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‘The Sangh and Swaraj’ – पंजाबी में अनुवादित पुस्तक का विमोचन

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चंडीगढ़. विभाजन के समय अपने हिन्दू और सिक्ख भाइयों को बचाने के लिये अपने घर, परिवार और जान गंवाने वाले हजारों गुमनाम स्वयंसेवकों को समर्पित रतन शारदा जी द्वारा लिखित ‘The Sangh and Swaraj’ के पंजाबी अनुवाद का विमोचन शिनवार को संपन्न हुआ. पुस्तक का विमोचन पंजाब की प्रसिद्ध लोकगायिका सुखी बराड़ द्वारा किया गया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंजाब प्रांत के सह बौद्धिक प्रमुख एडवोकेट बरजिंदर सिंह जी भी मंच पर उपस्थित थे.

पुस्तक में आजादी से पहले संघ की आजादी के संग्राम में भूमिका पर प्रकाश डाला गया है. पुस्तक का अनुवाद विद्या भारती पंजाब के प्रचार विभाग द्वारा किया गया है. अनुवाद की योजना पर विद्या भारती पंजाब के प्रचार प्रमुख सुखदेव ने बताया कि अनुवाद की योजना उत्तर क्षेत्र प्रचारक बनवीर सिंह जी और रतन शारदा जी की बैठक में हुई! उसके बाद प्रांत प्रचारक प्रमोद जी और विद्या भारती के उत्तर क्षेत्र के संगठन मन्त्री विजय नड्डा जी के निरंतर मार्गदर्शन और उत्साह वर्धन से पुस्तक का अनुवाद संपन्न हुआ.

उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मन्त्री सोम प्रकाश जी ने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी बचपन से ही आजादी के आंदोलन के साथ जुड़े हुए थे. वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर जी ने लिखा है – वर्तमान समय में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की चुनौती को पार पाना सांस्कृतिक, चरित्रवान और देश भक्त समाज द्वारा ही संभव है और इन गुणों की उत्पत्ति का साधन अपना संघ और संघ की शाखा ही है.

सुखी बराड़ जी कहा कि आजादी के संग्राम में संघ और उसकी गतिविधियों के बारे में जानने के लिये यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिये. शुभ विचार और सहनशीलता के साथ राष्ट्रहित में आगे बढ़ना ही संघ का उद्देश्य है. उन्हें ऐसा लगता है कि गुरू नानक देव जी कि उदासियों और महात्मा बुद्ध जी से भी संघ को प्रेरणा प्राप्त हुई है.

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