करंट टॉपिक्स

उत्तराखंड – जबरन धर्मांतरण पर सख्त हुई सजा; 10 साल की सजा व 50 हजार जुर्माने का प्रावधान

Spread the love

देहरादून. विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन महिला क्षैतिज आरक्षण और धर्मांतरण विरोधी विधेयक सदन में पास किए गए. जल्द ही इन्हें लागू करने के लिए अधिसूचना जारी होने की संभावना है. उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक 2022 के तहत जबरन धर्मांतरण के दोषी को 10 साल तक की सख्त सजा का प्रावधान किया गया है. उत्तराखंड सरकार ने राजकीय सेवाओं में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ, उस महिला अभ्यर्थी को मिलेगा, जिसका मूल अधिवास उत्तराखंड में है.

जबरन धर्मांतरण पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान

उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए बुधवार को विधानसभा में उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक 2022 को पारित कर दिया गया. राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह अधिनियम बन जाएगा. इसके तहत जबरन धर्मांतरण के दोषी को 10 साल तक की सख्त सजा का प्रावधान किया गया है.

इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करता है तो उसे जिलाधिकारी को अर्जी देनी होगी. धर्म परिवर्तन करने की अर्जी देने के 21 दिन के भीतर संबंधित व्यक्ति को डीएम के समक्ष पेश होना पड़ेगा. इसके अलावा जबरन धर्मांतरण की शिकायत कोई भी व्यक्ति दर्ज कर सकता है. डीएम की ओर से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति की पूरी जानकारी सूचना पट्ट पर प्रदर्शित करनी होगी. यदि कोई व्यक्ति अपने ठीक पूर्व धर्म में परिवर्तन करता है तो उसे कानून में धर्म परिवर्तन नहीं समझा जाएगा. ठीक पूर्व धर्म का मतलब यह है कि उस व्यक्ति की आस्था, विश्वास और जिसके लिए स्वेच्छा व स्वतंत्र रूप से अभ्यस्थ था.

विधेयक में जबरन धर्मांतरण पर सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान है. कानून अस्तित्व में आते ही जबरन धर्मांतरण गैर जमानती अपराध हो जाएगा. सामूहिक धर्मांतरण में दोष साबित होने पर 3 से 10 साल की सजा और 50 हजार जुर्माना किया जाएगा. जबकि, एक व्यक्ति के धर्मांतरण पर 2 से 7 साल की सजा 25 हजार जुर्माना होगा.

सरकार ने संशोधन विधेयक में जबरन धर्मांतरण पर सजा की अवधि बढ़ाई है. साथ ही पीड़ितों को कोर्ट के माध्यम से पांच लाख रुपये की प्रतिपूर्ति की जाएगी. कानून अस्तित्व में आते ही प्रदेश में धर्मांतरण का कानून अब संज्ञेय व गैर जमानती अपराध की श्रेणी में आएगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है, यहां पर धर्मांतरण जैसी चीजें हमारे लिए बहुत घातक हैं. इसलिए सरकार ने यह निर्णय लिया था कि प्रदेश में धर्मांतरण पर रोक के लिए कठोर कानून बने. राज्य सरकार का प्रयास है कि इस कानून को पूरी दृढ़ता से प्रदेश में लागू किया जाएगा.

महिलाओं के क्षैतिज आरक्षण विधेयक को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड निर्माण में मातृशक्ति का बहुत बड़ा योगदान है और सरकार ने यह पहले ही तय किया था कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस प्रदेश में मातृशक्ति का सम्मान करते हुए उन्हें इस क्षैतिज आरक्षण का लाभ मिले. महिलाओं के लिए राज्याधीन सेवाओं में क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था देने करने यह अधिनियम मातृशक्ति को समर्पित है.

Leave a Reply

Your email address will not be published.