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    भारत विश्व गुरु बनने के पथ पर बढ़ चला है – उपराष्ट्रपति वेंकैय्या नायडू

    मुंबई. उपराष्ट्रपति वेंकैय्या नायडू जी ने कहा कि देश के युवकों को सकारात्मक एवं रचनात्मक वृत्ति से कार्य करने की आवश्यकता है. हर एक व्यक्ति अपना काम करे तो वह भी देश सेवा ही है. 130 करोड़ भारतीयों के एकत्रित प्रयत्नों के कारण भारत आज विश्वगुरू बनने की ओर तेज गति से बढ़ रहा है. वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित प्रथम स्व. यशवंतराव केलकर स्मृति व्याख्यान में संबोधित कर रहे थे. मुंबई में विशिष्ट आम ...

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    विवेकानंद शिला स्मारक के शिल्पी – एकनाथ रानाडे

    एकनाथ रानाडे का जन्म 19 नवम्बर, 1914 को ग्राम टिलटिला (जिला अमरावती, महाराष्ट्र) में हुआ था. पढ़ने के लिए वे अपने बड़े भाई के पास नागपुर आ गए. वहीं उनका सम्पर्क डॉ. हेडगेवार से हुआ. बचपन से ही प्रतिभावान एवं शरारती थे. कई बार शरारतों के कारण उन्हें शाखा से निकाला गया; पर वे फिर जिदपूर्वक शाखा में शामिल हो जाते थे. इस स्वभाव के कारण वे जिस काम में हाथ डालते, उसे पूरा करके ही दम लेते थे. मैट्रिक की परीक्षा उत ...

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    15 अगस्त / जन्म दिवस – स्वतन्त्रता के उद्घोषक श्री अरविन्द

    नई दिल्ली. भारतीय स्वाधीनता संग्राम में श्री अरविन्द का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उनका बचपन घोर विदेशी और विधर्मी वातावरण में बीता, पर पूर्वजन्म के संस्कारों के बल पर वे महान आध्यात्मिक पुरुष कहलाये. उनका जन्म 15 अगस्त, 1872 को डॉ. कृष्णधन घोष के घर में हुआ था. उन दिनों बंगाल का बुद्धिजीवी और सम्पन्न वर्ग ईसाइयत से अत्यधिक प्रभावित था. वे मानते थे कि हिन्दू धर्म पिछड़ेपन का प्रतीक है. भारतीय परम्पराएं अन्धवि ...

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    धर्म संसद में पारित प्रस्ताव – हिन्दू समाज के विघटन के षड्यंत्र

    धर्मसंसद दिनांक 31 जनवरी, 2019 सेक्टर-14, ओल्ड जी. टी. रोड, कुम्भ मेला क्षेत्र, प्रयागराज प्रस्ताव (2) - हिन्दू समाज के विघटन के षड्यंत्र हिन्दू समाज की एकता को तोड़ने के लिए इस्लामिक, चर्च तथा साम्यवादी संगठन हमेशा से कुचक्र रचते रहे हैं. अब कुछ राजनैतिक दल व अन्य संगठन भी अपने निहित स्वार्थों के कारण लोक लुभावने नारे देकर व हिंसा का सहारा लेकर इन षड्यंत्रों को तेजी से बढ़ा रहे हैं.  इनकी कार्य पद्धति देखकर ...

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    भारत में स्वाधीनता की चेतना के नायक हैं महाराणा प्रताप – डॉ. बालमुकुन्‍द

    गोरखपुर (विसंकें). मध्यकालीन भारत में महाराणा प्रताप स्वाधीन चेतना के वैसे ही नायक हैं जैसे बीसवीं शताब्दी में भगत सिंह, आजाद, बिस्मिल जैसे क्रान्तिकारी थे. महाराणा प्रताप हमारे वास्तविक नायक हैं, जिनका जीवन शौर्य, संप्रभुता, स्वतंत्रता, जातीय स्वाभिमान का प्रतिमान था. महाराणा प्रताप का नाम भारत के शिखर के अमर-सपूतों में दर्ज है. प्रताप भारत एवं भारतीयता के प्रतीक हैं. राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा के लिए प् ...

