करंट टॉपिक्स

अपनी विरासत को संजो रहा भारत

विश्व विरासत दिवस प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है. वर्ष 1982 में यूनेस्को ने विश्व विरासत दिवस मनाना प्रारंभ किया था. इसका मुख्य...

भाषा के प्रति डॉ. आम्बेडकर का राष्ट्रीय दृष्टिकोण

लोकेन्द्र सिंह बाबा साहेब डॉ. भीमराव आम्बेडकर के लिए भाषा का प्रश्न भी राष्ट्रीय महत्व का था. उनकी मातृभाषा मराठी थी. अपनी मातृभाषा पर उनका...

मीम-भीम के अंतर्तत्व को समझें समाज बंधु

प्रवीण गुगनानी डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर केवल किसी एक समुदाय या जाति विशेष में व्याप्त रूढ़ियों, कुरीतियों और बुराइयों हेतु ही चिंतित नहीं थे. बाबा...

सनातन का अर्थ है, जो कल भी था, आज भी है और हमेशा रहेगा – स्वामी गोविंददेव गिरि जी

मुंबई. हिंदी विवेक के "सनातन भारत" ग्रंथ में सनातन परम्परा से सम्बंधित सभी प्रश्नों को समाहित किया गया है. विचार, भाषा और कलेवर की दृष्टि...

क्यों भड़कती है हिंसा?

बलबीर पुंज बीते कुछ वर्षों से हिन्दू पर्वों पर निकलने वाली शोभायात्राओं पर हिंसक हमले तेज हुए हैं. ऐसा करने वाले कौन हैं, यह सर्विदित...

अपने महापुरुषों की कल्पना का भारतवर्ष बनाना ही संघ का संकल्प – डॉ. मोहन भागवत जी

कर्णावती, गुजरात. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ - कर्णावती महानगर द्वारा अयोजित समाज शक्ति संगम कार्यक्रम में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि स्वतंत्रता के...

डॉ. आम्बेडकर जी से गद्दारी करने वाली कांग्रेस

प्रशांत पोळ आज १४ अप्रैल. डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर जी की जयंती है. अनेक राज्यों में चुनाव का माहौल है. कांग्रेस के नेता आज डॉ. आम्बेडकर...

अनुसूचित जनजातियां – संवैधानिक एवं सांस्कृतिक पहलू

अनुसूचित जनजाति, यह नाम भारत में एक वर्ग के रूप में संविधान के निर्माण के साथ आया. परंतु भारत में यह छोटे-छोटे समूहों के रूप...

बाबा साहेब ने पत्रकारिता को बताया सामाजिक न्याय का माध्यम

लोकेन्द्र सिंह बाबा साहेब डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर का व्यक्तित्व बहुआयामी, व्यापक एवं विस्तृत है. उन्हें हम उच्च कोटि के अर्थशास्त्री, कानूनविद, संविधान निर्माता, ध्येय...

केजी बालकृष्णन आयोग – बाबासाहेब के दृष्टिकोण को लागू करने का दायित्व

एक गोंडी मुहावरा है – बुच्च-बुच्च आयाना कव्वीते पालकी रेंगिना अर्थात आगे आगे होना, किंतु अपने मूल विषय पर कुछ भी ध्यान न देना. रंगनाथ...