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अंतरधार्मिक विवाह को बढ़ावा देने के मामले में कल्याण अधिकारी निलंबित

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देहरादून. एक पत्र को लेकर अंतरधार्मिक विवाह को प्रोत्साहन देने के मामले में विवादों में घिरे टिहरी गढ़वाल के समाज कल्याण अधिकारी को आखिरकार सरकार ने हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं. 18 नवम्बर को टिहरी के जिला समाज कल्याण अधिकारी ने एक पत्र जारी किया था. जिसमें अंतरजातीय और अंतरधार्मिक (लव जिहाद) विवाह करने पर समाज कल्याण विभाग की तरफ से प्रोत्साहन के रूप में पचास हजार रुपये की धनराशि दिए जाने का उल्लेख किया गया था. जिसके बाद ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देने के आरोप लगे थे. इस प्रकरण को लेकर सोशल मीडिया में हो हल्ला मचने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रशासन को मामले की जांच के आदेश दिए थे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मजहबी उद्देश्यों और धर्मांतरण को बढ़ावा देने वाली शक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है.

समाज कल्याण अधिकारी की इस प्रेस रिलीज के सामने आने के बाद उत्तराखंड सरकार के आर्थिक सलाहकार आलोक भट्ट ने बताया था कि ये 1976 का उत्तराखंड का क़ानून है. इस योजना के तहत पहले 10,000 रुपये की सहायता राशि मिलती थी, जिसे कांग्रेस की सरकार ने 2014 में बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया था. उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा से किसी ने भी अंतरधार्मिक विवाह को बढ़ावा देने की बात नहीं की है.

जब सरकार पूरी तरह जबरन धर्मान्तरण के बाद शादी के खिलाफ है, तो किन परिस्थितियों में ये प्रेस रिलीज जारी हुआ? इसके साथ ही इस योजना को अंतरधार्मिक के बजाय अंतरजातीय विवाह तक सीमित करने के भी आदेश जारी किए गए हैं.

उत्तराखंड राज्य ने वर्ष 2018 में ही ‘फ्रीडम ऑफ रिलीजन बिल’ पारित किया था. इसके तहत रुपयों के दम पर या किसी का जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने का दोषी पाए जाने पर दो साल तक की जेल का प्रावधान है.

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