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    30 अगस्त / पुण्यतिथि – तरुण तपस्वी, रामानुज दयाल

    नई दिल्ली. उ.प्र. में गाजियाबाद के पास पिलखुआ नगर वस्त्र-निर्माण के लिए प्रसिद्ध है. यहीं के एक प्रतिष्ठित व्यापारी व निष्ठावान स्वयंसेवक श्री रामगोपाल तथा कौशल्या देवी के घर में 1943 में जन्मे रामानुज दयाल ने अपना जीवन संघ को अर्पित किया; पर काल ने अल्पायु में ही उन्हें उठा लिया. सन् 1948 में संघ पर प्रतिबंध लगा, तो पिलखुआ के पहले सत्याग्रही दल का नेतृत्व रामगोपाल जी ने किया. रामानुज पर इसका इतना प्रभाव पड ...

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    छत्तीसगढ़ – नक्सलियों ने आरएसएस स्वयंसेवक की हत्या की

    छत्तीसगढ़ के कांकेर में ज़िले में नक्सलियों ने मंगलवार (अगस्त 27, 2019) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक स्वयंसेवक की हत्या कर दी. 40 वर्षीय स्वयंसेवक दादू सिंह कोरटिया को नक्सलियों ने पहले तो आवाज़ देकर घर से बाहर निकाला और फिर गोली मार कर हत्या कर दी. दुर्गुकोंदल स्थित कोंडेगांव में हुई इस घटना की पुलिस ने भी पुष्टि की है. रात 10.30 के क़रीब 25 के लगभग नक्सलियों ने उनके घर के बाहर जमा होकर उन्हें आवाज़ लगाई. द ...

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    देश की सीमाएं माँ के आंचल की तरह पवित्र – डॉ. कृष्णगोपाल जी

    नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी ने कहा कि सेना के साथ देशवासियों को भी देश की रक्षा में सहभागी होना चाहिए. जागरूक देश वह है जो अपनी सीमाओं के प्रति जागरूक रहता है. सीमाओं का जानकार और उसको पवित्र मानने वाला ही देश का जागरूक नागरिक है. देश की सीमाएं माँ के आंचल की तरह पवित्र होती हैं, जिसे अपना देश कालांतर में भूल गया. चन्द्रगुप्त मौर्य सैल्यूकस के भारत पर आक्रमण के समय ...

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    28 अगस्त / जन्मदिवस – प्रथम प्रचारक बाबासाहब आप्टे

    नई दिल्ली. 28 अगस्त, 1903 को यवतमाल, महाराष्ट्र के एक निर्धन परिवार में जन्मे प्रचारकों की श्रृंखला में प्रथम प्रचारक उमाकान्त केशव आप्टे जी का प्रारम्भिक जीवन बड़ी कठिनाइयों में बीता. 16 वर्ष की छोटी अवस्था में पिता का देहान्त होने के कारण परिवार की सारी जिम्मेदारी इन पर ही आ गयी. इन्हें पुस्तक पढ़ने का बहुत शौक था. आठ वर्ष की अवस्था में इनके मामा ‘ईसप की कथाएं’ नामक पुस्तक लेकर आये. उमाकान्त देर रात तक उस ...

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    अंग्रेजों ने समाज को बांटने के लिये साजिश के तहत ‘दलित’ शब्द गढ़ा – डॉ. कृष्णगोपाल जी

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा सिंध के अंतिम हिन्दू राजा दाहिर की पत्नियां जब जौहर करने जा रही थीं, तब उन्होंने 'म्लेच्छ' शब्द का प्रयोग किया था. रानियों का मानना था कि अगर उन्होंने जल्द से जल्द जौहर कर अपने प्राण नहीं त्यागे तो 'म्लेच्छ' लोग (इस्लामिक आक्रांता) आकर उन्हें छू लेंगे. भारत में छुआछूत की समस्या को लेकर अक्सर बहस होती रहती है और यह आज़ादी के काफ़ी पहले से चली आ ...

