करंट टॉपिक्स

धरती आबा – जनजातीय गौरव

प्रशांत पोळ बिरसा मुंडा अद्भुत व्यक्तित्व हैं. कुल जमा पच्चीस वर्ष का ही छोटा सा जीवन उन्हें मिला. किन्तु इस अल्पकालीन जीवन में उन्होंने जो...

इंडिजेनस डे – यूरोपियन्स के लिए पश्चाताप व क्षमा मांगने का दिन

प्रवीण गुगनानी मूलनिवासी दिवस या इंडिजिनस पीपल डे, भारत में एक नया षड्यंत्र है. सबसे बड़ी बात यह कि इस षड्यंत्र को जिस जनजाति समाज...

जनजाति समाज – अंग्रेजों ने षड्यंत्रपूर्वक बार-बार बदला धर्म कोड, पर जीवन व पूजा पद्धति नहीं बदल सके

ईसाई मिशनरियां और कुछ ताकतें पिछले लगभग डेढ़ सदी से यह स्थापित करने में लगी हैं कि वनवासी हिन्दू नहीं हैं. हालाँकि, उनके नेरेटिव को...

भारतवासी मूलनिवासी – बालासाहब देशपांडे ने दशकों पहले ही भांप ली थी साजिश, किया था आगाह

भारत में 700 से अधिक जनजातियां निवास करती हैं, जिनकी जनसंख्या लगभग 10 करोड़ से अधिक है. अपने पारंपरिक ज्ञान के विशाल भंडार के साथ...

कैसे भारत के जनजातीय समाज को ‘आदिवासी’ बनाया जा रहा है..?

09 अगस्त को "विश्व मूलनिवासी दिवस" मनाया जा रहा है. भारत में "विश्व आदिवासी दिवस" के रूप में मनाया जाता है. देश के विभिन्न हिस्सों...

महज राजनीतिक संकेतवाद नहीं द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति निर्वाचित होना

उमेश उपाध्याय (वरिष्ठ पत्रकार) राजनीति और समाज जीवन में संकेतों की अपनी जगह होती है. बड़े लक्ष्य के लिए यदि संकेत के तौर पर किसी...

30 दिसंबर / बलिदान दिवस – मेघालय का क्रांतिवीर उ कियांग नांगवा

स्वाधीनता का अमृत महोत्सव नई दिल्ली. उ कियांग नांगवा मेघालय के एक क्रान्तिकारी वीर थे. 18वीं शती में मेघालय की पहाड़ियों पर अंग्रेजों का शासन...

सेवागाथा – बांबू के सहारे सँवरते जीवन

कच्छ के भूकंप में जमींदोज हो चुके घरों के मलबे के ढेर पर आंसू बहाने वाले लोगों को बाम्बू के अनोखे घर देने वाले, महाराष्ट्र...

राम का आत्मविश्वास राम है – श्याम गुप्त

नई दिल्ली. क्या ऐसा कोई भारतवासी होगा जो भारत मां को नहीं मानता हो? क्या कोई ऐसा हिन्दू होगा, जिससे राम की याद न आती...

निधि समर्पण अभियान – मैं तो पुरानी स्कूटी ले लूंगी

भोपाल. सैकड़ों वर्ष के संघर्ष के बाद अब जाकर आराध्य देव मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का मंदिर निर्माण होते देख रहे हैं. भारत भूमि के जन-जन...