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    20 नवम्बर / जन्मदिवस – वैकल्पिक सरसंघचालक डॉ. लक्ष्मण वासुदेव परांजपे

    नई दिल्ली. स्वाधीनता संग्राम के दौरान संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी ने 1930-31 में जंगल सत्याग्रह में भाग लिया था. उन दिनों संघ अपनी शिशु अवस्था में था. शाखाओं की संख्या बहुत कम थी. डॉ. जी नहीं चाहते थे कि उनके जेल जाने से संघ कार्य में कोई बाधा आये. अतः वे अपने मित्र तथा कर्मठ कार्यकर्ता डॉ. परांजपे को सरसंघचालक की जिम्मेदारी दे कर गये. डॉ. परांजपे ने इस दायित्व को पूर्ण निष्ठा से निभाया. उन्होंने इस दौर ...

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    सेवा करने में धन्यता का अनुभव करना, यह हिन्दू दर्शन है – डॉ. कृष्णगोपाल जी

    संत ईश्वर फाउंडेशन ने संस्थाओं व व्यक्तियों को संत ईश्वर सम्मान-2019 के सम्मानित किया नई दिल्ली. संत ईश्वर फाउंडेशन ने राष्ट्रीय सेवा भारती के सहयोग से “संत ईश्वर सम्मान 2019” का आयोजन रविवार को एन.डी.एम.सी. कन्वेंशन सेंटर, संसद मार्ग, नई दिल्ली में किया. संत ईश्वर सम्मान में विभिन्न क्षेत्रों में सेवारत संस्थाओं व महानुभावों को सम्मानित किया गया. चार व्यक्तियों व स्वयंसेवी संस्थाओं को संत ईश्वर विशिष्ट सेव ...

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    श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के उन्नायक श्री अशोक सिंहल जी की पुण्यतिथि पर नमन

    बीसवीं इक्कीसवीं सदी का संधि काल हिन्दू समाज के नवजागरण के काल खण्ड के रूप में इतिहास के पन्नों में अंकित होगा. यह वह कालखंड है, जब शताब्दियों से पराधीनता की बेड़ियों में जकड़े जाने से उत्पन्न आत्मविस्मृति एवं आत्महीनता की भावना को तोड़कर हिन्दू समाज ने विश्वपटल पर हूंकार भरी थी. सोए हुए हिन्दू पौरुष को जगाने का आधार बना श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और इस आंदोलन के स्मरण के साथ ही इसके नायकों में जो नाम प्रमुखता ...

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    16 नवम्बर / जन्म दिवस – ब्रह्मदेश में संघ के प्रचारक रामप्रकाश धीर जी

    नई दिल्ली. ब्रह्मदेश (बर्मा या म्यांमार) भारत का ही प्राचीन भाग है. अंग्रेजों ने जब 1905 में बंग-भंग किया, तो षड्यंत्रपूर्वक इसे भी भारत से अलग कर दिया था. इसी ब्रह्मदेश के मोनीवा नगर में 16 नवम्बर, 1926 को रामप्रकाश धीर जी का जन्म हुआ था. बर्मी भाषा में उनका नाम ‘सयाजी यू सेन टिन’ कहा जाएगा. उनके पिता नंदलाल जी वहां के प्रसिद्ध व्यापारी एवं ठेकेदार थे. सन् 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के समय जब अंतरराष्ट्र ...

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    शबरीमला – सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हैं

    परंपराओं और रीति-रिवाजों से जुड़े मामले आस्था और विश्वास के मुद्दे हैं. शबरीमला मंदिर में एक विशेष आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध से लिंग असमानता या भेदभाव का कोई संबंध नहीं है, तथा यह प्रतिबंध केवल देवता की विशिष्टता के कारण है. हमारा दृढ़ मत है कि इस मामले में न्यायिक समीक्षा हमारे संविधान द्वारा प्रदत्त पूजा की स्वतंत्रता की भावना का उल्लंघन होगी. और संबंधित पक्ष की राय को ऐसे मामलों में सर्वो ...