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    कानपुर में विहिप स्थापना दिवस मनाया

    विश्व हिन्दू परिषद् कानपुर महानगर द्वारा विहिप का स्थापना दिवस समारोह बी.एन.एस.डी शिक्षा निकेतन इण्टर कालेज बेनाझाबर कानपुर में आयोजित किया गया. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विश्व हिन्दू परिषद् पूर्वी उत्तर प्रदेश के संगठन मन्त्री अम्बरीष जी ने कहा कि अखिल विश्व में रहने वाले सभी हिन्दुओं के मन में हिन्दुत्व का भाव जागृत करने ओर उनको संगठित करने हेतु विश्व हिन्दू परिषद् कार्य कर रही है. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के ...

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    25 अगस्त / जन्मदिवस – शिक्षानुरागी सुशीला देवी

    नई दिल्ली. सुशीला देवी का जन्म 25 अगस्त, 1914 को जम्मू-कश्मीर राज्य के दीवान बद्रीनाथ जी, विद्यावती जी के घर में ज्येष्ठ पुत्री के रूप में हुआ था. उन्हें अपने पिताजी से प्रशासनिक क्षमता तथा माताजी से धर्मप्रेम विरासत में मिला था. जब वे कानपुर के प्रख्यात समाजसेवी रायबहादुर विक्रमाजीत सिंह की पुत्रवधू बन कर आयीं, तो ससुराल पक्ष से उन्हें शिक्षा संस्थाओं के प्रति प्रेम भी प्राप्त हुआ. इन गुणों को विकसित करते ...

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    विवेकानंद शिला स्मारक के शिल्पी – एकनाथ रानाडे

    एकनाथ रानाडे का जन्म 19 नवम्बर, 1914 को ग्राम टिलटिला (जिला अमरावती, महाराष्ट्र) में हुआ था. पढ़ने के लिए वे अपने बड़े भाई के पास नागपुर आ गए. वहीं उनका सम्पर्क डॉ. हेडगेवार से हुआ. बचपन से ही प्रतिभावान एवं शरारती थे. कई बार शरारतों के कारण उन्हें शाखा से निकाला गया; पर वे फिर जिदपूर्वक शाखा में शामिल हो जाते थे. इस स्वभाव के कारण वे जिस काम में हाथ डालते, उसे पूरा करके ही दम लेते थे. मैट्रिक की परीक्षा उत ...

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    22 अगस्त / जन्मदिवस – संकल्प के धनी डॉ. जगमोहन गर्ग

    नई दिल्ली. भारत की उन्नति स्वदेशी उद्योगों के बल पर ही हो सकती है. इसलिए हमें विदेशों का मुंह देखने की बजाय स्वयं ही आगे आना होगा. संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरुजी ने जब ये शब्द युवा वैज्ञानिक जगमोहन को कहे, तो उन्होंने तत्काल अमरीका की चमकदार नौकरी और वैभव को लात मारकर मातृभूमि की सेवा के लिए देश लौटने का निश्चय कर लिया. डॉ. जगमोहन गर्ग का जन्म गाजियाबाद में 22 अगस्त, 1933 को हुआ था. एक मध्यमवर्गीय परि ...

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    सपनों का एक गांव – रविंद्रनगर (मियांपुर)

    यह कहानी है प्रकृति की प्रतिकूलताओं के विरूद्ध मानव के संघर्ष की. वर्ष 1947 में विभाजन की पीड़ा सहकर अपना सबकुछ खोकर शरणार्थी बनकर आए बंगाली परिवारों के पुरूषार्थ की, जिन्होंने अपने परिश्रम से बालू की टीलों को लहलहाते खेतों में तब्दील कर दिया. गुरूदेव रविंद्रनाथ ठाकुर की जयंती के दिन बसे इस सुविधा संपन्न गांव रविंद्रनगर को देखकर एक आदर्श गांव (आईडियल विलेज) की कल्पना साकार होती नजर आती है. उत्तरप्रदेश के लख ...

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