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    09 सितम्बर / जन्मदिवस- भारती पत्रिका के संस्थापक – दादा भाई

    नई दिल्ली. आज सब ओर अंग्रेजीकरण का वातावरण है. संस्कृत को मृत भाषा माना जाता है. ऐसे में गिरिराज शास्त्री जी (दादा भाई) ने संस्कृत की मासिक पत्रिका ‘भारती’ का कुशल संचालन कर लोगों को एक नयी राह दिखाई है. दादा भाई का जन्म नौ सितम्बर, 1919 (अनंत चतुर्दशी) को राजस्थान के भरतपुर जिले के कामां नगर में आचार्य आनंदीलाल जी और चंद्राबाई जी के घर में हुआ था. इनके पूर्वज राजवैद्य थे. कक्षा छह के बाद दादा भाई ने संस्कृ ...

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    पुष्कर में अ.भा. समन्वय बैठक प्रारंभ

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की त्रिदिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक पवित्र नगरी पुष्कर में आज 7 सितंबर प्रात: से प्रारंभ होकर 9 सितंबर सायं तक रहेगी. इस बैठक में सरसंघचालक मोहन जी भागवत, सरकार्यवाह भय्याजी जोशी, संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी एवं समाज जीवन में भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले 35 से अधिक संगठनों के अखिल भारतीय स्तर के लगभग 200 कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं. अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद् ...

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    कश्मीर की स्वतंत्रता और संस्कृति का रक्षक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

    नरेंद्र सहगल भारत की सर्वांग स्वतंत्रता, सुरक्षा एवं विकास के ध्येय के साथ आगे बढ़ रहे संघ के स्वयंसेवकों ने जम्मू-कश्मीर की रक्षा, भारत में विलय, अनुच्छेद 370 तथा 35/ए  का विरोध, भारतीय सेना की सहायता, कश्मीर से विस्थापित कर दिए गए लाखों हिंदुओं की सम्भाल, अमरनाथ भूमि आंदोलन, तिरंगे झण्डे के लिए बलिदान इत्यादि अनेकों मोर्चों पर स्वयंसेवकों ने मुख्य भूमिका निभाई है. वर्तमान में भारत सरकार द्वारा अनुच्छेद 37 ...

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    25 अगस्त / जन्मदिवस – शिक्षानुरागी सुशीला देवी

    नई दिल्ली. सुशीला देवी का जन्म 25 अगस्त, 1914 को जम्मू-कश्मीर राज्य के दीवान बद्रीनाथ जी, विद्यावती जी के घर में ज्येष्ठ पुत्री के रूप में हुआ था. उन्हें अपने पिताजी से प्रशासनिक क्षमता तथा माताजी से धर्मप्रेम विरासत में मिला था. जब वे कानपुर के प्रख्यात समाजसेवी रायबहादुर विक्रमाजीत सिंह की पुत्रवधू बन कर आयीं, तो ससुराल पक्ष से उन्हें शिक्षा संस्थाओं के प्रति प्रेम भी प्राप्त हुआ. इन गुणों को विकसित करते ...

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    लिबरल गैंग और कांग्रेस के झूठ की खुली पोल

    दिल्ली में “शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास” द्वारा आयोजित ज्ञानोत्सव-2076 के समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मुख्य वक्ता थे. समापन सत्र में उपस्थितजनों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का भी उत्तर दिया. ऐसे ही आरक्षण के विषय पर पूछे गए प्रश्न का उत्तेर देते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रश्न का हल भी सद्भावना में ही है. आरक्षण के पक्ष के लोग आरक्षण के विपक्ष के लोगों का विचार करके जब कुछ बोलेंगे-करेंगे, ...

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    आर्थिक स्वतंत्रता तथा समाज के स्वावलंबन के लिये लघु उद्योग स्थापित करने की आवश्यकता – डॉ. मोहन भागवत जी

    नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि देश की आर्थिक स्वतंत्रता तथा समाज के स्वावलंबन की प्राप्ति के लिये बड़ी संख्या में लघु उद्योग स्थापित करने की आवश्यकता है. सरसंघचालक जी लघु उद्योग भारती की स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि “1994 में लघु उद्योग भारती की स्थापना हुई थी. इसमें म ...

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    27 जुलाई / जन्मदिवस – सरसंघचालकों के पत्रलेखक बाबूराव चौथाइवाले

    नई दिल्ली. श्री कृष्णराव एवं श्रीमती इंदिरा के सबसे बड़े पुत्र मुरलीधर कृष्णराव (बाबूराव) चौथाइवाले का जन्म 27 जुलाई,  1922 को बारसी (जिला सोलापुर, महाराष्ट्र) में हुआ था. यह परिवार मूलतः यहीं का निवासी था, पर बाबूराव के पिता पहले कलमेश्वर और फिर नागपुर में अध्यापक रहे. बाबूराव के छह में से तीन भाई (शरदराव, शशिकांत तथा अरविन्द चौथाइवाले) प्रचारक बने. जिन दिनों वे कक्षा नवमी में पढ़ते थे, तब कलमेश्वर में डॉ. ...

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    संस्कृत को जाने बिना भारत को समझना मुश्किल है – डॉ. मोहन भागवत

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि संस्कृत को जाने बिना भारत को पूरी तरह से समझना मुश्किल है. नागपुर में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि देश में सभी मौजूदा भाषाएं, जिनमें आदिवासी भाषाएं भी शामिल हैं, कम से कम 30 प्रतिशत संस्कृत शब्दों से बनी हैं. सरसंघचालक ने कहा कि यहां तक कि डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने भी इस बात पर अफसोस जताया था कि उन्हें संस्कृत सीखने का अवस ...

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    संघ शिक्षा वर्ग – तृतीय वर्ष के समापन समारोह में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के उद्बोधन के अंश…

    चुनाव के बाद, इस वर्ग का प्रारंभ हुआ और समापन हो रहा है। संयोग की बात है, पांच वर्ष पूर्व 2014 में भी ऐसा ही हुआ था और उस समय जो तिथिमान बना वर्ष का, उसमें संयोग ऐसा हुआ कि हिन्दू साम्राज्य दिवस की तिथि शिविर समापन के पहले दिन थी, और इस बार भी हिन्दू साम्राज्य दिवस की तिथि वर्ग समापन से एक दिन पहले है। चुनाव में स्पर्द्धा होती ही है। प्रजातंत्र है, राजनीतिक दलों को चुनाव लड़ने ही पड़ते हैं। स्पर्द्धा होने क ...

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    08 जून / जन्मदिवस – तपस्वी प्रचारक : मधुसूदन देव जी

    नई दिल्ली. यूं तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की परम्परा में पले-बढ़े सभी प्रचारक परिश्रम, सादगी, प्रेमभाव और सरलता की प्रतिमूर्ति होते हैं, पर उनमें से कुछ के तपस्वी जीवन की छाप सामान्य कार्यकर्त्ता के मन-मस्तिष्क पर बहुत गहराई से अंकित हो जाती है. मधुसूदन गोपाल देव जी ऐसे ही एक प्रचारक थे. कार्यकर्ताओं में वे ‘देव जी’ के नाम से लोकप्रिय थे. देव जी का जन्म आठ जून, 1918 को धन्तोली, नागपुर में गोपाल देव जी एवं उ ...

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