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ईडी ने मनी लॉंड्रिंग के मामले में देशभर में पीएफआई के ठिकानों पर छापेमारी की

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नई दिल्ली. हाथरस कांड सहित देश में अन्य संदिग्ध गतिविधियों में पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआइ) की भूमिका और उसे फंडिंग के मामलों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय ने वीरवार को बड़ी कार्रवाई की. प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने देशभर में दो दर्जन से अधिक स्थानों पर छापेमारी की. ईडी ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ, बाराबंकी, आगरा व शामली के अलावा अन्य राज्यों में 26 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा.

प्रवर्तन निदेशालय ने पीएफआई को विदेशों से हो रही लगातार फंडिंग के मामले में लखनऊ और बाराबंकी के साथ आगरा व शामली में एक साथ छापा मारा. पीएफआइ के दिल्ली, कर्नाटक व महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में कुल 26 ठिकानों पर छापा मारा गया. कार्रवाई का उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों के संबंध में साक्ष्य एकत्र करना था.

बाराबंकी में कुर्सी थाना क्षेत्र के अगासड़ गांव के राशिद के घर प्रवर्तन विभाग की टीम ने दबिश दी. इसी थाना के बहरौली के नदीम को लखनऊ पुलिस ने दिसंबर 2019 में गिरफ्तार किया था. नदीम पीएफआई का कोषाध्यक्ष बताया जाता है. लखनऊ में भी कैसरबाग तथा लालबाग क्षेत्र में छापा मारा गया.

टीम ने परिवारजन के बयान दर्ज किए और मुबस्सिर के बैंक एकाउंट की पासबुक भी देखकर विवरण नोट किया. कार्रवाई के दौरान मुबस्सिर घर में नहीं था. मुबस्सिर शाहजहांपुर में पीएफआई शाखा से जुड़ा था और वाहन चलाने और भोजन पकाने में बहुत कुशल बताया जाता है.

डॉ. अरविंद चतुर्वेदी, पुलिस अधीक्षक, ने बताया कि बाराबंकी प्रवर्तन विभाग के उच्चाधिकारियों से वार्ता हुई है. प्रकरण पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़ा ही बताया जा रहा है. देर शाम तक विवरण उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है.

अन्य स्थानों में पॉपुलर फ्रंट के चेयरमैन ओ.एम. अब्दुल सलाम और केरल के प्रदेश अध्यक्ष नसरुद्दीन एलारोम के ठिकाने भी शामिल हैं. टीम ने तिरुवनंतपुरम में पीएफआई के एक और शीर्ष नेता अशरफ मौलवी के घर पर तलाशी ली. साथ ही तमिलनाडु, कर्नाटक, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में जांच की जा रही है. सभी जगह पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत छापे मारे जा रहे हैं.

आरोप है कि पीएफआई के सहयोगी संगठनों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों और अन्य स्थानों पर सीएए विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा देने के लिए फंड का उपयोग किया था. ईडी ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट भी भेजी थी.

हाथरस कांड पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निशाने पर उनका फंडिंग नेटवर्क आ गया. ईडी ने मथुरा में पुलिस की गिरफ्त में आए पीएफआई से जुड़े चारों लोगों से पूछताछ भी की थी. यह लोग दिल्ली से हाथरस जाते समय वाहनों की जांच के समय पकड़े गए थे.

पीएफआई की देश भर में आंदोलनों के लिए आनन-फानन में फंड जुटाने की शैली ही उनको जांच के घेरे में लाई है. अब अनैतिक तरीके से जुटाए गए फंड की रकम जब्त भी की जा सकती है. ईडी विदेशों से अघोषित वित्तीय सहायता लेने वालों पर बेहद गंभीर है. अब ऐसे सभी स्रोतों का पता लगाया जा रहा है, जहां से फंडिंग की गई है.

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