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    कला देश सेवा का माध्यम है – डॉ. मोहन भागवत

    मुंबई (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि कला यह व्यक्तिगत नहीं होती, अपितु वह देश सेवा का एक माध्यम है. अपनी प्रगति के कारण कहीं देश की उन्नति का लक्ष्य धूमिल न हो जाए, इसके प्रति हमें सजग रहना चाहिये. उन्होंने कहा कि केवल गुणवान होना उपयोगी नहीं. बल्कि अपने गुणों के आधार पर, अपने कर्तृत्व से देश को और अच्छा कैसे बनाया जाए, इसके लिये हम सबको प्रयत्नशील रहना आवश्यक है. क ...

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    05 अप्रैल / जन्मदिवस – बाबू जगजीवनराम और सामाजिक समरसता

    नई दिल्ली. समाज के निर्धन और वंचित वर्ग के जिन लोगों ने उपेक्षा सहकर भी अपना मनोबल ऊंचा रखा, उनमें ग्राम चन्दवा (बिहार) में पांच अप्रैल, 1906 को जन्मे बाबू जगजीवनराम का नाम उल्लेखनीय है. उनके पिता शोभीराम थे. उनकी माता बसन्ती देवी ने आर्थिक अभावों के बीच अपने बच्चों को स्वाभिमान से जीना सिखाया. विद्यालय में हिन्दू, मुसलमान तथा दलित हिन्दुओं के लिए पानी के अलग घड़े रखे जाते थे. उन्होंने अपने मित्रों के साथ म ...

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    स्वयंसेवक के अनुशासित आचरण से अन्य समाज भी प्रेरणा लेता है – डॉ. मोहन भागवत

    इंदौर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी मध्य क्षेत्र के प्रवास पर हैं. 20 फरवरी को सरसंघचालक जी ने इंदौर महानगर की सभी शाखाओं से आए गटनायकों व प्रवासी कार्यकर्ताओं की बैठक में भाग लिया. कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गटनायक का कार्य हम सभी निभा रहे हैं, यह हमारे तंत्र का एक मुख्य कार्य है. गटनायक स्वयंसेवकों के एक समूह का नायक है. वह स्वयंसेवकों के समूह का स ...

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    संघ ने पुलवामा आतंकी हमले की निंदा की

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले की निंदा की. संघ ने आशा व्यक्त की कि केंद्र की सरकार हमले के प्रत्युत्तर में कड़ा कदम उठाएगी. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर हुए कायराना आतंकी हमले की हम घोर निंदा करते हैं. आतंकवाद पर कसते हुए शिकंजे की बौखलाहट और निराशा ही इस घटना से साफ दिखाई देती है. सरकार इस घटना के दोषियों पर शीघ्र कड़ी से कड ...

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    संघ समता युक्त-शोषण मुक्त समाज एवं अहंकार व स्वार्थ मुक्त व्यवस्था बनाने में लगा है – डॉ. मोहन भागवत

    देहरादून (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी जन्मजात देशभक्त थे. उनको लगा कि हमारे समाज का परिवर्तन या देश को स्वतन्त्रता सिर्फ सरकारों या नारों के माध्यम से नहीं मिलेगी तथा स्वतन्त्रता का लाभ तभी मिलेगा, जब हमारा समाज एकजुट होगा. इस उद्देश्य को लेकर उन्होंने सन् 1925 में संघ की स्थापना की और शाखा के माध्यम से व्यक्ति निर्माण व समाज सेवा क ...

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    रज्जू भैया की स्मृति में होगा व्याख्यान माला का आयोजन

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) एक वैज्ञानिक थे. संघ का प्रचारक बनने के बाद भी 1966 तक वे इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय में परमाणु भौतिकी पढ़ाते रहे और विभागाध्यक्ष रहे. वर्ष 2003 में 81 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ था. पाथेय-कण ने उनकी स्मृति में एक व्याख्यान-माला प्रारम्भ करने का निर्णय लिया है. प्रत्येक वर्ष उनके जन्मदिन के आसपास किसी सामयिक एवं महत्वपूर्ण विषय पर ...

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    31 जनवरी / जन्मदिवस – वनबन्धु मदनलाल अग्रवाल

    अपना काम करते हुए समाज सेवा बहुत लोग करते हैं, पर 31 जनवरी, 1923 को झरिया (जिला धनबाद, झारखंड) में जन्मे मदनलाल अग्रवाल सामाजिक कार्य को व्यापार एवं परिवार से भी अधिक महत्व देते थे. उन्होंने अनेक संस्थाएं बनाकर अपने रिश्तेदारों व परिचितों को भी इस हेतु प्रेरित किया. यह परिवार जिला झुंझुनु (राजस्थान) के लोयल ग्राम का मूल निवासी था. इनके दादा हरदेव दास 1876 में झरिया आए थे. प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1913-14 मे ...

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    हमारा राष्ट्रध्वज स्फूर्ति एवं प्रेरणा का प्रतीक है – डॉ. मोहन भागवत

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने आज नारायना ग्रुप आफ इन्स्टीट्यूशन्स, पनकी कानपुर में ‘गणतन्त्र दिवस’ के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय ध्वज फहराया. कार्यक्रम में उपस्थित विद्यालय के आचार्य एवं छात्रों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा राष्ट्रध्वज स्फूर्ति एवं प्रेरणा का प्रतीक है. इसके मध्य का चक्र धर्म चक्र है, धर्म मात्र पूजा पद्धति नहीं है पूजा धर्म का एक भाग हो सकता है. धर्म स ...

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    11 दिसम्बर / जन्मदिवस – कर्मठ कार्यकर्ता बालासाहब देवरस जी

    नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यपद्धति के निर्माण एवं विकास में जिनकी प्रमुख भूमिका रही है, उन मधुकर दत्तात्रेय देवरस जी का जन्म 11 दिसम्बर, 1915 को नागपुर में हुआ था. पश्चात बालासाहब के नाम से अधिक परिचित रहे. वे ही आगे चलकर संघ के तृतीय सरसंघचालक बने. बालासाहब ने वर्ष 1927 में संघ की शाखा में जाना शुरू किया था. धीरे-धीरे उनका सम्पर्क डॉ. हेडगेवार जी से बढ़ता गया. उन्हें मोहिते के बाड़े में लगने ...

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    तात्कालिक हित नहीं, शाश्वत हित में है राष्ट्रहित – डॉ. मोहन भागवत जी

    नई दिल्ली. भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी जी की स्मृति में स्वदेशी जागरण मंच द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया. व्याख्यानमाला में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगड़ी जी का व्यापक व्यक्तित्व होते हुए भी हर छोटा बड़ा कार्यकर्ता उनसे निःसंकोच अपनी बात कह पाता था. हमको यह देखना पड़ेगा कि विचारों के ...

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