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मदरसा शब्द ही विलुप्त होना चाहिए, मीडिया महामंथन में बोले असम के मुख्यमंत्री

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नई दिल्ली. असम के हिमंत बिस्व सरमा ने कहा, भारत को सिर्फ राज्यों के संघ के रूप में पहचान देना हमारी 5000 साल पुरानी समृद्ध संस्कृति व सभ्यता को चुनौती देने के समान है. अगर भारत राज्यों का संघ है, तो इसका मतलब है कि आप भारत की हर चीज पर विवाद खड़ा कर रहे हैं. अब राहुल गांधी लोगों को यह समझा रहे हैं कि भारत राज्यों का एक संघ है. वह अलगाववादी तत्वों को उकसा रहे हैं. हो सकता है कि जेएनयू से कोई उन्हें पढ़ा रहा हो. अंग्रेजी के अलावा उनकी और उल्फा की भाषा में कोई अंतर नहीं है.

हिमंत बिस्वा साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर के 75 वर्ष पूरे होने पर दिल्ली के द अशोक होटल में रविवार को आयोजित मीडिया महामंथन 2022 में बोल रहे थे.

उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली पार्टी में गांधी परिवार के अलावा कुछ नहीं है. भाजपा में हम देश को पहले रखते हैं. लेकिन अगर आप जाकर गांधी परिवार से कहते हैं कि भारत आपसे बड़ा है तो आप कांग्रेस में अपना स्थान खो देंगे.

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मदरसा शब्द अब विलुप्त होना चाहिए और स्कूलों में सभी के लिए सामान्य शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए. उन्होंने असम के सभी मदरसों को भंग करने और उन्हें सामान्य स्कूलों में बदलने के अपने सरकार के निर्णय को सही बताया. जब तक यह शब्द (मदरसा) रहेगा, तब तक बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बनने के बारे में नहीं सोच पाएंगे. अगर आप बच्चों से कहेंगे कि मदरसों में पढ़ने से डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बनेंगे, तो वे खुद जाने से मना कर देंगे.

उन्होंने कहा, “अपने बच्चों को कुरान पढ़ाएं, लेकिन घर पर. बच्चों को उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हुए मदरसों में भर्ती कराया जाता है. विज्ञान, गणित, जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, प्राणीशास्त्र पर जोर होना चाहिए. स्कूलों में सामान्य शिक्षा होनी चाहिए. धार्मिक ग्रंथों को घर पर पढ़ाया जा सकता है, लेकिन स्कूलों में बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और वैज्ञानिक बनने के लिए पढ़ाई करनी चाहिए. कोई भी मुस्लिम (भारत में) पैदा नहीं हुआ था. भारत में हर कोई हिन्दू था, इसलिए यदि कोई मुस्लिम बच्चा अत्यंत मेधावी है, तो मैं उसके हिन्दू अतीत को इसका श्रेय दूंगा.

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