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    10 अक्तूबर / जन्मदिवस – राष्ट्रयोगी दत्तोपंत ठेंगड़ी

    श्री दत्तोपन्त ठेंगड़ी का जन्म दीपावली वाले दिन (10 अक्तूबर, 1920)  को ग्राम आर्वी, जिला वर्धा, महाराष्ट्र में हुआ था. वे बाल्यकाल से ही स्वतन्त्रता संग्राम में सक्रिय रहे. 1935 में वे ‘वानरसेना’ के आर्वी तालुका के अध्यक्ष थे. जब उनका सम्पर्क डॉ. हेडगेवार से हुआ, तो संघ के विचार उनके मन में गहराई से बैठ गये. उनके पिता उन्हें वकील बनाना चाहते थे; पर दत्तोपन्त जी एम.ए. तथा कानून की शिक्षा पूर्णकर 1941 में प्र ...

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    09 अक्तूबर / जन्मदिवस – गृहस्थ प्रचारक भैया जी दाणी

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की परम्परा में प्रचारक अविवाहित रहकर काम करते हैं; पर कुछ अपवाद भी होते हैं. ऐसे गृहस्थ प्रचारकों की परम्परा के जनक प्रभाकर बलवन्त दाणी का जन्म नौ अक्तूबर, 1907 को उमरेड, नागपुर में हुआ था. आगे चलकर ये भैया जी दाणी के नाम से प्रसिद्ध हुए. ये अत्यन्त सम्पन्न पिता के इकलौते पुत्र थे. उनके पिता श्री बापू जी लोकमान्य तिलक के भक्त थे. अतः घर से ही देशप्रेम के बीज उनके मन में पड़ गये थे, ज ...

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    06 अक्तूबर / पुण्यतिथि – गीत के विनम्र स्वर दत्ता जी उनगांवकर

    नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में देशप्रेम से परिपूर्ण अनेक गीत गाये जाते हैं. उनका उद्देश्य होता है, स्वयंसेवकों को देश एवं समाज के साथ एकात्म करना. इनमें से अधिकांश के लेखक कौन होते हैं, प्रायः इसका पता नहीं लगता. ऐसा ही एक लोकप्रिय गीत है, ‘‘पूज्य माँ की अर्चना का, एक छोटा उपकरण हूँ’’ इसके लेखक थे मध्य भारत के वरिष्ठ प्रचारक दत्ताजी उनगाँवकर, जिन्होंने अन्तिम साँस तक संघ-कार्य करने का व्रत न ...

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    भारत की धरती पर रहने वाला संपूर्ण हिन्दू समाज संगठित हो – प्रेमचंद गोयल जी

    शिमला. संजौली (शिमला) में बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विजयादशमी के उपलक्ष्य में पथ संचलन एवं शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रचारक उत्तर क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य प्रेमचन्द गोयल जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे. प्रेमचंद गोयल जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में व्यक्ति विशेष की जय नहीं, बल्कि भारत माता की जय का गुणगान किया जाता है. सन् 1925 में विजयादशम ...

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    16 सितम्बर / जन्मदिवस – जन्मजात संघचालक बबुआ जी

    नई दिल्ली. बिहार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बहुविध गतिविधियों के पर्याय बने कृष्णवल्लभ प्रसाद नारायण सिंह जी (बबुआ जी) का जन्म 16 सितम्बर, 1914 को नालन्दा जिले के रामी बिगहा ग्राम में रायबहादुर ऐदल सिंह जी के घर में हुआ था. बाल्यकाल में परिवार के सभी सदस्यों के नालन्दा से गया आ जाने के कारण उनका अधिकांश समय गया में ही बीता. संघ की स्थापना के बाद डॉ. हेडगेवार जब बिहार गये, तो वहाँ उनका सम्पर्क बबुआ जी से ...

