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अल्पज्ञानियों के अहंकार से हमारी परंपरा, संस्कृति, यश और गौरव का नुकसान हुआ – प्रह्लाद सिंह पटेल

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उदयपुर. वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयन्ती के उपलक्ष्य में प्रताप गौरव केंद्र की ओर से ऑनलाइन माध्यम से आयोजित नौ दिवसीय महाराणा प्रताप जयन्ती समारोह-2021 रविवार को संपन्न हो गया.

समापन समारोह में मुख्य अतिथि केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री प्रह्लाद पटेल रहे. अध्यक्षता वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के संरक्षक गोविन्द सिंह टांक ने की. विशिष्ट अतिथि क्षेत्र प्रचारक प्रमुख श्रीवर्धन रहे.

विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक प्रमुख श्रीवर्धन जी ने कहा कि आज संस्कार युक्त जीवन जीने, जीवन मूल्य निर्धारित करने एवं देश पर संकट आने पर सर्वस्व अर्पण करने की मानसिकता का बने रहना अति आवश्यक है. समाज और संगठन के बिना कार्य करना कठिन रहता है. प्रताप गौरव केंद्र में भारत माता मंदिर से महाराणा प्रताप मूर्ति तक जाने हेतु रोपवे निर्माण, राजसिंह संग्रहालय का शेष कार्य, लेजर शो योजना, शोध केन्द्र एवं अध्ययन केंद्र का निर्माण होना शेष है. भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय सहित सबका सहयोग अपेक्षित है.

केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मुझे समापन समारोह में भाग लेने का अवसर मिला. ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि, जब वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी ने जन्म लिया. देश का ऐसा कोई व्यक्ति न होगा, जिसने इतिहास को पढ़ा ना हो. एक वीरांगना की कोख से पैदा हुए महाराणा प्रताप की मातृभाषा बनी शक्ति और युद्ध कौशल. हम अगर उनके जीवन को पलट कर देखते हैं, इतिहास को पढ़ते हैं, कहानियां सुनते हैं, युद्ध शैली के बारे में सोचते हैं, तो लगता है कि जीवन में किसी ने भी ऐसा युद्ध नहीं लड़ा होगा. जब वह नौनिहाल थे, उनकी माता से वह प्रसंग और उस वीरांगना की ज्ञान शक्ति के कारण उनके भीतर एक नैतिक सामर्थ्य पैदा हुआ, उसने हमेशा विपरीत परिस्थिति के सामने सिर झुकाने से इंकार किया.

जब लोग कहते हैं कि अकबर महान, तो मुझे लगता है कि अज्ञानियों ने कभी ऐसा नुकसान नहीं किया हमारी परंपरा के साथ, अपनी संस्कृति के साथ, हमारे यश और गौरव के साथ जितना इन अल्पज्ञानियों के अहंकार ने किया. जिन्होंने कभी भी ईमानदारी के साथ हमारे पौरूष एवं गौरव का गान नहीं किया. लम्बे समय तक ये बताने की कोशिश की गई कि अकबर महान था. हल्दीघाटी का युद्ध इस बात का गवाह है कि वहां अकबर जीता नहीं, महाराणा हारे नहीं. लेकिन वर्तमान की पीढ़ी और आने वाली पीढी को हम क्या बताएं, उसके लिए प्रताप गौरव केंद्र का कार्य, उनकी तपस्या, का मैं भारत सरकार का संस्कृति मंत्री होने के नाते अभिनन्दन करता हूं, बार बार उनको प्रणाम करता हूं. उन्होंने कहा कि मनुष्य हो या धातु हो, दोनों में एकरूपता जरूर होती है. जितना हो तपता है, उतना निखर कर सामने आता है. कठिनाइयों से नहीं भागना आने वाली पीढियों को सीखना होगा. हमें आने वाली पीढ़ियों को बताना पड़ेगा कि वास्तव में जितना तपेंगे, उतनी  चमक, उतना सामर्थ्य, उतना आत्मबल उनके भीतर आएगा.

कल अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस है. योग स्वयं धरोहर है. दुनिया ने योग को स्वीकार किया. योग उस असाध्य को साध्य बनाने का सामर्थ्य देता है. महाराणा प्रताप का जीवन उन्हीं योगायोग का पूरा संकलन है. उन्होंने आह्वान किया कि योग को मामूली मत समझिए, इस इतिहास को सिर्फ पन्नों को पलटने के तौर पर मत देखिए. हम उसमें से क्या सीख सकते हैं, क्या अमल कर सकते हैं. धर्म उदाहरण के लिए नहीं, धारण करने के लिए हैं.

