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    भाग तीन, नवसृजन की प्रसव पीड़ा है – ‘कोरोना महामारी’

    नरेंद्र सहगल भारत का वैश्विक लक्ष्य विश्व कल्याण सर्व सक्षम भारत की आध्यात्मिक परंपरा एकात्म मानववाद ही भारतीयता है                 प्रत्येक व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र किसी दैवी उद्देश्य के साथ धरती पर जन्म लेते हैं. कर्म करने में स्वतंत्र सृष्टि के यह सभी घटक जब अपने-अपने कर्तव्यों को स्वार्थ रहित होकर निभाते हैं तो सृष्टि शांत रहती है. परंतु यही घटक जब अपने वा ...

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    विश्वगुरु मार्ग का मील पत्थर – बुद्धत्व

    प्रवीण गुगनानी भारत किसी समय में विश्वगुरु यूं ही नहीं कहलाता था. भारत एक ऐसा देवदुर्लभ, बिरला, अनोखा राष्ट्र है, जिसने कभी किसी राष्ट्र की सीमाओं पर हमला नहीं किया. कभी स्वयं की सीमाओं के विस्तार का प्रयास नहीं किया. साथ ही भारत एक ऐसा भी बिरला राष्ट्र है जो बिना आक्रमण ही विश्व भर में अपनी सीमाओं को सांस्कृतिक माध्यम से बढ़ाने में सफल रहा है. भारत ने अपने सांस्कृतिक देवदूतों के माध्यम से लगभग एक चौथाई विश् ...

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    जेएनयू – वामपंथी गठजोड़ ने वीर सावरकर मार्ग के साइन बोर्ड पर कालिख पोती

    मोहम्मद अली जिन्ना मार्ग का पोस्टर बोर्ड पर लगाया   नई दिल्ली. दिल्ली जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में असामाजिक तत्वों ने विवि परिसर में सड़क मार्ग पर वीडी सावरकर के नाम से लगे साइन बोर्ड पर कालिख पोत दी. तथा बोर्ड पर मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगा दी. यह काम वामपंथी या कांग्रेसी छात्र संगठन का हो सकता है. क्योंकि यही छात्र विवि में सड़क मार्ग का नाम सावरकर के नाम पर रखने का विरोध कर रहे थे. घटनाक्रम की ...

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    सादगी, समर्पण, समरसता और सरलता के प्रतीक पी. परमेश्वरन जी का पुण्यस्मरण

    नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि एक हजार वर्ष का इतिहास पराधीनता और आत्मरक्षा का इतिहास रहा है. जब कभी विश्व का इतिहास सदाशयता से लिखा जाएगा तो नृशंस और बर्बर शक्तियों के सामने जो दृढ़ता के साथ टिका और आत्मरक्षा के साथ जिसने अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा की, उस हिन्दू समाज की सदैव चर्चा होगी. आज जो विकृतियाँ हैं वो प्राणों की रक्षा के लिए संकुचित होने के कारण, सा ...

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    पी परमेश्वरन जी – प्रखर विचारवंत, भावपूर्ण कवि, स्थितप्रज्ञ कर्मयोगी

    केरल में वामपंथी तूफान के कारण अन्धेरा छाया हुआ था. वहां का हिन्दू समाज, हिन्दू राष्ट्र, हिन्दू धर्म के विषय में बोलने का आत्मविश्वास खो बैठा था. आदि शंकराचार्य की भूमि पर संस्कृत, योग, गीता, रामायण लुप्त होने लगे थे. ऐसे समय में एक प्रखर विचारवंत, लेखक, एक भावपूर्ण कवि, स्थितप्रज्ञ कर्मयोगी, एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में केरल के क्षितिज पर परमेश्वरन जी के रूप में सूर्य का उदय हुआ. स्वामी विवेकानन्द और म ...

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    #CAA के समर्थन में इंदौरवासियों ने निकाली विशाल रैली

    भारत सुरक्षा मंच इंदौर द्वारा #CAA के समर्थन में दशहरा मैदान में आयोजित विशाल तिरंगा यात्रा एवं राष्ट्रगान को इंदौर की जनता का भरपूर समर्थन मिला. CAA के समर्थन में नारे लगाते हुए लोग दशहरा मैदान पर पहुंच रहे थे. हर उम्र का व्यक्ति CAA के समर्थन में सड़कों पर था. अंतिम समय में स्थान बदलने के बाद भी पूरा मैदान भरा हुआ था, इंदौर वासी सपरिवार CAA का समर्थन करने के लिए उपस्थित थे. कार्यक्रम ठीक 2 बजे प्रारंभ हुआ, ...

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    12 जनवरी जयंती पर विशेष – राष्ट्र भक्त सन्यासी स्वामी विवेकानंद की भविष्यवाणियां

    भविष्यदृष्टा स्वामी विवेकानंद एक ऐसे युवा सन्यासी हुए, जिन्होंने सारे संसार में भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म की विजय पताका फहरा कर भारत को गौरवान्वित किया था. उन्होंने भारतवासियों में राष्ट्रीय चेतना और स्वाभिमान जागृत करके परतंत्रता, अंधविश्वास और गरीबी के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया था. स्वामी विवेकानंद ने अपना आध्यात्मिक अभियान इन शब्दों से प्रारंभ किया था - “राष्ट्र ही हमारा देवता है, यह सब मनुष ...

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    भारत यानि ज्ञान रथ, जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है – अरुण कुमार जी

    गुजरात (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, गुजरात प्रांत द्वारा 20 दिसंबर से 22 दिसंबर तक आयोजित त्रिदिवसीय “समर्थ भारत युवा संगम” शिविर के समारोप समोराह में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार जी मुख्य वक्ता रहे. उन्होंने कहा कि आज का यह समापन का कार्यक्रम शायद जीवन में नई शुरुआत भी हो सकता है. देश में एक बड़ा वर्ग है जो मानता है कि विद्यार्थी यानि अनुशासनहीनता, मौज मस्ती आदि यह सामान्य समाज की युवाओं को द ...

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    28 अक्तूबर / जन्म दिवस – भारत की महान पुत्री भगिनी निवेदिता

    नई दिल्ली. स्वामी विवेकानन्द से प्रभावित होकर आयरलैण्ड की युवती मार्गरेट नोबेल ने अपना जीवन भारत माता की सेवा में लगा दिया. प्लेग, बाढ़, अकाल आदि में उन्होंने समर्पण भाव से जनता की सेवा की. ऐसे में भारत की महान बेटी कहा जाए तो गलत न होगा. 28 अक्तूबर, 1867 को जन्मी मार्गरेट के पिता सैम्युअल नोबेल आयरिश चर्च में पादरी थे. बचपन से ही मार्गरेट नोबेल की रुचि सेवा कार्यों में थी. वह निर्धनों की झुग्गियों में जाकर ...

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    भारत विश्व गुरु बनने के पथ पर बढ़ चला है – उपराष्ट्रपति वेंकैय्या नायडू

    मुंबई. उपराष्ट्रपति वेंकैय्या नायडू जी ने कहा कि देश के युवकों को सकारात्मक एवं रचनात्मक वृत्ति से कार्य करने की आवश्यकता है. हर एक व्यक्ति अपना काम करे तो वह भी देश सेवा ही है. 130 करोड़ भारतीयों के एकत्रित प्रयत्नों के कारण भारत आज विश्वगुरू बनने की ओर तेज गति से बढ़ रहा है. वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित प्रथम स्व. यशवंतराव केलकर स्मृति व्याख्यान में संबोधित कर रहे थे. मुंबई में विशिष्ट आम ...

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