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    30 अगस्त / पुण्यतिथि – तरुण तपस्वी, रामानुज दयाल

    नई दिल्ली. उ.प्र. में गाजियाबाद के पास पिलखुआ नगर वस्त्र-निर्माण के लिए प्रसिद्ध है. यहीं के एक प्रतिष्ठित व्यापारी व निष्ठावान स्वयंसेवक श्री रामगोपाल तथा कौशल्या देवी के घर में 1943 में जन्मे रामानुज दयाल ने अपना जीवन संघ को अर्पित किया; पर काल ने अल्पायु में ही उन्हें उठा लिया. सन् 1948 में संघ पर प्रतिबंध लगा, तो पिलखुआ के पहले सत्याग्रही दल का नेतृत्व रामगोपाल जी ने किया. रामानुज पर इसका इतना प्रभाव पड ...

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    छत्तीसगढ़ – नक्सलियों ने आरएसएस स्वयंसेवक की हत्या की

    छत्तीसगढ़ के कांकेर में ज़िले में नक्सलियों ने मंगलवार (अगस्त 27, 2019) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक स्वयंसेवक की हत्या कर दी. 40 वर्षीय स्वयंसेवक दादू सिंह कोरटिया को नक्सलियों ने पहले तो आवाज़ देकर घर से बाहर निकाला और फिर गोली मार कर हत्या कर दी. दुर्गुकोंदल स्थित कोंडेगांव में हुई इस घटना की पुलिस ने भी पुष्टि की है. रात 10.30 के क़रीब 25 के लगभग नक्सलियों ने उनके घर के बाहर जमा होकर उन्हें आवाज़ लगाई. द ...

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    विवेकानंद शिला स्मारक के शिल्पी – एकनाथ रानाडे

    एकनाथ रानाडे का जन्म 19 नवम्बर, 1914 को ग्राम टिलटिला (जिला अमरावती, महाराष्ट्र) में हुआ था. पढ़ने के लिए वे अपने बड़े भाई के पास नागपुर आ गए. वहीं उनका सम्पर्क डॉ. हेडगेवार से हुआ. बचपन से ही प्रतिभावान एवं शरारती थे. कई बार शरारतों के कारण उन्हें शाखा से निकाला गया; पर वे फिर जिदपूर्वक शाखा में शामिल हो जाते थे. इस स्वभाव के कारण वे जिस काम में हाथ डालते, उसे पूरा करके ही दम लेते थे. मैट्रिक की परीक्षा उत ...

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    22 अगस्त / जन्मदिवस – संकल्प के धनी डॉ. जगमोहन गर्ग

    नई दिल्ली. भारत की उन्नति स्वदेशी उद्योगों के बल पर ही हो सकती है. इसलिए हमें विदेशों का मुंह देखने की बजाय स्वयं ही आगे आना होगा. संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरुजी ने जब ये शब्द युवा वैज्ञानिक जगमोहन को कहे, तो उन्होंने तत्काल अमरीका की चमकदार नौकरी और वैभव को लात मारकर मातृभूमि की सेवा के लिए देश लौटने का निश्चय कर लिया. डॉ. जगमोहन गर्ग का जन्म गाजियाबाद में 22 अगस्त, 1933 को हुआ था. एक मध्यमवर्गीय परि ...

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    सपनों का एक गांव – रविंद्रनगर (मियांपुर)

    यह कहानी है प्रकृति की प्रतिकूलताओं के विरूद्ध मानव के संघर्ष की. वर्ष 1947 में विभाजन की पीड़ा सहकर अपना सबकुछ खोकर शरणार्थी बनकर आए बंगाली परिवारों के पुरूषार्थ की, जिन्होंने अपने परिश्रम से बालू की टीलों को लहलहाते खेतों में तब्दील कर दिया. गुरूदेव रविंद्रनाथ ठाकुर की जयंती के दिन बसे इस सुविधा संपन्न गांव रविंद्रनगर को देखकर एक आदर्श गांव (आईडियल विलेज) की कल्पना साकार होती नजर आती है. उत्तरप्रदेश के लख ...

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