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संघ के स्वयंसेवक कर्तव्य भाव से अनेक सेवा कार्य कर रहे हैं – दत्तात्रेय होसबाले जी

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विजयपुर, कर्नाटक. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि हम सब एक ही परिवार के सदस्य हैं. सारा देश और समाज एक घर है. वसुधैव कुटुंबकम की भावना का पूरे समाज में निर्माण करने के लिये संघ कार्य कर रहा है. हम भारतीय लोग पूरे विश्व को परिवार मानते हैं.

सरकार्यवाह जी 19 दिसंबर, 2022 (सोमवार) को कर्नाटक उत्तर प्रांत के विजयपुर नगर में महात्मा गांधी कॉलोनी में कुष्ठ रोगी बंधुओं के लिए सेवाभारती और लोकहित ट्रस्ट द्वारा सेवा परियोजना ‘संवेदना’ नित्य अन्नदान सेवा के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे.

सरकार्यवाह जी ने कहा कि “परिवार में हर एक का सुख-दुःख, उस परिवार के सभी का सुख-दुःख है. समाज में दुःख दूर करने का काम संघ करता आ रहा है और आगे भी करता रहेगा. इस कार्य को प्रदेश में श्री वेंकटेश गुरुनाथ जी ने बहुत पहले से प्रारंभ किया था.

शंकर का अर्थ है शिव, ‘माता पार्वती देवी, पिता देवो महेश्वरः’, अर्थात शिव सारी दुनिया का पिता है और माता पार्वती देवी. इसलिए सारे शिवभक्त बंधु हैं “बान्धवा शिवभक्ताच”. हम भारतीयों की कल्पना है कि ‘स्वदेशो भुवनत्रयः’, तीनों लोक ही हमारा देश-कुटुंब-समाज हैं. ‘हम एक ही कुटुंब के हैं’, इस भावना के साथ कार्य करते हुए आगे बढ़ना है. ये सेवा और कर्तव्य का कार्य है, यह सहज कार्य है.

उन्होंने कहा कि ये कुष्ठ रोगी नहीं, बल्कि कुष्ट बंधु हैं, देश निष्ठा बंधु हैं. घर में जैसे अनारोग्य पीड़ित की सेवा होती है. वैसे ही समाज में जो वृद्ध-रोगी-दुखी हैं, उनकी भी सेवा करनी चाहिए. उन का भी जीवन गौरवपूर्ण बने, ऐसा हमारा प्रयास है. अनाथ कोई नहीं है, सबकी व्यवस्था समाज को करनी चाहिए. हर एक का दुःख, कष्ट दूर हो, ऐसी भावना से ही कोरोना काल में सभी मनुष्यों ने अपना-अपना कर्तव्य निभाया.

श्री वेंकटेश गुरुनाथ जी जो कार्य कर रहे थे, वो हमारे लिये प्रेरणा है. उनका सपना भी यही था कि समाज ऐसा कार्य करे, कि उनका सपना साकार हो. सभी को अन्न-वस्त्र-औषधी ठीक तरह से प्राप्त होने के लिए समाज को काम करना चाहिए. कर्तव्य भाव से ऐसे बहुत सारे कार्य संघ के स्वयंसेवक  कर रहे हैं. सेवा कार्य में लगे बंधुओं के परिवार के सदस्य भी सेवाव्रती हों, ऐसा वातावरण बने.

शंकर भगवान की कृपा हम सभी को मिले. सभी आनंद से रहें, परस्पर सहयोग-सहकार की भावना मन में रखकर जिना है. हम सब एक ही माता-पिता की संतान यह मानकर जीना है.

कार्यक्रम में दक्षिण मध्यक्षेत्र के संघचालक, क्षेत्र कार्यवाह, क्षेत्र प्रचारक, सह क्षेत्र प्रचारक, प्रांत संघचालक, सह प्रांत संघचालक व अन्य उपस्थित रहे.

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