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    श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी सर्वसमावेशी विचारक थे

    दिल्ली में श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जन्मशताब्दी समारोह का उद्घाटन नई दिल्ली. भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के जन्मशताब्दी समारोह का दिल्ली में उद्घाटन करते हुए उपराष्ट्रपति एम. वैंकैया नायडू जी ने कहा कि देश के लिए संपदा निर्माण करने वाले किसानों और मजदूरों के यदि स्वास्थ्य की हम अधिक चिंता करें तो वे और भी अधिक संपदा का निर्माण करेंगे. ठेंगड़ी जी ने देश के श्रमिक आंदोलन को एक स ...

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    भारतीय संस्कृति, समाज व अर्थव्यवस्था की पहचान मुझे दत्तोपंत जी के माध्यम से हुई – एस. गुरुमूर्ति

    मुंबई (विसंकें). रिजर्व बैंक के निदेशक एवं अर्थशास्त्री एस, गुरुमूर्ति जी ने कहा कि ‘भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी जी समय से आगे की सोच रखने वाले दृष्टा थे.’ ‘वामपंथी आर्थिक सोच से पुरस्कृत हुआ पूंजीवाद अधिक समय तक नहीं रह सकता. यह, दत्तोपंत जी ने 1992 से पूर्व ही कहा था. दोनों के पास संपत्ति का केंद्रीकरण होना, यह इसका मुख्य कारण है. 1990 से पूर्व ही उन्होंने कहा था कि विश्व के प्रत्येक देश ...

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    किसी के अधिकार मत छीनो, लेकिन अपने धर्म व अधिकारों की रक्षा जरूर करो – मिलिंद परांडे जी

    गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में संगोष्ठी का आयोजन जयपुर. विश्व हिन्दू परिषद द्वारा गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में आदर्श विद्या मंदिर राजापार्क में प्रबुद्धजन संगोष्ठी (06 नवंबर) का आयोजन किया गया. संगोष्ठी के मुख्य वक्ता विहिप के राष्ट्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे जी ने कहा कि गुरू नानक देव जी ने समाज को नई दिशा देकर संगठन का संदेश दिया था. देश में मुगलों के आक् ...

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    07 नवम्बर / जन्मदिवस – संघ समर्पित माधवराव मूले जी

    नई दिल्ली. 7 नवम्बर, 1912 (कार्तिक कृष्ण 13, धनतेरस) को ग्राम ओझरखोल (जिला रत्नागिरी, महाराष्ट्र) में जन्मे माधवराव कोण्डोपन्त मूले जी प्राथमिक शिक्षा पूरी कर आगे पढ़ने के लिए वर्ष 1923 में बड़ी बहन के पास नागपुर आ गये थे. यहां उनका सम्पर्क संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी से हुआ. मैट्रिक के बाद उन्होंने डिग्री कॉलेज में प्रवेश लिया, पर क्रान्तिकारियों से प्रभावित होकर पढ़ाई छोड़ दी. इसी बीच पिताजी का देहान् ...

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    30 अक्तूबर / जन्मदिवस – बहुमुखी कल्पनाओं के धनी मोरोपन्त पिंगले जी

    नई दिल्ली. संघ के वरिष्ठ प्रचारक मोरोपन्त पिंगले जी को देखकर सब खिल उठते थे. उनके कार्यक्रम हास्य-प्रसंगों से भरपूर होते थे. पर, इसके साथ ही वे एक गहन चिन्तक और कुशल योजनाकार भी थे. संघ नेतृत्व द्वारा सौंपे गए हर काम को उन्होंने नई कल्पनाओं के आधार पर सर्वश्रेष्ठ ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उनका पूरा नाम मोरेश्वर नीलकंठ पिंगले था. उनका जन्म 30 अक्तूबर, 1919 को हुआ था. वे बचपन में मेधावी होने के साथ ही बहुत चंचल ए ...

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