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संकट में स्वयंसेवकों ने खरीदी किसानों की फसल, बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध करवाई

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रांची. कोरोना संकट काल के दौरान सेवा भारती, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विद्यार्थी परिषद व अन्य संगठनों ने सेवा कार्यों के माध्यम से जरूरतमंदों की सहायता की. घर-घर सूखा राशन देने के साथ ही भोजन पैकेट का वितरण किया. कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए दवा, ऑक्सीजन सिलेंडर, कोविड केयर सेंटर, हेल्पलाइन, चिकित्सकीय परामर्श तक की व्यवस्था की.

कोरोना के बढ़ते संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए सरकार ने लॉकडाउन किया तो किसानों के समक्ष सैकड़ों एकड़ खेत में लगी फसलों को बेचने की समस्या उत्पन्न हो आई. मुनाफा की बात तो दूर, लागत मूल्य तक निकालना मुश्किल हो गया.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों को जानकारी मिली तो किसानों की समस्या के समाधान में जुट गए. किसानों से उनकी फसल खरीद ली. स्वयंसेवकों ने एक हिस्सा सेवा बस्तियों में जरूरतमंदों को वितरित किया, दूसरा हिस्सा महज परिवहन शुल्क निकालकर उसे उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर उपलब्ध कराया. स्वयंसेवकों की पहल से किसानों को फायदा तो हुआ ही, उपभोक्ताओं को भी अपेक्षाकृत सस्ती सामग्री मिली.

किसानों से तरबूज खरीदने की पहल सबसे पहले हजारीबाग में शुरू हुई. हजारीबाग के चूरचू गांव से छह टन तरबूज की खरीदारी की. हजारीबाग के ओपनी, गाड़ीखाना, पतरातू व कदमा बस्ती में इसका वितरण किया. इसके बाद दूसरे जिलों में भी इस अभियान को चलाया गया.

इसी बीच अभाविप के ‘अपनों के लिए पहल’ अभियान के तहत रांची विश्वविद्यालय छात्र संघ के उप सचिव सौरभ कुमार साहू ने खूंटी जिले के किसानों से 1000 टन तरबूज की खरीदारी कर स्थानीय बाजार से लेकर बिहार और ओडिशा तक पहुंचाया.

1500 गाड़ी आम की हो चुकी है खरीदारी

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के कार्यकर्ता अब किसानों से आम खरीदकर उनकी आर्थिक स्थिति को समृद्ध कर रहे हैं. राज्य के विभिन्न जिलों से अब तक 1500 गाड़ी (प्रति गाड़ी 2500 किलो) आम की खरीदारी कर उसे बाहर के प्रदेशों में भेजा जा चुका है. आम खरीदने का सिलसिला अभी भी जारी है. अभाविप की पहल से किसानों को घर बैठे ही उनके उत्पाद की उचित कीमत मिल रही है.

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