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    16 नवम्बर / जन्म दिवस – ब्रह्मदेश में संघ के प्रचारक रामप्रकाश धीर जी

    नई दिल्ली. ब्रह्मदेश (बर्मा या म्यांमार) भारत का ही प्राचीन भाग है. अंग्रेजों ने जब 1905 में बंग-भंग किया, तो षड्यंत्रपूर्वक इसे भी भारत से अलग कर दिया था. इसी ब्रह्मदेश के मोनीवा नगर में 16 नवम्बर, 1926 को रामप्रकाश धीर जी का जन्म हुआ था. बर्मी भाषा में उनका नाम ‘सयाजी यू सेन टिन’ कहा जाएगा. उनके पिता नंदलाल जी वहां के प्रसिद्ध व्यापारी एवं ठेकेदार थे. सन् 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के समय जब अंतरराष्ट्र ...

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    ‘दिव्यांग’ राहुल देशमुख कर रहे ‘दिव्य कार्य’ – भय्याजी जोशी

    मुंबई (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने कहा कि ‘काम करते समय बीच में ही रुकने वाले बहुत दिखाई देते हैं, परंतु हार के पश्चात भी अपना कार्य निरंतर आगे ले जाने वाले राहुल देशमुख दृष्टीहीन होने के पश्चात भी समाज के लिए दिव्य कार्य कर रहे हैं. सरकार्यवाह ने राहुल देशमुख के कार्य की प्रशंसा की. वे दृष्टीहीन हैं, लेकिन उनका कार्य दिव्य है. केशवसृष्टी संस्था द्वारा समाज में उल्लेखनीय ...

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    07 नवम्बर / जन्मदिवस – संघ समर्पित माधवराव मूले जी

    नई दिल्ली. 7 नवम्बर, 1912 (कार्तिक कृष्ण 13, धनतेरस) को ग्राम ओझरखोल (जिला रत्नागिरी, महाराष्ट्र) में जन्मे माधवराव कोण्डोपन्त मूले जी प्राथमिक शिक्षा पूरी कर आगे पढ़ने के लिए वर्ष 1923 में बड़ी बहन के पास नागपुर आ गये थे. यहां उनका सम्पर्क संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी से हुआ. मैट्रिक के बाद उन्होंने डिग्री कॉलेज में प्रवेश लिया, पर क्रान्तिकारियों से प्रभावित होकर पढ़ाई छोड़ दी. इसी बीच पिताजी का देहान् ...

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    30 अक्तूबर / जन्मदिवस – बहुमुखी कल्पनाओं के धनी मोरोपन्त पिंगले जी

    नई दिल्ली. संघ के वरिष्ठ प्रचारक मोरोपन्त पिंगले जी को देखकर सब खिल उठते थे. उनके कार्यक्रम हास्य-प्रसंगों से भरपूर होते थे. पर, इसके साथ ही वे एक गहन चिन्तक और कुशल योजनाकार भी थे. संघ नेतृत्व द्वारा सौंपे गए हर काम को उन्होंने नई कल्पनाओं के आधार पर सर्वश्रेष्ठ ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उनका पूरा नाम मोरेश्वर नीलकंठ पिंगले था. उनका जन्म 30 अक्तूबर, 1919 को हुआ था. वे बचपन में मेधावी होने के साथ ही बहुत चंचल ए ...

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    विश्व कल्याण के लिए वेदों के पुनर्तेजस्वीकरण की आवश्यकता है – डॉ. मोहन भागवत

    नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारतवर्ष के सभी लोगों के नित्य जीवन का वेदों से सम्बन्ध है. वेद का अर्थ जानना होता है. जिसको हम साइंस कहते हैं वो बाहर की बातें जानना है, वेद में विज्ञान भी है और ज्ञान भी, वह भी है जो समझ में नहीं आता. वेदों का ज्ञान अपने अंदर की खोज करता है. वेद समाज को उन्नत करते हैं, समाज को उन्नत धर्म करता है और धर्म का मूल वेद हैं. अध्यात्म वि ...

