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योग, भारत के ऋषि-मुनियों द्वारा प्रदत्त ‘प्रसाद’ – भय्याजी जोशी

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जयपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भय्याजी जोशी ने कहा कि वर्तमान काल खंड में केवल भारत ही नहीं सारा विश्व संकट से गुजर रहा है. इस संकट से मुक्ति के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयास हो रहे हैं. भारत के मनीषियों ने चिंतन और प्रयोग करते हुए एक अष्टांग योग पद्धति का विकास किया. भारत के ऋषियों ने योग का विषय हमें एक प्रसाद के रूप में दिया है, इसे ग्रहण करते हुए अपने जीवन में स्थान मिलना चाहिए.

भय्याजी जोशी सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जयपुर प्रांत, क्रीड़ा भारती व विभिन्न योग संगठनों द्वारा आयोजित सात दिवसीय ऑनलाईन योग शिविर समापन कार्यक्रम में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि योग से मनुष्य जीवन भर स्वस्थ रहते हुए आनंद का अनुभव करता है. भारत में रहने वाले सामान्य व्यक्ति से लेकर कई महान व्यक्तियों ने इस सिद्धांत को समझ कर अपने जीवन में उतारा है. अंत तक जीवन में प्रसन्न और सुखी रहें, यह हमारा इतिहास बताता है.

उन्होंने कहा कि पंच पुरुषार्थ पर मनुष्य के विकास की दृष्टि भारत में रखी गई है. उसका प्राथमिक स्तर पंच महाभूत से निर्मित हमारा शरीर है. शरीर यह रोग मुक्त और स्वस्थ रहे, सब प्रकार की प्रतिकूलता में अपने आप को सुरक्षित रखें, इसके लिए व्यायाम, आसन इत्यादि का मार्ग बताया है. मनुष्य के शरीर की आंतरिक रचना में नाड़ी संस्थान है, उसका भी ठीक से संचालन होना शरीर की आवश्यकता है. इसलिए प्राण संचार की अंदर की संरचना को ठीक रखने के लिए आसन पर्याप्त नहीं है. नित्य प्राणायाम और श्वसन से जुड़े व्यायाम भी आवश्यक है. इसलिए जब आसन और प्राणायाम दोनों होते हैं तो शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ रहता है. इसके आगे पंचकोष में मन और आत्मा की बात कही गई है. स्वस्थ शरीर का संचालन करने वाला नाड़ी संचालन ठीक रहे, इस पर ही व्यक्ति का आगे का भविष्य निर्भर करता है.

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने भी संबोधित किया. उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए योग भी एक आधार है. पूरा विश्व इसे मान रहा है, इसलिए 21 जून को योग दिवस की मान्यता मिली है. योग द्वारा प्राण मजबूत होते हैं, जिससे व्यक्ति भयमुक्त होता है.

कोरोना काल के बाद तनाव नियंत्रण विषय पर प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. शिव गौतम ने कहा कि कोरोना को हराने के लिए सकारात्मक सोच आवश्यक है. उन्होंने खुद का अनुभव साझा करते हुए कहा कि “मैं कोरोना के कारण 51 दिन आइसीयू में रहा, मैंने भगवत गीता और ऋग्वेद का अध्ययन किया.”

उल्लेखनीय है कि सात दिवसीय योग शिविर में प्रातः 6:30 व सायंकाल 4:00 बजे सहित दो सत्रों का प्रतिदिन आयोजन हुआ. जिसमें निर्धारित पाठयक्रम अनुसार विभिन्न संस्थाओं के योग गुरु- आचार्यों द्वारा लगभग 30 मिनट योग व 15 मिनट में किसी एक विषय पर प्रबोधन दिया गया.

क्रीड़ा भारती के राजस्थान प्रदेश संयोजक मेघ सिंह ने बताया कि योग सत्रों का विश्व संवाद केन्द्र, जयपुर के यू ट्यूब चैनल और फेसबुक पेज पर सजीव प्रसारण किया गया. यू ट्यूब चैनल के माध्यम से 12 हजार परिवारों ने प्रतिदिन योगाभ्यास किया. योग शिक्षकों में कुलभूषण बैराठी- पतजंली योग, शेखर शर्मा- एस.व्यासा, सीमा शर्मा- गायत्री परिवार, दीपक मिश्रा- आर्ट आफ लिविंग, ढाका राम- योगापीस, उमेश व हेमलता शर्मा- योगस्थली सोसायटी, रमाकांत मि़श्रा-राज.वि.विद्यालय, रश्मि शर्मा- योग भवन आदि प्रमुख रहें. इन सत्रों में कोरोना के बाद देखभाल व आयुर्वेदिक उपायों, मुद्रा विज्ञान, श्वसन क्रियाएं, चक्र विज्ञान, योगमय दिनचर्या, सूर्यनमस्कार, तनाव नियन्त्रण व आहार विहार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई.

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