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    वे पन्द्रह दिन… / 08 अगस्त, 1947

    शुक्रवार आठ अगस्त.... इस बार सावन का महीना ‘पुरषोत्तम (मल) मास’है. इसकी आज छठी तिथि है, षष्ठी. गांधीजी की ट्रेन पटना के पास पहुंच रही है. सुबह के पौने छः बजने वाले हैं. सूर्योदय बस अभी हुआ ही है. गांधी जी खिड़की के पास बैठे हैं. उस खिड़की से हलके बादलों से आच्छादित आसमान में पसरी हुई गुलाबी छटा बेहद रमणीय दिखाई दे रही है. ट्रेन की खिड़की से प्रसन्न करने वाली ठण्डी हवा आ रही है. हालांकि उस हवा के साथ ही इंजन से ...

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    28 मई / जन्मदिवस – अप्रतिम क्रांतिकारी, कवि, इतिहासकार वीर विनायक दामोदर सावरकर

    नई दिल्ली. अप्रतिम क्रांतिकारी, समर्पित समाज सुधारक, महान कवि और महान इतिहासकार वीर सावरकर. सावरकर भारत के पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के केन्द्र लंदन में उसके विरूद्ध क्रांतिकारी आंदोलन संगठित किया था. वे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने वर्ष 1905 के बंग-भंग के बाद 1906 में ‘स्वदेशी’ का नारा देकर, विदेशी कपड़ों की होली जलाई थी और उन्हें अपने विचारों के कारण बैरिस्टर की डिग्री खोनी पड़ी. सावरकर भ ...

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    24 अप्रैल / पुण्यतिथि – गौरक्षा के लिये 166 दिन अनशन करने वाले महात्मा रामचंद्र वीर

    नई दिल्ली. वर्ष 1966 में दिल्ली में गौरक्षार्थ 166 दिन का अनशन करने वाले महात्मा रामचंद्र वीर का जन्म आश्विन शुक्ल प्रतिपदा, विक्रमी संवत 1966 (1909 ई) में महाभारतकालीन विराट नगर (राजस्थान) में हुआ था. इनके पूर्वज स्वामी गोपालदास बाणगंगा के तट पर स्थित ग्राम मैड़ के निवासी थे. उन्होंने औरंगजेब द्वारा दिल्ली में हिन्दुओं पर थोपे गये शमशान कर के विरोध में उसके दरबार में ही आत्मघात किया था. उनके पास समर्थ स्वा ...

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    19 अप्रैल / बलिदान दिवस – युवा बलिदानी अनन्त कान्हेरे

    नई दिल्ली. भारत मां की कोख कभी सपूतों से खाली नहीं रही. ऐसे ही एक सपूत थे - अनन्त लक्ष्मण कान्हेरे. जिन्होंने देश की स्वतन्त्रता के लिए केवल 19 साल की युवावस्था में ही फाँसी के फन्दे को चूम लिया. उन दिनों महाराष्ट्र के नासिक नगर में जैक्सन नामक अंग्रेज जिलाधीश कार्यरत था. उसने मराठी और संस्कृत सीखकर अनेक लोगों को प्रभावित कर लिया था; पर उसके मन में भारत के प्रति घृणा भरी थी. वह नासिक के पवित्र रामकुंड में घ ...

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    ‘भारतवर्ष की सर्वांग स्वतंत्रता’ के सेनानी डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार

    चिरसनातन अखण्ड भारत की सर्वांग स्वतंत्रता के लिए कटिबद्ध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार स्वतंत्रता संग्राम के एक ऐसे अज्ञात सेनापति थे, जिन्होंने अपने व अपने संगठन से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में अपना तन-मन सब कुछ भारत माता के चरणों में अर्पित कर दिया था. बाल्यकाल से लेकर जीवन की अंतिम श्वास तक भारत की स्वतंत्रता के लिए जूझते रहने वाले इस महान स्वतंत्रता सेनानी ने न तो अपनी आत्मकथा लिखी और न ही ...

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    26 फरवरी / पुण्यतिथि – एक जन्म में अनेक जन्मों का कारावास पाने वाले अप्रतिम क्रांतिकारी

    एक जन्म में अनेक जन्मों का कारावास पाने वाले अप्रतिम क्रांतिकारी, समर्पित समाज सुधारक, ओजस्वी वक्ता, कवि व अखंड भारत के स्वप्न दृष्टा विनायक दामोदर सावरकर जी की पुण्यतिथि पर देश शत्-शत् नमन करता है. सावरकर वे पहले कवि थे, जिन्होंने कलम-काग़ज़ के बिना जेल की दीवारों पर पत्थर के टुकड़ों से कवितायें लिखीं. कहा जाता है - उन्होंने अपनी रची दस हज़ार से भी अधिक पंक्तियों को प्राचीन वैदिक साधना के अनुरूप वर्षों स्म ...

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    धर्म संसद में पारित प्रस्ताव – हिन्दू समाज के विघटन के षड्यंत्र

    धर्मसंसद दिनांक 31 जनवरी, 2019 सेक्टर-14, ओल्ड जी. टी. रोड, कुम्भ मेला क्षेत्र, प्रयागराज प्रस्ताव (2) - हिन्दू समाज के विघटन के षड्यंत्र हिन्दू समाज की एकता को तोड़ने के लिए इस्लामिक, चर्च तथा साम्यवादी संगठन हमेशा से कुचक्र रचते रहे हैं. अब कुछ राजनैतिक दल व अन्य संगठन भी अपने निहित स्वार्थों के कारण लोक लुभावने नारे देकर व हिंसा का सहारा लेकर इन षड्यंत्रों को तेजी से बढ़ा रहे हैं.  इनकी कार्य पद्धति देखकर ...

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    21 मई / जन्मदिवस – प्रेरणा स्तम्भ राजाभाऊ सावरगांवकर

    नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और झारखंड प्रान्त के कार्यकर्ताओं के प्रेरणा स्तम्भ राजाभाऊ का जन्म ग्राम डेहणी (यवतमाल, महाराष्ट्र) में पाण्डुरंग सावरगाँवकर जी के घर में 21 मई, 1920 को हुआ था. उनके जन्म वाले दिन नृसिंह चतुर्दशी थी. इसलिये उनका नाम नरहरि रखा गया. इस प्रकार उनका पूरा नाम हुआ नरहरि पांडुरंग सावरगाँवकर, पर महाराष्ट्र में प्रायः कुछ घरेलू नाम भी प्रचलित हो जाते हैं. वे अपने ...

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    28 नवम्बर/जन्म-दिवस; क्रान्तिकारी भाई हिरदाराम

    भारत का चप्पा-चप्पा उन वीरों के स्मरण से अनुप्राणित है, जिन्होंने स्वतन्त्रता प्राप्ति के लिये अपना तन, मन और धन समर्पित कर दिया. उनमें से ही एक भाई हिरदाराम का जन्म 28 नवम्बर, 1885 को मण्डी (हिमाचल प्रदेश) में श्री गज्जन सिंह स्वर्णकार के घर में हुआ था. उन दिनों कक्षा आठ से आगे शिक्षा की व्यवस्था मण्डी में नहीं थी. इनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि इन्हें पढ़ाई के लिये बाहर भेजा जा सके. अतः पढ़ने ...

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