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    14 अक्तूबर / पुण्यतिथि – चिर युवा दत्ता जी डिडोलकर

    नई दिल्ली. दत्ता जी डिडोलकर संघ परिवार की अनेक संस्थाओं के संस्थापक तथा आधार स्तम्भ थे. उन्होंने काफी समय तक केरल तथा तमिलनाडु में प्रचारक के नाते प्रत्यक्ष शाखा विस्तार का कार्य किया. उस जीवन से वापस आकर भी वे घर-गृहस्थी के बंधन में नहीं फंसे और जीवन भर संगठन के जिस कार्य में उन्हें लगाया गया, पूर्ण मनोयोग से उसे करते रहे. 'अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद' के कार्य के तो वे जीवन भर पर्यायवाची ही रहे. सरसंघचाल ...

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    10 अक्तूबर / जन्मदिवस – राष्ट्रयोगी दत्तोपंत ठेंगड़ी

    श्री दत्तोपन्त ठेंगड़ी का जन्म दीपावली वाले दिन (10 अक्तूबर, 1920)  को ग्राम आर्वी, जिला वर्धा, महाराष्ट्र में हुआ था. वे बाल्यकाल से ही स्वतन्त्रता संग्राम में सक्रिय रहे. 1935 में वे ‘वानरसेना’ के आर्वी तालुका के अध्यक्ष थे. जब उनका सम्पर्क डॉ. हेडगेवार से हुआ, तो संघ के विचार उनके मन में गहराई से बैठ गये. उनके पिता उन्हें वकील बनाना चाहते थे; पर दत्तोपन्त जी एम.ए. तथा कानून की शिक्षा पूर्णकर 1941 में प्र ...

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    09 अक्तूबर / जन्मदिवस – गृहस्थ प्रचारक भैया जी दाणी

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की परम्परा में प्रचारक अविवाहित रहकर काम करते हैं; पर कुछ अपवाद भी होते हैं. ऐसे गृहस्थ प्रचारकों की परम्परा के जनक प्रभाकर बलवन्त दाणी का जन्म नौ अक्तूबर, 1907 को उमरेड, नागपुर में हुआ था. आगे चलकर ये भैया जी दाणी के नाम से प्रसिद्ध हुए. ये अत्यन्त सम्पन्न पिता के इकलौते पुत्र थे. उनके पिता श्री बापू जी लोकमान्य तिलक के भक्त थे. अतः घर से ही देशप्रेम के बीज उनके मन में पड़ गये थे, ज ...

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    06 अक्तूबर / पुण्यतिथि – गीत के विनम्र स्वर दत्ता जी उनगांवकर

    नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में देशप्रेम से परिपूर्ण अनेक गीत गाये जाते हैं. उनका उद्देश्य होता है, स्वयंसेवकों को देश एवं समाज के साथ एकात्म करना. इनमें से अधिकांश के लेखक कौन होते हैं, प्रायः इसका पता नहीं लगता. ऐसा ही एक लोकप्रिय गीत है, ‘‘पूज्य माँ की अर्चना का, एक छोटा उपकरण हूँ’’ इसके लेखक थे मध्य भारत के वरिष्ठ प्रचारक दत्ताजी उनगाँवकर, जिन्होंने अन्तिम साँस तक संघ-कार्य करने का व्रत न ...

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    भारत की धरती पर रहने वाला संपूर्ण हिन्दू समाज संगठित हो – प्रेमचंद गोयल जी

    शिमला. संजौली (शिमला) में बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विजयादशमी के उपलक्ष्य में पथ संचलन एवं शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रचारक उत्तर क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य प्रेमचन्द गोयल जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे. प्रेमचंद गोयल जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में व्यक्ति विशेष की जय नहीं, बल्कि भारत माता की जय का गुणगान किया जाता है. सन् 1925 में विजयादशम ...

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