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लव जेहाद के खिलाफ शंखनाद को प्रेरित करती द कनवर्जन

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विवेक कुमार पाठक

हाथ में कलावा और माथे पर तिलक लगाकर मुस्लिम युवक हमारी बहन बेटियों को किस तरह बहका रहे हैं और उनको झूठे प्रेमजाल में फंसाकर मतांतरित कर रहे हैं. इस सच्चाई का खुलासा द कनवर्जन नाम से बनी फिल्म हम सबके सामने कर रही है. फिल्म लव जेहाद के काले सच को उजागर करते हुए बताती है कि एक बार मुस्लिम लड़के द्वारा फंसाने के बाद हिन्दू बेटियां किस तरह के धार्मिक उन्माद का शिकार होती हैं.

लव जेहाद भारतीय समाज के लिए कोई नया विषय नहीं है. पिछले कई सालों से एक एजेंडे के तहत अनेक युवक हिन्दू नाम रखकर हिन्दू बेटियों को फंसाने का षड़यंत्र करते हैं और उन्हें अपनी झूठी बातों और वादों के जरिए बहला फुसलाकर उनसे विवाह कर लेते हैं, जिसके बाद उनकी असल हकीकत और पहचान पीड़ित बेटियों और युवतियों को होती है. मगर तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराते हुए उनकी पहचान मिटाने का खेल धीरे धीरे शुरु हो जाता है. जो प्रेमी उनसे राम रहीम एक और सब धर्म और पंथ बराबर होने की बात शादी से पहले किया करता था वो शादी के बाद अव्वल दर्जे का कट्टर बन जाता है.

द कनवर्जन फिल्म समाज की ऐसी ही कड़वी हकीकत को सामने लाती है. इस फिल्म में हिन्दू बेटियों को लव जेहाद का शिकार बनाने के लिए कैसे स्कूल और कॉलेज में षड़यंत्रकारी अपनी निगाह गढ़ाए हुए हैं. फिल्म में हिन्दू परिवार की बेटी को युवक के चंगुल में फंसते और शोषित होते हुए दिखाया गया है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे माथे पर तिलक और हाथ में कलावा बांधे एजेंडाशुदा युवा अलग अलग तरीकों से हमारी बेटियों को फंसाने का षड़यंत्र कर रहे हैं.

फिल्म बताती है कि चालाक और धूर्त बबलू शेख जैसे कट्टरपंथियों को हिन्दू बेटियों को फंसाने के लिए उनके आका फंडिंग करते हैं. हमारे घर परिवार एकल हो रहे हैं एवं उनमें संवाद की कमी के कारण इस तरह की घटनाएं हो रही हैं. एक हिन्दू बेटी इन विधर्मियां के कुचक्र में फंसने के बाद किस तरह खून के आंसू रोती है, यह हकीकत हमें द कनवर्जन फिल्म दिखाती है. लुभावनी बातों का दावा करने वाले असल जिंदगी में कितने कट्टर होते हैं, यह उनके साथ रहने पर ही पता चलता है.

लव जेहाद का शिकार हुई बेटियों की मूल पहचान खत्म करके उनके मुस्लिम नाम रख दिए जाते हैं. उनके विवाह को बेमतलब मानकर उनका दोबारा निकाह कराया जाता है. देश में आए दिन सामने आती घटनाओं ने साफ कर दिया है कि कैसे हिन्दू बेटियों पर जुल्म शुरु हो जाते हैं.

लव जेहाद में यातनाओं के बाद पीड़िताओं को मुस्लिम परिवार के शेष पुरुष सदस्यों की कुदृष्टि का सामना भी करना पड़ता है. द कनवर्जन ऐसी कड़वी हकीकत को हम सबके सामने लाती है. तीन तलाक और उसके बाद हलाला के नाम पर होने वाले शारीरिक शोषण को भी फिल्म में गंभीरता के साथ दिखाया गया है.

अगर हम पीड़िताओं को समाज जागरण का लक्ष्य दे दें तो वे घर घर की बेटियों को बतला सकती हैं कि लव जेहाद का जहर कैसे जीवन तबाह कर सकता है. कैसे लव जेहादी समाज को खोखला कर रहे हैं और उनके मंसूबों को ध्वस्त करने के लिए किस तरह के जागरण और एकजुटता की आवश्यकता है. कुल मिलाकर द कनवर्जन लव जेहाद के खिलाफ हिन्दू समाज को शंखनाद के लिए प्रेरित करती है.

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