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    तीन दिन तक समाज के प्रबुद्धजनों के साथ संवाद करेंगे सरसंघचालक

    नई दिल्ली. सितंबर 17, 18, 19 को दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली प्रांत की ओर से तीन दिवसीय व्याख्यान माला का आयोजन विज्ञान भवन में किया जा रहा है. जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों के संदर्भ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण प्रबुद्धजनों के समक्ष रखेंगे. व्याख्यान माला में समाज के समस्त अंगों के चयनित प्रबुद्धजनों के साथ यह विचार मंथन ह ...

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    ‘मुसलमानों ने बर्बरता की हदें पार कीं’

    बात उन दिनों की है, जब मेरे बड़े भाईसाहब सेना मुख्यालय से जुड़े एक सरकारी दफ्तर में काम करते थे. कुछ दिन बाद उनका स्थानांतरण लाहौर हो गया. उस समय मैं मैट्रिक पास कर चुका था. तो भाईसाहब ने कहा कि गांव से लाहौर चले आओ तो यहां नौकरी मिल जाएगी. मुझे याद है कि मैं 8 जुलाई,1946 को लाहौर पहुंच गया. भाई की मदद से दो-तीन दिन बाद ही नौकरी मिल गयी. कुछ दिन कार्य करने के बाद 01 अक्तूबर,1946 को मुझे एक विदेशी कंपनी में बा ...

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    ‘रास्ते में बिछी थीं लाशें’

    बंटवारे के दिनों के बारे में जब भी सोचता हूं तो एक अजीब सी उलझन होने लगती है. उन दिनों पाकिस्तान में जहां भी हिन्दू रह रहे थे, वे सभी डरे हुए थे कि कब क्या हो जाए. मेरी माता जी का देहांत हो जाने के कारण मेरा लालन-पालन बुआ जी के पास हुआ. तब मेरी उम्र 8 वर्ष थी. अचानक एक दिन हमारे मुहल्ले में भी हालात खराब हो गए. स्थिति इतनी ज्यादा खराब थी कि पलायन ही एक मात्र रास्ता सभी को सूझ रहा था क्योंकि आस-पास के हिन्दू ...

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    ‘नहीं भूलते बंटवारे के दिन’

    बंटवारे के वक्त मैं नागपुर में संघ का तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा था. इस बीच पाकिस्तान की ओर से हिन्दुओं के पलायन की खबरें आनी शुरू हुर्इं. संघ अधिकारियों ने वर्ग को जल्दी समाप्त कर दिया ताकि सीमापार रहने वाले स्वयंसेवक अपने परिवार की मदद कर सकें. नागपुर से मैं फगवाड़ा आया, जहां संघ का शिविर लगा हुआ था और पूज्य गुरुजी वहां आए हुए थे. पाकिस्तान के हालात को देखकर शुरुआत में गुरुजी का आग्रह था कि लोग ...

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    ‘स्वयंसेवकों ने दिया सेना का साथ’

    विभाजन के समय मेरी आयु 7 वर्ष की थी. मैं मीरपुर में रहता था. यह बड़ा ही समृद्ध और पढ़े-लिखे लोगों का इलाका था. 15 अगस्त, 1947 को जब विभाजन के कारण पाकिस्तान से हिन्दू भारत आ रहे थे, उस समय मीरपुर के लोगों को आशा थी कि जम्मू-कश्मीर राज्य के राजा हरि सिंह का क्षेत्र होने के कारण इसका भारत में ही विलय होगा. मुजफ्फराबाद या आस-पास के क्षेत्रों से जो पलायन हो रहा था, मीरपुर के हिन्दुओं ने उन्हें अपने में ही बसा लिय ...

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    स्वयंसेवक ‘अटल’

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निष्ठावान स्वयंसेवक अटल बिहारी वाजपेयी बाल्यकाल से लेकर जीवन के अंतिम क्षण तक अपने स्वयंसेवकत्व पर अटल रहे. संघ का स्वयंसेवक अर्थात् अपने संगठन, समाज और राष्ट्र के हित में स्वयं की प्रेरणा से निःस्वार्थ भाव से निष्ठापूर्वक निरंतर काम करने वाला आदर्श नागरिक. 15 वर्ष की आयु में डी.ए.वी. कॉलेज कानपुर के छात्रावास की संघ शाखा में अपना संघ जीवन प्रारम्भ करने वाले अटल जी को वामपंथी विचा ...

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    केरल : सेवा के अग्रिम मोर्चों पर पहुंचे संघ के स्वयंसेवक

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हजारों स्वयंसेवक अपनी जान को हथेली पर रखकर केरल में बाढ़ पीड़ितों की सहायता में दिनरात एक किए हुए हैं. इन स्वयंसेवकों ने दूरदराज के ग्रामीण बाढ़ग्रस्त इलाकों में जाकर सेना के जवानों, अर्धसैनिक बलों और स्थानीय पुलिस का सहयोग करते हुए सेवा के प्रायः सभी कार्यों को सम्भाला है. स्वयंप्रेरणा एवं निःस्वार्थ भाव से सेवा कार्य में जुटे यह स्वयंसेवक किसी प्रमाणपत्र अथवा राजीनतिक वाहवाही से को ...

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    भारत की संस्कृति एकता की विविधता की बात करती है – डॉ. मोहन भागवत जी

    पटना (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि संघ का स्वयंसेवक स्वयं की प्रेरणा से काम करता है. संगठन किसी के भय, प्रतिक्रिया व प्रतिरोध में काम नहीं करता. भारत की संस्कृति विविधता में एकता की बात नहीं, बल्कि एकता की विविधता की बात करती है. वे राजेन्द्र नगर स्थित शाखा मैदान में स्वयंसेवकों को संबोधित कर रहे थे. संघ कार्य का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि ब ...

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    संघ और व्यक्ति पूजा

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समझना आसान नहीं है. इसका मुख्य कारण यह है कि संघ वर्तमान में प्रचलित किसी राजनीतिक पार्टी या सामाजिक संस्था या संगठन के ढांचे में नहीं बैठता. कुछ लोगों को लगता हैं कि संघ में तानाशाही पद्धति से काम चलता हैं तो कुछ अन्य लोग यह दावा करते हैं कि संघ में नेतृत्व की पूजा होती हैं. ये दोनों भी सत्य से बिल्कुल परे हैं. व्यक्ति पूजा नहीं संघ के संस्थापक ने ऐसी एक कार्यशैली का आविष्कार किय ...

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