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नई दिल्ली। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भारतीय संसद के दोनों सदनों में पारित वक्फ संशोधन विधेयक का स्वागत किया है। विधेयक वक्फ से जुड़े कई विवादों को न्यायसंगत प्रक्रिया के साथ समाप्त करने में सहायक होगा तथा वक्फ काउंसिल में महिलाओं को शामिल किए जाने से इसे अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं प्रामाणिक बनाया जा सकेगा। वक्फ संपत्तियों के ऑडिट और पंजीकरण को अनिवार्य करने तथा सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा हेतु निश्चित किए प्रावधान भी सराहनीय हैं, इससे कानून को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
वक्फ संशोधन विधेयक के अंतर्गत वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए छह महीने के भीतर उनका ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिससे सरकार को उनकी ऑडिट और निगरानी का अधिकार मिलेगा, जिससे कानून के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। विविधता और निष्पक्षता एवं साथ ही निर्णयों में मतों की व्यापकता सुनिश्चित होगी। वक़्फ़ संशोधन विधेयक के अनुसार केवल दान में प्राप्त संपत्तियों को ही वक्फ संपत्ति माना जाएगा और बिना दस्तावेज एवं सर्वेक्षण के किसी संपत्ति पर वक्फ का दावा नहीं किया जा सकेगा।
विद्यार्थी परिषद ने आशा व्यक्त की कि संविधान की मूल भावना के अनुरूप, वक़्फ़ संशोधन कानून सर्वसमावेशी, न्यायसंगत एवं वक़्फ़ प्रबंधन में पारदर्शिता को सुनिश्चित करेगा। इसके अतिरिक्त, सरकारी संपत्तियों पर वक्फ के दावे की जांच वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कराई जाएगी और यदि दावा गलत पाया जाता है, तो वह संपत्ति राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज कर दी जाएगी, इससे विवाद की स्थिति में नैतिक एवं प्रामाणिक रूप से सर्वसम्मत निर्णय लेने में सहायता मिलेगी। विधेयक में वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसलों को उच्च न्यायालय तक चुनौती देने की अनुमति एवं अवसर दिया गया है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और व्यक्तिगत अधिकारों को भी बल मिलेगा। संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से पारित यह दीर्घ एवं बहुप्रतीक्षित न्यायिक संशोधन लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की ओर एक और सशक्त कदम है।
राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया वक्फ संशोधन विधेयक भारत के समग्र विकास में निष्पक्षता के लिए आवश्यक है। पूर्व के वक्फ कानून को लेकर विभिन्न विवाद एवं चुनौतियाँ सामने आती रही हैं, जिन्हें इस नवीन विधेयक के माध्यम से निष्पक्षता के साथ निश्चित रूप से हल किया जा सकेगा। समस्त भारतीय नागरिकों को इस नवीन कानून को व्यापकता एवं पूर्व के कानून के साथ तुलनात्मक रूप से अध्ययन करना चाहिए एवं तथ्यात्मक समझ के साथ ही विचार मंथन करना चाहिए। अभाविप, सरकार द्वारा पारदर्शिता और न्यायिक सुधार की दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम की सराहना करती है और इसे भारतीय समाज में समानता एवं समावेशिता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानती है।