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समाज को दुर्बल करने वाली शक्तियों से राष्ट्र का संरक्षण करना है – भय्याजी जोशी

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कोटा. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भय्याजी जोशी ने कहा कि हमें सद्गुणों से युक्त हिन्दू समाज बनाना है. समाज को दुर्बल करने वाली शक्तियों से राष्ट्र का संरक्षण करना है. जाति, प्रदेश, क्षेत्र केवल व्यवस्थाएं हैं, लेकिन हमारी प्रतिबद्धता राष्ट्र के साथ है. हमारे ग्रंथों में सब कुछ लिखा है, लेकिन वह आचरण में लाने की जरूरत है.

हिन्दू समाज में प्रतिदिन उत्सव है. किंतु संघ संस्थापक जी ने कुछ उत्सव टोली के साथ तय किये जो हमारे कार्य के विचारों को आगे ले जाने वाले हैं. नव वर्ष का यह दिन कुछ संकल्प लेकर मनाना चाहिए, आने वाला समय कैसा हो? हिन्दू समाज कैसा होगा ? इन सब बातों पर विचार करना चाहिए. इसी दिन डॉक्टर जी का योगायोग से जन्मदिन भी है, इसलिए उनका स्मरण होना स्वाभाविक है. डॉ. जी का जीवन स्वयंसेवकों को ऊर्जा प्रदान करने वाला है.

भय्याजी जोशी रविवार को कोटा महानगर की ओर से स्वामी विवेकानंद स्कूल परिसर में आयोजित वर्ष प्रतिपदा उत्सव तथा नववर्ष समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि संघ की शाखा के माध्यम से देशभक्त, अच्छे हिन्दू व अच्छे नागरिक बनाने का कार्य किया जा रहा है. डॉ. हेडगेवार ने नया कुछ शुरू नहीं किया, बल्कि युगों की परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निर्माण के साथ शुरू किया.

उन्होंने कहा कि आक्रमणों के बाद भी हिन्दू समाज का खड़ा रहना यह हमारी परंपरा का जीवन्त उदाहरण है. विचार, सिद्धांत व तत्वज्ञान के साथ चलने वाला व्यक्ति व समाज चाहिए. इसमें आयु, शिक्षा, आर्थिक व सामाजिक स्तर कुछ भी हो सकता है, किंतु वैचारिक प्रतिबद्धता एक साथ होकर समाज को संगठित करने का आधार है.

उन्होंने कहा कि जो धर्म को समझता है, ऐसे लोग कम नहीं है. जो धर्म को समझाने वाले हैं, ऐसे लोग भी कम नहीं है, लेकिन धर्म का आचरण अपने जीवन में करने वाले कितने हैं, वही भगवान को सबसे प्रिय हैं. सज्जन, सक्रिय, विचार संगठन के प्रति समर्पित करने वाले जीवन के साधन बनने वाला स्वयंसेवक चाहिए. इस दिशा में हम प्रेरित होकर आगे बढ़ें. मैं उज्ज्वलता का स्वप्न साकार करने वाला स्वयंसेवक बनूंगा, ऐसा विचार मन में रखकर आगे बढ़ें और निर्दोष समाज का निर्माण करें.

प्रत्येक स्त्री को माता के समान मानने से स्त्री जाति पर अत्याचार से मुक्ति, दूसरे के धन को मिट्टी के ढेले के समान मानने से अनावश्यक वित्त संग्रह की मनोवृति से मुक्ति, जिससे भ्रष्टाचार का समूल नाश व सभी प्राणियों में स्वयं की आत्मा का ही दर्शन करने से जातिवाद की संकुचित भावना की समाप्ति, उपर्युक्त आचार्य चाणक्य के विचार को अंगीकार करेंगे तो निश्चित रूप से समाज में व्याप्त सभी प्रकार के अपराध, भ्रष्टाचार, जातिवाद से मुक्ति और स्वयं को ही श्रेष्ठ मानने की कुत्सित मानसिक वृत्ति का नाश हो सकेगा. और समाज की “दृष्टि” शुद्धता, सात्विकता और आत्मा की शुचिता से युक्त होकर परिष्कृत हो सकेगी.

मधुर स्वरलहरियों से गूंजा आसमान

कार्यक्रम में भावगीत की प्रस्तुति दी गई. इसके बाद घोष वाद्यों से मधुर स्वर लहरियों के बीच भगवा ध्वज फहराया गया. घोष के आणक, वंशी, बैंड, झांझ तथा बिगुल द्वारा ध्वज वंदन, ध्वज अवतरण सहित कर्ण प्रिय रचनाओं का वादन किया गया.

संघ की कार्यपद्धति के अनुसार वर्ष में एक बार संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार को पूर्ण गणवेश में ‘आद्य सरसंघचालक प्रणाम’ किया जाता है. चित्र पर माल्यार्पण करने के बाद आद्य सरसंघचालक प्रणाम किया गया. उत्सव की शुरूआत में घोष की धुन पर ‘‘केशव’’ रचना का वादन किया गया.

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