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पंजाब में बढ़ रहे मतांतरण को रोकने का संकल्प लें..!!

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‘वसुधैव कुटुम्बकम’, वसुधैव कुटुम्बकम का उद्घोष कर ऋषि मुनियों, संतों ने संपूर्ण पृथ्वी को एक परिवार का नाम दिया है. जब कभी भी विश्व के किसी भी देश पर विपदा आती है तो वह देश हमेशा ही आशा भरी नजऱों से भारत की ओर देखता है और भारत भी सदा ही उसकी आशाओं की पूर्ति करता रहा है. श्री गुरु नानक देव जी ने सिक्ख पंथ चलाया तो उन्होंने पंथ के माध्यम से ‘सरबत्त दा भला’ ही मांगा.

समय-समय पर भारत को लूटने के लिए जो आक्रमणकारी आए, उन्होंने लूट के साथ धर्म परिवर्तन भी किया. आज एक बार फिर गुरूओं, पीरों की पवित्र धरती पंजाब में मतांतरण समाज को ख़ूब कलंकित कर रहा है. जिसमें भोले-भाले लोगों को लालच देकर कुछ राष्ट्र विरोधी और विदेशी ताकतें तेज़ी से मतांतरण करवा रही हैं. पंजाब के सामने सबसे बड़ी समस्या जिसे लेकर पंजाबी आखें बंद कर बैठे रहे हैं, वह है – मतांतरण.

वहीं, दूसरी ओर ‘धर्म बचाओ मोर्चा’ द्वारा समाज में जागृति लाई जा रही है. 11 जनवरी, 2022 अमृतसर में संत सभा में सभी संतों ने एक मत से मतांतरण के विरुद्ध 13 सदस्यीय समिति का गठन कर ‘धर्म बचाओ मोर्चा’ के तहत हुंकार भरी. ‘धर्म बचाओ मोर्चा’ द्वारा शुरू की गई इस हस्ताक्षर मुहिम में लगभग हर वर्ग के लोग, युवा, संगठन आगे आ रहे हैं. यह हस्ताक्षर अभियान धर्म परिवर्तन और बेअदबी की घटनाओं के खिलाफ क़ानून बनाने को लेकर करवाए जा रहे हैं. मतांतरण के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान को अब जनांदोलन की तरह आम जनता का समर्थन मिल रहा है.

नामधारी समाज, हिंद क्रांति दल, धर्म जागरण संगठनों, व अन्य संस्थाओं द्वारा अभियान को हर शहर, बस्ती, गली व मोहल्ले तक पहुंचाया जा रहा है ताकि विदेशी ताक़तों को समझ आ जाए कि मतांतरण को किसी क़ीमत पर भी सहन नहीं किया जाएगा. देश की एकता व अखंडता के लिए मतांतरण को रोकना बहुत अधिक ज़रूरी है. अभियान के दौरान हर वर्ग के लोगों में मतांतरण के दुष्प्रभाव को लेकर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है. पंजाब की जनता को चाहिए कि ‘धर्म बचाओ मोर्चा’ के इस अभियान को सफल बनाया जाए ताकि विदेशी ताक़तों को समझ आ जाए कि भारत के लोग अब जागरूक हो चुके हैं. अब यह घिनौनी हरकत और सहन नहीं करनी चाहिए. गुरुओं की धरती पंजाब में बड़ी तेज़ी से मतांतरण हो रहा है और गाँव के गाँव बड़ी तेज़ी से अपना धर्म छोडक़र दूसरे धर्म को अपना रहे हैं जो चिंता का विषय है.

ऐसा ना हो कि आने वाले समय में पंजाब सेंट पीटरपुर कहलाए. पंजाब में धर्म परिवर्तन या मतांतरण का काला खेल अब रफ़्तार पकड़ चुका है. श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में मतांतरण की घटनाओं के ध्यान में आने के बाद कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि ईसाई समुदाय लालच देकर धर्म परिवर्तन करवा रहा है. पंजाब में मतांतरण की बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां लग चुकी हैं. हमारा धर्म हमें सिखाता है कि ‘मानस की जात सबै एकै पहचानबौ’. पर, मतांतरण करने वालों का इन पंक्तियों से कोई लेना देना नहीं. उनकी कोई इंसानियत नहीं, कोई मानवता नहीं. वह तो मजबूरी देखकर, आर्थिक हालात देखकर मतांतरण करवाते हैं. आज पंजाब में एशिया का चाहे सबसे बड़ा चर्च बन रहा हो या बड़े स्तर पर मतांतरण की बात हो रही हो इसकी चिंता और चर्चा समाज के हर वर्ग में चल रही थी, इसीलिए संतों द्वारा चलाए इस अभियान को हर नागरिक तक ले जाकर जागरूक किया जा रहा है.

20 फरवरी को पंजाब में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, इसलिए बाकी मुद्दों के साथ-साथ मतांतरण के खिलाफ फैसले की घड़ी का भी समय आ गया है. इस दौरान हम सबकी भी जिम्मेदारी है कि श्री गुरुग्रंथ साहब की जननी पाँच दरियाओं की पवित्र धरा पंजाब में मतांतरण के खिलाफ एक ऐसी लहर को खड़ा करें और इस मुद्दे पर ध्यान देते हुए उम्मीदवारों से सवाल पूछने की हिम्मत को जुटाकर उनके ज़हन में मतांतरण के खिलाफ सोच को उतार दें. मतदान उसी के पक्ष में हो जो हमें भारत के संविधान के अनुसार मिले ‘जीने का मौलिक’ अधिकार दिलाने का पक्षधर हो.

यदि सभी दल मतांतरण के खिलाफ बनने वाले क़ानून के मुद्दे को अपने चुनाव मैनिफेस्टो में शामिल करते हैं और लागू करने का वचन देते हैं तो तो यह बात देश और दुनिया के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है. धर्म पर अडिग रहने का मार्ग हमारे गुरुओं ने अपने जीवन का बलिदान देकर हमें सिखाया है. हम भी अपने सिद्धांत, धर्म और राष्ट्र के प्रति समर्पित हों. इसलिए आईए पंजाब में चल रहे एक करोड़ हस्ताक्षर अभियान में सहयोग करें और पंजाब में बढ़ रहे मतांतरण को रोकने का संकल्प लें.

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