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    स्वामी विवेकानंद ने विश्व बंधुत्व का विचार सबके सम्मुख रखा था – डॉ. मनमोहन वैद्य

    कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ के साथ करने पर संघ से परिचित और राष्ट्रीय विचार के लोगों आश्चर्य होना स्वाभाविक है. भारत के वामपंथी, माओवादी और क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थ के लिए राष्ट्र विरोधी तत्वों के साथ खड़े तत्वों को इससे आनंद होना भी अस्वाभाविक नहीं है. वैसे, इसका अर्थ ये नहीं कि राहुल गांधी जिहादी मुस्लिम आतंकवाद की वैश्विक त्रासदी से अनजान ह ...

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    महाराणा प्रताप के व्यक्तित्व में शौर्य व नैतिकता का अद्भुत समावेश था – नरेंद्र कुमार जी

    स्वदेश, स्वधर्म व स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप – योगी आदित्यनाथ जी लखनऊ (विसंकें). उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने लखनऊ के गोमती नगर स्थित आई.एम.आर.टी. मैनेजमेंट कॉलेज में अवध प्रहरी पत्रिका द्वारा महाराणा प्रताप जयन्ती के उपलक्ष्य में प्रकाशित युवा शौर्य विशेषांक का विमोचन किया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र कुमार जी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे. कार् ...

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    हिन्दुत्व की राह पर चल कर ही भारत फिर बनेगा विश्व गुरु – डॉ. मोहन भागवत जी

    कोलकत्ता. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने भगिनी निवेदिता के 150वें जन्मदिवस पर कोलकत्ता में राष्ट्रवाद विषय पर आयोजित सम्मेलन में कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने जो राह चुनी थी, वह व्यक्ति व समाज को तैयार करने की थी. भगिनी निवेदिता ने स्वामी जी के आदेश का पूर्ण अनुशासन से पालन कर अपने लिए जो दिशा तय की, वह उस समय चल रही व्यवस्था में परिवर्तन लाने के लिए थी. भगिनी के जीवन में एक विशेष ...

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    धर्म के वास्तविक मर्म को न समझने के कारण ही वह अनेक प्रतीत होते हैं – आचार्य देवव्रत जी

    शिमला (विसंकें). शिमला के गेयटी थियेटर में सोमवार को विश्व बधुंत्व दिवस के अवसर पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी ने कहा कि ईश्वर एक है, उसे प्राप्त करने के लिए भले ही रास्ते भिन्न रहे हों. धर्म अनेक नहीं हैं, धर्म के वास्तविक मर्म को न समझने के कारण ही वह अनेक प्रतीत होते हैं. जैसे आग का एक ही धर्म है और वह है जलाना, इसी प्रकार पानी से लेकर हर वस्तु का अपना निश्चित धर्म होता है. गेयटी में विवेकानंद केंद्र नाभा ...

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    कट्टरपंथी विचारधाराओं से बचने के लिए सब पंथों का सम्मान जरूरी – विहिप

    शिमला (विसंकें). आज अगर हम अन्य लोगों की परम्पराओं का सम्मान नहीं करेंगे तो इससे कट्टरपंथ बढ़ता चला जाएगा. भारत में सर्वधर्म समभाव का दर्शन रहा है. ऐसे में आज भी हमें स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों को नहीं भूलना चाहिए. स्वामी विवेकानंद जी द्वारा शिकागो के धर्म सम्मेलन में दिये उनके व्याख्यान के 125 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विवेकानंद केंद्र और विश्व हिन्दू परिषद् ने सम्मिलित रूप से कार्यक्रम का आयोजन क ...

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