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    विवेकानंद शिला स्मारक के शिल्पी – एकनाथ रानाडे

    एकनाथ रानाडे का जन्म 19 नवम्बर, 1914 को ग्राम टिलटिला (जिला अमरावती, महाराष्ट्र) में हुआ था. पढ़ने के लिए वे अपने बड़े भाई के पास नागपुर आ गए. वहीं उनका सम्पर्क डॉ. हेडगेवार से हुआ. बचपन से ही प्रतिभावान एवं शरारती थे. कई बार शरारतों के कारण उन्हें शाखा से निकाला गया; पर वे फिर जिदपूर्वक शाखा में शामिल हो जाते थे. इस स्वभाव के कारण वे जिस काम में हाथ डालते, उसे पूरा करके ही दम लेते थे. मैट्रिक की परीक्षा उत ...

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    22 अगस्त / जन्मदिवस – संकल्प के धनी डॉ. जगमोहन गर्ग

    नई दिल्ली. भारत की उन्नति स्वदेशी उद्योगों के बल पर ही हो सकती है. इसलिए हमें विदेशों का मुंह देखने की बजाय स्वयं ही आगे आना होगा. संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरुजी ने जब ये शब्द युवा वैज्ञानिक जगमोहन को कहे, तो उन्होंने तत्काल अमरीका की चमकदार नौकरी और वैभव को लात मारकर मातृभूमि की सेवा के लिए देश लौटने का निश्चय कर लिया. डॉ. जगमोहन गर्ग का जन्म गाजियाबाद में 22 अगस्त, 1933 को हुआ था. एक मध्यमवर्गीय परि ...

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    सपनों का एक गांव – रविंद्रनगर (मियांपुर)

    यह कहानी है प्रकृति की प्रतिकूलताओं के विरूद्ध मानव के संघर्ष की. वर्ष 1947 में विभाजन की पीड़ा सहकर अपना सबकुछ खोकर शरणार्थी बनकर आए बंगाली परिवारों के पुरूषार्थ की, जिन्होंने अपने परिश्रम से बालू की टीलों को लहलहाते खेतों में तब्दील कर दिया. गुरूदेव रविंद्रनाथ ठाकुर की जयंती के दिन बसे इस सुविधा संपन्न गांव रविंद्रनगर को देखकर एक आदर्श गांव (आईडियल विलेज) की कल्पना साकार होती नजर आती है. उत्तरप्रदेश के लख ...

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    आर्थिक स्वतंत्रता तथा समाज के स्वावलंबन के लिये लघु उद्योग स्थापित करने की आवश्यकता – डॉ. मोहन भागवत जी

    नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि देश की आर्थिक स्वतंत्रता तथा समाज के स्वावलंबन की प्राप्ति के लिये बड़ी संख्या में लघु उद्योग स्थापित करने की आवश्यकता है. सरसंघचालक जी लघु उद्योग भारती की स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि “1994 में लघु उद्योग भारती की स्थापना हुई थी. इसमें म ...

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    अज्ञात स्वतंत्रता सेनानी : डॉक्टर हेडगेवार – 16

    नरेंद्र सहगल सर्वांग स्वतंत्रता की ओर संघ के बढ़ते कदम 15 अगस्त 1947 को देश दो भागों में विभक्त हो गया. ‘इंडिया दैट इज़ भारत’ और ‘पाकिस्तान’. भारत को राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त होने बाद गांधी जी ने ‘कांग्रेस का काम पूरा हो गया, अब इसे समाप्त कर के एक सेवादल के रूप में परिवर्तित कर देना चाहिए’ का सुझाव कांग्रेस के नेताओं के समक्ष रखा था. परन्तु सत्ता के मोह में फंस चुके कांग्रेस के नेताओं ने गांधी जी की एक न ...

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    अज्ञात स्वतंत्रता सेनानी : डॉक्टर हेडगेवार – 12

    नरेंद्र सहगल 14 फरवरी 1930 को अपने दूसरे कारावास से मुक्त होकर डॉक्टर हेडगेवार ने पुनः सरसंघचालक का दायित्व सम्भाला और संघ कार्य को देशव्यापी स्वरूप देने के लिए दिन-रात जुट गए.अब डॉक्टर जी की शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक शक्तियां संघ-स्वयंसेवकों के शारीरिक, मानसिक तथा बौद्धिक विकास में लगने लगीं.स्वभाव से परिश्रमी, मन से दृढ़ निश्चयी और बुद्धि से चतुर इस महापुरुष ने अपने स्वास्थ्य की तनिक भी चिंता न करते हुए  ...

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    वे पन्द्रह दिन… / 07 अगस्त, 1947

    गुरुवार, 07 अगस्त. देश भर के अनेक समाचार पत्रों में कल गांधी जी द्वारा भारत के राष्ट्रध्वज के बारे में लाहौर में दिए गए वक्तव्य को अच्छी खासी प्रसिद्धि मिली है. मुम्बई के ‘टाईम्स’ में इस बारे में विशेष समाचार है, जबकि दिल्ली के ‘हिन्दुस्तान’ में भी इसे पहले पृष्ठ पर प्रकाशित किया गया है. कलकत्ता के ‘स्टेट्समैन’ अखबार में भी यह खबर है, साथ ही मद्रास के ‘द हिन्दू’ ने भी इसs प्रकाशित किया है. “भारत के राष्ट्रध ...

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    संघ के स्वयंसेवक राष्ट्र जीवन के हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे – बनवीर सिंह

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिमाचल प्रान्त द्वारा गोहर मण्डी में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष (विशेष) का आज समापन हो गया. समापन कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र प्रचारक बनवीर सिंह ने कहा कि इस्लाम व ईसाइयों की एक हजार साल की गुलामी भी हमारी सांस्कृतिक विरासत को नहीं मिटा सकी. हम जब अपने देश के इतिहास को पढ़ते हैं तो पता चलता है कि लगभग एक हजार वर्ष तक इस्लाम व ईसाइयों की गुलामी हमारे द ...

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    29 जुलाई / पुण्यतिथि – साहसी व दिलेर सूर्यप्रकाश जी

    नई दिल्ली. सूर्यप्रकाश जी मूलतः पंजाब के स्वयंसेवक थे. विभाजन के बाद उनके परिजन दिल्ली आ गये. वर्ष 1949 में वे राजस्थान में प्रचारक के रूप में आये. वर्ष 1949 से 1959 तक वे बीकानेर विभाग तथा फिर वर्ष 1971 तक कोटा विभाग में प्रचारक रहे. सब लोग उन्हें ‘सूरज जी भाई साहब’ कहते थे. जब वे कोटा में प्रचारक होकर आये, तो वहां केवल 25 शाखाएं थीं, पर उनके परिश्रम से कोटा देश में सर्वाधिक 300 शाखाओं वाला जिला हो गया. उन ...

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    28 जुलाई / इतिहास स्मृति – त्रिपुरा के बलिदानी स्वयंसेवक

    नई दिल्ली. विश्व भर में फैले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के करोड़ों स्वयंसेवकों के लिए 28 जुलाई, 2001 एक काला दिन सिद्ध हुआ. इस दिन भारत सरकार ने संघ के चार वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की मृत्यु की विधिवत घोषणा कर दी, जिनका अपहरण छह अगस्त, 1999 को त्रिपुरा राज्य में कंचनपुर स्थित ‘वनवासी कल्याण आश्रम’ के एक छात्रावास से चर्च प्रेरित आतंकियों ने किया था. इनमें सबसे वरिष्ठ थे, 68 वर्षीय श्यामलकांति सेनगुप्ता. उनका जन्म ग ...

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