजे आपातकाल की घोषणा की तो देखते ही देखते पूरा देश पुलिस स्टेट में परिवर्तित हो गया. सरकारी आदेशों के प्रति वफ़ादारी दिखाने की होड़ में पुलिस वालों ने बेकसूर लोगों पर बेबुनियाद झूठे आरोप लगाकर गिरफ्तार करके जेलों में ठूंसना शुरू ...

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    आपातकाल, पुलिसिया कहर और संघ

    भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 में उस समय एक काला अध्याय जुड़ गया, जब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सभी संवैधानिक व्यवस्थाओं, राजनीतिक शिष्टाचार तथा सामाजिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर मात्र अपना राजनीतिक अस्तित्व और सत्ता बचाने के लिए देश में आपातकाल थोप दिया. उस समय इंदिरा गांधी की अधिनायकवादी नीतियों, भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा और सामाजिक अव्यवस्था के विरुद्ध सर्वोदयी नेता जयप्रकाश नार ...

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    इंदिरा गांधी की सबसे बड़ी राजनीतिक भूल – सालों से जेल में बंद शेख अब्दुल्ला को बाहर निकाल सौंप दी थी सत्ता की चाबी

    एक समय में महाराजा हरिसिंह ने जवाहरलाल नेहरू को आगाह किया था कि शेख अब्दुल्ला पर भरोसा नहीं करना चाहिए. सरदार पटेल भी शेख से नाराज़ रहते थे क्योंकि वे उसकी मंशा को समझ चुके थे. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने प्रधानमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा था कि शेख पर जरुरत से ज्यादा विश्वास देशहित में नहीं है. फिर भी नेहरू के अड़ियल रवैये ने सबकी सलाह को अनसुना कर दिया. उसी रास्ते पर उनके बेटी और देश की प्रधानमंत्री इंदि ...

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    14 जून / जन्मदिवस – प्रसिद्धि से दूर : भाऊसाहब भुस्कुटे

    नई दिल्ली. संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी की दृष्टि बड़ी अचूक थी. उन्होंने ढूंढ-ढूंढकर ऐसे हीरे एकत्र किये, जिन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन और परिवार की चिन्ता किये बिना पूरे देश में संघ कार्य के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. ऐसे ही एक श्रेष्ठ प्रचारक थे 14 जून, 1915 को बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) में जन्मे गोविन्द कृष्ण भुस्कुटे, जो भाऊसाहब भुस्कुटे के नाम से प्रसिद्ध हुये. 18 वीं सदी में इनके अधिकांश पूर् ...

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    जब हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री के खिलाफ सुनाया था निर्णय

    सारी परिस्थितियों के बीच 23 मई 1975 को सुनवाई पूरी होने पर जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने फैसला सुरक्षित रख लिया. आखिरकार फैसले का दिन (12 जून 1975) आया. जस्टिस सिन्हा ने इंदिरा गांधी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उनका चुनाव रद्द कर दिया और 06 साल तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया. यही फैसला देश में आपातकाल का केंद्र बिंदु बना. “जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कोर्ट में आएं, तब कोई भी सुरक्षाकर्मी चाहे वह सुरक्षा के ...

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    संघ और राजनीति

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना के समय से ही स्वयं को सम्पूर्ण समाज का संगठन मानता, बताता रहा है. स्वतंत्रता के पश्चात भी संघ की इस भूमिका में कोई अंतर नहीं आया. इसलिए स्वतंत्रता के पश्चात 1949 में संघ का जो संविधान बना उस में भी यह स्पष्ट है कि यदि कोई स्वयंसेवक राजनीति में सक्रिय होना चाहता है तो वह किसी भी राजनैतिक दल का सदस्य बन सकता है. यह संविधान भारतीय जनसंघ की स्थापना के पहले बना है. जनसंघ की स्थापन ...

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    राष्ट्र की रक्षा करना ही पत्रकारिता का धर्म – बल्देव भाई शर्मा

    नोएडा. नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष बल्देव भाई शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता का धर्म राष्ट्र की रक्षा करना है. देश में पत्रकारिता का उदय राष्ट्र जागरण के लिए ही हुआ था. आपातकाल के दौरान आम लोगों की आवाज कुचलने की पूरी कोशिश की गई थी. उस समय के अखबारों को लिखने की आजादी नहीं थी. वे 25 जून को प्रेरणा शोध संस्थान, नोएडा में उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान लखनऊ के साथ संयुक्त तत्वाधान में आयोजित ‘आपातकाल की साहित्य सर्जन ...

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    आपातकाल के दौरान लोकतंत्र सेनानियों का अभिनन्दन किया

    मेरठ (विसंकें). सन् 1975 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा घोषित आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष में जेल जाने वाले एवं अनेक प्रकार की यातनाओं को सहने वाले कार्यकर्ताओं का ‘‘कार्यकर्ता मिलन’’ कार्यक्रम शंकर आश्रम शिवाजी मार्ग स्थित संघ कार्यालय में आयोजित किया गया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघचालक डॉ. दर्शन लाल अरोड़ा जी ने आपातकाल के अनुभवों को बताते हुए कहा कि 25 जून, 1975 को आपातकाल की घोषणा के साथ ही इंद ...

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