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उदयपुर के महापौर गोविंद सिंह टांक ने केन्द्रीय राज्य मंत्री प्रह्लाद पटेल से समय निकालकर प्रताप गौरव केंद्र का विजिट करने का आग्रह किया. वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के महामंत्री परमेन्द्र दशोरा ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयन्ती के उपलक्ष्य में आयोजित नौ दिवसीय महाराणा प्रताप जयन्ती समारोह की विस्तृत जानकारी दी. कोषाध्यक्ष अशोक पुरोहित ने कविता सिरमौर है, हमारा राणा प्रताप प्यारा, जिसने स्वतंत्रता का पहला बिगुल बजाया प्रस्तुत की. संचालन सुन्दर कटारिया व आभार अनुराग सक्सेना ने जताया.

प्रतियोगिताओं का परिणाम घोषित

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयन्ती के उपलक्ष्य में आयोजित ऑनलाइन प्रतियोगिताओं के परिणाम की घोषणा करते हुए वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष प्रो. बी.एल. चौधरी ने बताया कि प्रेरक प्रसंग प्रतियोगिता के 5 से 14 वर्ष के वर्ग में प्रथम स्थान गुरूशाहनी – उदयपुर, द्वितीय स्थान – याशी पालीवाल, उदयपुर ने, तृतीय स्थान युवराज प्रजापत, उदयपुर ने प्राप्त किया तथा 15 से 25 वर्ग में प्रथम स्थान खुशराज सिंह व विरल चतुर्वेदी उदयपुर ने, द्वितीय स्थान शिवानी टेलर कोटा व भावेश संतानी गुजरात ने तथा तृतीय स्थान पूजा जैन उदयपुर ने प्राप्त किया.

इसी प्रकार देशभक्ति गीत प्रतियोगिता में पहले वर्ग में प्रथम स्थान हुनर भाटिया उदयपुर ने, द्वितीय स्थान आदित्य जैन मध्य प्रदेश ने तथा तृतीय स्थान माधव सोनी उदयपुर ने प्राप्त किया. दूसरे वर्ग में प्रथम स्थान जय कुमार नागौर व पार्थ भारतम राजसमंद ने, द्वितीय स्थान कीर्ति लौहार उदयपुर ने, तृतीय स्थान शिवम टांक नागौर ने प्राप्त किया. काव्य पाठ प्रतियोगिता में पहले वर्ग में प्रथम स्थान मैसी गौड उदयपुर ने, द्वितीय स्थान निष्ठा लौहार उदयपुर ने, तृतीय स्थान सिरत कौर उदयपुर ने प्राप्त किया. दूसरे वर्ग में प्रथम स्थान भूमिका शकतावत भीणडर ने, दूसरा स्थान भव्या राठौड उदयपुर ने तथा तीसरा स्थान जाग्रति कुमावत उदयपुर ने प्राप्त किया. भाषण प्रतियोगिता के पहले वर्ग में प्रथम स्थान ध्रुव मरहठ उदयपुर ने, द्वितीय स्थान नेहल सिसोदिया उदयपुर तथा तृतीय स्थान सिरत कौर – उदयपुर व अनिरुद्ध धाकड महाराष्ट्र ने प्राप्त किया. दूसरे वर्ग में प्रथम स्थान शिवानी आसोपा जोधपुर ने, द्वितीय स्थान सुष्मिता पुरोहित जैसलमेर व अनुश्री तैली उदयपुर ने तथा तृतीय स्थान रामनिवास विश्नोई जालौर ने प्राप्त किया.

लॉकडाउन के पश्चात सरकारी गाइडलाइन की पालना करने के साथ ही 21 जून, सोमवार से प्रताप गौरव केंद्र राष्ट्रीय तीर्थ पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा. प्रताप गौरव केंद्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि पर्यटक प्रातः 9.30 से 3 बजे के मध्य प्रताप गौरव केंद्र के दर्शन कर सकेंगे. सभी पर्यटकों के लिए मास्क पहनकर आना अनिवार्य होगा. मास्क के बिना प्रवेश वर्जित रहेगा.

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