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विहिप केंद्रीय प्रबंध समिति की दो दिवसीय बैठक कांचीपुरम में प्रारंभ

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विश्व हिन्दू परिषद की केंद्रीय प्रबंध समिति की दो दिवसीय बैठक (25, 26 जून) आज कांचीपुरम में प्रारंभ हुई. बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भय्याजी जोशी, विहिप के केंद्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार सहित संत व पदाधिकारी उपस्थित हैं.

बैठक के उद्घाटन सत्र के पश्चात आलोक कुमार ने बैठक के संबंध में मीडिया को जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर के मूल स्थान और मथुरा में श्रीकृष्ण के जन्म स्थान पर अपने दावों के प्रति हिन्दू समाज दृढ़प्रतिज्ञ है. विश्व हिन्दू परिषद इसके लिए देश के कानून और संविधान के अंतर्गत शांतिपूर्ण संघर्ष करेगी. अभी दोनों मामले माननीय न्यायालयों में हैं, इसलिए उचित यही रहेगा कि दोनों पक्ष विधिक निर्णय की प्रतीक्षा करें.

उन्होंने कहा कि दो लोगों के बयानों की प्रतिक्रिया में हाल ही में देश भर में धार्मिक उन्मादियों द्वारा की गई हिंसा और निजी संपत्ति, पुलिस कर्मियों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की विश्व हिन्दू परिषद घोर निंदा करती है. दोनों के विरुद्ध कई एफआईआर हो चुकी हैं, फिर भी कुछ उन्मादी नेता शत्रु देश और भारत विरोधी कुछ समूहों के दुष्प्रचार के उकसावे में आकर कानून को अपना काम नहीं करने देना चाहते. वे दोनों लोगों के गले काटने और आंखें फोड़ने की धमकियां दे रहे हैं. उपद्रवी समूह हिन्दुओं की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं तथा सड़कों पर हिंसा और उत्पात कर रहे हैं. विश्व हिन्दू परिषद ऐसे सभी नृशंस कृत्यों की निंदा करती है और विभिन्न राज्य सरकारों से आशा करती है कि वे अपराधियों से कड़ाई से निपटेंगी और उन्मादियों के शिकार बने हिन्दुओं को न्याय दिलाएंगी. विश्व हिन्दू परिषद आह्वान करती है कि हिन्दू समाज अपने अधिकारों के लिए जागृत हो और हिंसा का विरोध करे, आवश्यकता पड़ने पर आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करे. भारत संविधान से चलता है, शरिया कानून से नहीं. कोई उन्मादी व्यक्ति या भीड़ किसी को दोषी ठहरा कर सजा नहीं सुना सकती.

हिन्दू मंदिर सरकारी नियंत्रण से बाहर हों

खेद का विषय है कि कुछ राज्य सरकारें हिन्दू मंदिरों की व्यवस्था नियंत्रित कर रही हैं. विश्व हिन्दू परिषद का मानना है कि यह प्रवृत्ति ब्रिटिश राज में शुरू हुए औपनिवेशीकरण को आज भी लागू रखने जैसी ही है. हिन्दू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने और उनका प्रबंधन व्यापक हिन्दू समाज के हाथ में देने के अपने आंदोलन को तेज करेंगे. हिन्दू मंदिरों की धन-संपदा हिन्दू मंदिरों को चलाने और हिन्दुओं से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों पर ही व्यय होनी चाहिए. सरकारों को अपना प्रशासकीय व्यय मंदिरों के धन से नहीं चलाना चाहिए.

हिन्दू स्मारकों का संरक्षण और सेवा गतिविधियों का विस्तार

विश्व हिन्दू परिषद हिन्दू स्मारकों के संरक्षण के प्रयासों की गति बढ़ाएगी, ताकि हिन्दू परिवारों में उनके सम्मान की परंपरा सुदृढ़ रहे. परिषद इसके लिए नई पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी, ताकि वह किन्हीं बाहरी शक्तियों के व्यवधान में न फंस कर धर्म का पालन करती रहे. विश्व हिन्दू परिषद जातीय भावना दूर कर हिन्दू समाज को जोड़ने और संरक्षित रखने वाले अपने सेवा प्रकल्पों का विस्तार करेगी, ताकि संपूर्ण समरसता का वातावरण बन सके.

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