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तूफान के पश्चात प्रभावितों की सेवा में जुटे स्वयंसेवक

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राजकोट. “तउते” तूफान ने सौराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों में तबाही मचाई है. गनीमत यह कि सजगता के कारण जानमाल का नुकसान नहीं हुआ. 17 अप्रैल की रात को समुद्र तट से सटे गिर, सोमनाथ – अमरेली – भावनगर जनपदों के उना – महुवा – जाफराबाद आदि तटवर्ती तहसीलों में तबाही का मंजर रहा. करीब सत्रह हजार (17000) घर नष्ट हो गए हैं, हजारों बांधव बेघर हुए हैं. हजारों पेड़ उखड़ गए, नौ हजार किमी की बिजली लाईन नष्ट हो गई.
इस विपदा काल में कोरोना का भी खतरा बरकरार है. ऐसे समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व सेवा भारती के स्वयंसेवक प्रभावित लोगों के चाय-नाश्ते, भोजन, आवास, शुद्ध पेयजल, की व्यवस्था में 18 अप्रैल सुबह से ही जुट गए हैं.
वर्तमान संकट को देखते हुए ऑक्सीजन व अन्य आपूर्ति को देखते हुए सड़क मार्ग बाधित न हो, इसलिए प्रशासन के साथ मिलकर रास्तों से पेड़ हटाने के कार्य में भी स्वयंसेवक लगे हैं.
तूफान के पश्चात वापिस अपने घर लौट रहे लोगों के पुनर्वसन के लिए राशन किट व अन्य सामग्री का वितरण किया जा रहा है. सेवा व राहत कार्य कल प्रातः से नियमित चल रहा है तथा प्रांत के अन्य स्थानों से (जो तूफान से प्रभावित नहीं हैं) प्रभावित क्षेत्रों में सहायता पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है.
 
क्षेत्र प्रचारक अतुल जी लिमये ने प्रांत के प्रमुख कार्यकर्ताओं से मिलकर राहत व सेवा कार्य पर आगे और क्या किया जा सकता है, इसे लेकर चर्चा की और मार्गदर्शन किया.

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