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समाज की भावनाओं का सम्मान किया जाए

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फिल्में, सीरीज, ओटीटी प्लेटफॉर्म, विज्ञापन से किसी के आत्मसम्मान और भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना बेहतरीन गुणवत्ता वाला संदेश प्रसारित पेश हो, यही भाव समाज को अभिप्रेत है. मनोरंजन के क्षेत्र में कलाकार अपनी कलाकृति के माध्यम से एक प्रकार का सामाजिक ज्ञानवर्धन का कार्य करते हैं. मनोरंजन के साथ-साथ समाज को अनेक बातों में जागृत किया जाता है. किन्तु, कभी-कभी इन्हीं मनोरंजन क्षेत्रों में आधुनिकता के नाम पर, हिन्दू संस्कृति, परंपराओं, त्योहारों और रीति-रिवाजों पर हमला किया जाता है. इसमें बॉलीवुड और प्रतिष्ठित कंपनियों के ब्रांड्स अग्रेसर हैं. दुनिया में किसी अन्य धर्म में हिन्दू धर्म जैसी सहिष्णुता नहीं है. हिन्दू धर्म में महिलाओं को देवी माना जाता है. सभी क्षेत्रों में सबसे आगे रहकर पूरे समाज के साथ-साथ देश के लिए गर्व और सराहनीय महिलाओं की सफलता की हमेशा प्रशंसा की जाती है, उनका गौरव किया जाता है. इसके बावजूद केवल हिन्दू धर्म, संस्कृति और परंपराओं पर हमले देखने मिलते हैं.

कुछ ऐसा ही एक कपड़ों के ब्रांड के विज्ञापन में देखने को मिला. बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने विज्ञापन में हिन्दू विवाह समारोह ‘कन्यादान’ पर कमेंट किया है. विज्ञापन में आलिया भट्ट को दुल्हन के रूप में तैयार किया गया है और कन्यादान की परंपरा पर सवाल उठाया गया है. इसमें आलिया भट्ट सवाल करती हैं कि मैं क्या कोई दान की चीज हूं? विज्ञापन में उसने कन्यादान की जगह कन्यामान की बात कही है. आलिया भट्ट बताती हैं कि परिवार का हर सदस्य उनसे कितना प्यार करता है. वह शादी में होने वाले कन्यादान पर सवाल उठाते हुए कहती हैं कि उन्हें पराया धन कहा जाता है. लड़कियां दान करने की चीज हैं क्या. क्यों सिर्फ कन्यादान. नया आइडिया कन्यामान.

हिन्दू धर्म की नींव 16 प्रमुख संस्कारों पर टिकी है. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण विवाह संस्कार भी है. इस संस्कार में कई रस्में होती हैं, जिसके बाद वर और वधु सात जन्म के बंधन में बंध जाते हैं. विवाह संस्कार में सबसे महत्वपूर्ण रस्म कन्यादान होती है. हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार विवाह संस्कार में दूल्हे को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है. जब कन्या का पिता रीति रिवाजों का पालन करते हुए अपनी कन्या का हाथ वर के हाथों में सौंपता है, तो वर कन्या के पिता को आश्वासन देता है कि वो उनकी बेटी का पूरा ख्याल रखेगा. उनकी बेटी की सभी जिम्मेदारियां उठाएगा. इस संस्कार को ही कन्यादान कहते हैं. कन्यादान को महादान माना गया है. सीधे शब्दों में समझें तो इससे बड़ा कोई दान नहीं हो सकता. कन्यादान के बिना विवाह संपन्न नहीं माना जाता है.

दुनिया में किसी अन्य धर्म ने महिलाओं को उतना सम्मान नहीं दिया जितना हिन्दू धर्म में दिया जाता है. हिन्दू धर्म में नारी को देवी का स्थान दिया गया है. उसकी पूजा की जाती है. पत्नी के बिना धार्मिक संस्कार शुरू नहीं हो सकते. इसके बावजूद इन तथाकथित लोगों द्वारा हिन्दुओं को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है. हलाला और ट्रिपल तलाक जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ कोई विज्ञापन नहीं बनता. लेकिन हिन्दू परंपराओं के खिलाफ खूब बोला जाता है.

यह विज्ञापन धार्मिक प्रथाओं की गलत व्याख्या करता है, धार्मिक प्रथाओं का अपमान करता है और हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करता है. आवश्यक है कि विज्ञापन, फिल्म, या अन्य कार्यक्रम करते समय समाज की भावनाओं का सम्मान किया जाए.

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