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सिर्फ बैंक के लेनदेन पर टैक्स से संभव है अर्थक्रांति ?

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Akhil Bharatiya Grahak Panchayatजबलपुर. नागपुर के चार्टेड एकाउंटेंट श्री अतुल देशमुख का सुझाव है कि सीमा शुल्क को छोड़कर देश के समस्त 71 प्रकार के करों को समाप्त कर सिर्फ बैंक-लेनदेन पर 2 प्रतिशत कर लगा कर इतना अधिक राजस्व एकत्र किया जा सकता है जितना वर्तमान कर प्रणाली से प्राप्त नहीं होता. अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत जबलपुर द्वारा 19 अगस्त को होम साइंस कालेज प्रेक्षागृह में अर्थक्रांति विषय पर अपने व्याख्यान में श्री देशमुख ने कहा कि वर्तमान कर प्रणालियों के कारण अपवंचित कर जहां  भ्रष्टाचार, अराजकता और आतंकवाद को जन्म देता है वहीं, देश की आर्थिक स्थिति को खोखला करता है.

पांच बिन्दुओं के माध्यम से देश की कमजोर आर्थिक स्थिति को निरंतर सुदृढ़ करने हेतु प्रोजेक्टर के माध्यम से अपनी प्रस्तुति में उन्होंने बताया कि सरकार को देश में 50 रुपये से बड़े नोट बंद कर देने चाहिये. उनका मानना है कि जब 50 रुपये से बड़े नोट बंद हो जायेंगे तो नकद लेनदेन की जगह बैंकिंग ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिलेगा. फलस्वरूप, कालेधन पर भी अंकुश लगेगा, नकली नोटों की समस्या के समाधान के साथ ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा. उन्होंने बताया कि  1000 रूप्ए की छपाई खर्च मात्र 4.6 पैसे आता है वहीं 500 रूपये के नोट छापने में 3.85 पैसे खर्च होते है. इसी का लाभ नकली नोट छापने वाले उठाते है. जबकि 50 रुपये का एक नोट छापने में 3.99 पैसे खर्च होते हैं.

अतुल देशमुख ने कहा कि समृद्ध भारत-निर्माण के मार्ग में बेरोजगारी, अपराध, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, कालाधन जैसी अनेक रुकावटें हैं. ऐसी अनेक सामाजिक समस्याओं का मूल भारत की आर्थिक दुरावस्था है. इसके लिये मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं दोषपूर्ण कर प्रणाली और दुर्बल बैंक व्यवस्था. उन्होंने कहा कि उसमें बदलाव करने से अर्थव्यवस्था के कई प्रश्न हल हो सकते हैं.

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री रविन्द्र बाजपेयी (हिन्दी एक्सप्रेस) द्वारा की गयी. कार्यक्रम में उपस्थित अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के राष्ट्रीय सह-सचिव दिनकर सबनीस (नागपुर), प्रांतीय अध्यक्ष रमेश गुप्ता, प्रांत संगठन मंत्री सूर्यकांत गौतम, संतोष गोडबोले, मंच का संचालन व्ही.एन. मिश्रा के व्दारा किया गया. ग्राहक गीत पुरुषोत्तम शर्मा द्वारा लिया गया, अतिथि स्वागत ओ.पी.मिश्रा, धर्मेन्द्र सिंह, उदय देशमुख, श्रीमती सरला केवट व्दारा किया गया. आभार श्रीमती भुवनेश्वरी खुरासिया द्वारा किया गया.

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