करंट टॉपिक्स

विवेकानंद शिला स्मारक के शिल्पी – एकनाथ रानाडे

एकनाथ रानाडे जी का जन्म 19 नवम्बर, 1914 को ग्राम टिलटिला (जिला अमरावती, महाराष्ट्र) में हुआ था. पढ़ने के लिए वे अपने बड़े भाई के...

स्वाधीनता के अमृत काल में विवेकानन्द संदेश यात्रा

सन् 1857 से चले लम्बे स्वाधीनता संग्राम के उपरान्त भारत 15 अगस्त, 1947 को स्वाधीन हुआ. इस वर्ष हमारी स्वाधीनता को 75 वर्ष पूर्ण हो...

भूमि, जन और संस्कृति से ही राष्ट्र का निर्माण होता है – दत्तात्रेय होसबाले जी

भारतवर्ष के कण-कण में लोक निहित है – आरिफ मोहम्मद खान गुवाहाटी. श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र के प्रेक्षागृह में चार दिवसीय लोकमंथन-2022 के चौथे एवं अंतिम...

संकट पर विजय के लिए करुणा, सेवा व सकारात्मकता को बनाएं हथियार

हम जीतेंगे- Positivity Unlimited श्रृंखला के दूसरे दिन श्री श्री रविशंकर, अज़ीम प्रेमजी, निवेदिता भिड़े ने संबोधित किया नई दिल्ली, 12 मई. आध्यात्मिक गुरू श्री...

राष्ट्रभक्ति का जयघोष – पूर्वोत्तर में भारतीय संस्कृति का जागरण

सुधीर जोगळेकर ‘विजयादशमी’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्थापना दिवस है. ९५ वर्ष पहले इसी दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना नागपुर में हुई थी और...

आत्मनिर्भर भारत – यह सिर्फ एक आर्थिक विचार नहीं, बल्कि हर व्यक्ति में आत्मविश्वास जगाने का कार्यक्रम

देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं पूर्वोत्तर भारत के लोग - अजित डोभाल मुंबई (विसंकें). राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने कहा...

विश्व बंधुत्व दिवस – 11 सितम्बर

निवेदिता भिड़े यह वर्ष अति-विशेष है क्योंकि 50 वर्ष पहले 02 सितम्बर, 1970 को विवेकानन्द शिला स्मारक का उद्घाटन हुआ था, वह दिवस जब स्वामी...

विवेकानन्द शिला स्मारक  – एक अद्भुत राष्ट्रीय स्मारक

अलकागौरी आज से 50 वर्ष पूर्व इसी महीने में एक अद्भुत स्मारक का राष्ट्रार्पण हो रहा था. एक ऐसा स्मारक जो आधुनिक भारत के इतिहास...

‘आत्मनिर्भर भारत और नॉर्थ इस्ट’ विषय पर 12 सितंबर को वेबिनार

विवेकानंद केंद्र द्वारा आयोजित वेबिनार में एन.एस.ए. अजित डोभाल, अर्थशास्त्री एस. गुरुमूर्ती होंगे शामिल मुंबई (विसंकें). विवेकानंद शिला स्मारक एवं विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी द्वारा ‘आत्मनिर्भर...

स्वर्ण जयंती वर्ष – भारत के आत्मविश्वास, आत्मगौरव और प्रेरणा का प्रतीक विवेकानंद शिला स्मारक

  सूर्यप्रकाश सेमवाल “भारत में किसी तरह के सुधार या उन्नति की चेष्टा करने से पहले धर्म का विस्तार आवश्यक है. सर्वप्रथम हमारे उपनिषदों, पुराणों...