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    वे पन्द्रह दिन… / 07 अगस्त, 1947

    गुरुवार, 07 अगस्त. देश भर के अनेक समाचार पत्रों में कल गांधी जी द्वारा भारत के राष्ट्रध्वज के बारे में लाहौर में दिए गए वक्तव्य को अच्छी खासी प्रसिद्धि मिली है. मुम्बई के ‘टाईम्स’ में इस बारे में विशेष समाचार है, जबकि दिल्ली के ‘हिन्दुस्तान’ में भी इसे पहले पृष्ठ पर प्रकाशित किया गया है. कलकत्ता के ‘स्टेट्समैन’ अखबार में भी यह खबर है, साथ ही मद्रास के ‘द हिन्दू’ ने भी इसs प्रकाशित किया है. “भारत के राष्ट्रध ...

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    वे पंद्रह दिन… / 05 अगस्त, 1947

    आज अगस्त महीने की पांच तारीख... आकाश में बादल छाये हुये थे, लेकिन फिर भी थोड़ी ठण्ड महसूस हो रही थी. जम्मू से लाहौर जाते समय रावलपिन्डी का रास्ता अच्छा था, इसीलिए गांधी जी का काफिला पिण्डी मार्ग से लाहौर की तरफ जा रहा था. रास्ते में ‘वाह’ नामक एक शरणार्थी शिविर लगता था. गांधी जी के मन में इच्छा थी कि इस शिविर में जाकर देखा जाए. लेकिन उनके साथ जो कार्यकर्ता थे, वे चाहते थे कि गांधी जी वहां न जा सकें. क्योंकि ...

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    27 जुलाई / जन्मदिवस – सरसंघचालकों के पत्रलेखक बाबूराव चौथाइवाले

    नई दिल्ली. श्री कृष्णराव एवं श्रीमती इंदिरा के सबसे बड़े पुत्र मुरलीधर कृष्णराव (बाबूराव) चौथाइवाले का जन्म 27 जुलाई,  1922 को बारसी (जिला सोलापुर, महाराष्ट्र) में हुआ था. यह परिवार मूलतः यहीं का निवासी था, पर बाबूराव के पिता पहले कलमेश्वर और फिर नागपुर में अध्यापक रहे. बाबूराव के छह में से तीन भाई (शरदराव, शशिकांत तथा अरविन्द चौथाइवाले) प्रचारक बने. जिन दिनों वे कक्षा नवमी में पढ़ते थे, तब कलमेश्वर में डॉ. ...

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    09 जुलाई / जन्मदिवस – दुर्लभ चित्रों के संग्रहक : सत्यनारायण गोयल

    नई दिल्ली. प्रसिद्ध फोटो चित्रकार सत्यनारायण गोयल जी का जन्म नौ जुलाई, 1930 को आगरा में हुआ था. वर्ष 1943 में वे संघ के स्वयंसेवक बने. वर्ष 1948 के प्रतिबन्ध के समय वे कक्षा 12 में पढ़ रहे थे. जेल जाने से उनकी पढ़ाई छूट गयी. अतः उन्होंने फोटो मढ़ने का कार्य प्रारम्भ कर दिया. कला में रुचि होने के कारण उन्होंने वर्ष 1956 में ‘कलाकुंज’ की स्थापना की. वे पुस्तक, पत्र-पत्रिकाओं आदि के मुखपृष्ठों के डिजाइन बनाते ...

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    14 मई / पुण्यतिथि – उत्कृष्ट लेखक भैया जी सहस्रबुद्धे

    नई दिल्ली. प्रभावी वक्ता, उत्कृष्ट लेखक, कुशल संगठक, व्यवहार में विनम्रता व मिठास के धनी प्रभाकर गजानन सहस्रबुद्धे का जन्म खण्डवा (मध्य प्रदेश) में 18 सितम्बर, 1917 को हुआ था. उनके पिताजी वहां अधिवक्ता थे. वैसे यह परिवार मूलतः ग्राम टिटवी (जलगाँव, मध्य प्रदेश) का निवासी था. भैया जी जब नौ वर्ष के ही थे, तब उनकी माताजी का देहान्त हो गया. इस कारण तीनों भाई-बहिनों का पालन बदल-बदलकर किसी सम्बन्धी के यहां होता रह ...

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    13 मई / जन्मदिवस – ‘दिल्लीश्वर’ वसंतराव ओक

    नई दिल्ली. संघ के प्रारम्भिक प्रचारकों में एक श्री वसंतराव कृष्णराव ओक का जन्म 13 मई, 1914 को नाचणगांव (वर्धा, महाराष्ट्र) में हुआ था. जब वे पढ़ने के लिये अपने बड़े भाई मनोहरराव के साथ नागपुर आए, तो बाबासाहब आप्टे द्वारा संचालित टाइपिंग केन्द्र के माध्यम से दोनों का सम्पर्क संघ से हुआ. डॉ. हेडगेवार के सुझाव पर वसंतराव 1936 में कक्षा 12 उत्तीर्ण कर शाखा खोलने के लिए दिल्ली आ गए. उनके रहने की व्यवस्था 'हिन्दू ...

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    करियप्पा पर झूठ और इतिहास में दबा सच

    भारत के तथाकथित सेकुलर पुरोगामी कहलाने वालों को अगर भारत की सेना की छवि को मलिन करने वाली कुछ भी चीज मिलती है तो वे बड़े उत्साह में आ जाते हैं. और अगर एक ही समाचार में सेना, संघ को बदनाम करने का मौका मिले, और वो भी उत्तर भारत और दक्षिण भारत के काल्पनिक विभेद को दिखाते हुए, तो सोने पे सुहागा! पिछले कुछ दिनों से मीडिया में चल रही खबर ‘जनरल करिअप्पा की हत्या करने का षड्यंत्र’ कुछ इसी प्रकार की है. बस बात इतनी ह ...

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    संघ और व्यक्ति पूजा

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समझना आसान नहीं है. इसका मुख्य कारण यह है कि संघ वर्तमान में प्रचलित किसी राजनीतिक पार्टी या सामाजिक संस्था या संगठन के ढांचे में नहीं बैठता. कुछ लोगों को लगता हैं कि संघ में तानाशाही पद्धति से काम चलता हैं तो कुछ अन्य लोग यह दावा करते हैं कि संघ में नेतृत्व की पूजा होती हैं. ये दोनों भी सत्य से बिल्कुल परे हैं. व्यक्ति पूजा नहीं संघ के संस्थापक ने ऐसी एक कार्यशैली का आविष्कार किय ...

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    बैरिस्टर नरेन्द्रजीत सिंह

    18 मई/जन्म-दिवस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में संघचालक की भूमिका परिवार के मुखिया की होती है. बैरिस्टर नरेन्द्रजीत सिंह ने उत्तर प्रदेश में इस भूमिका को जीवन भर निभाया. उनका जन्म 18 मई, 1911 को कानपुर के प्रख्यात समाजसेवी रायबहादुर श्री विक्रमाजीत सिंह के घर में हुआ था. शिक्षाप्रेमी होने के कारण इस परिवार की ओर से कानुपर में कई शिक्षा संस्थायें स्थापित की गयीं. बैरिस्टर साहब के पूर्वज पंजाब के मूल निवासी थे. व ...

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