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द टेलीग्राफ की ओछी पत्रकारिता पर प्रेस काउंसिल ने भेजा कारण बताओ नोटिस

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टेलीग्राफ ने राष्ट्रपति की तुलना कोरोना वायरस से की

नई दिल्ली. प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने दैनिक अंग्रेजी ‘द टेलीग्राफ’ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. टेलीग्राफ को राष्ट्रपति के नाम की तुलना कोरोना वायरस के साथ करने के कारण दिया गया है. प्रेस काउंसिल ने 17 मार्च, 2020 को समाचार पत्र में प्रकाशित हेडलाइन पर संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की है.

समाचार पत्र ने पहले पेज की लीड स्टोरी में ‘व्यंग्यात्मक’ शैली का उपयोग करते हुए नियमों का उल्लंघन किया, राष्ट्रपति पर अपमानजक टिप्पणी की. पत्रकारिता के नियमों और आचरण का उल्लंघन करने पर प्रेस काउंसिल ने नोटिस जारी किया.

प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष जस्टिस चंद्रमौली कुमार प्रसाद ने संज्ञान लिया और पत्रकारिता आचरण के मानदंडों का उल्लंघन करने पर द टेलीग्राफ के संपादक को नोटिस भेजा है.

प्रेस काउंसिल ने लिखा है कि देश के प्रथम नागरिक (राष्ट्रपति) पर व्यंग्यात्मक टिप्पणियां, उपहास और उन्हें नीचा दिखाने की बात गैरजरूरी होने के साथ-साथ पत्रकारिता के उचित प्रतिमानों के विपरीत जाती हैं.

राष्ट्रपति ने सोमवार को पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए नामित किया था. जिसके बाद वामपंथियों में हलचल मच गई और वे पूर्व सीजेआई के फैसलों को इससे जोड़कर देखने लगे. इस बीच टेलीग्राफ ने ओछी पत्रकारिता का उदाहरण प्रस्तुत किया.

इसके बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने समाचार पत्र को जमकर फटकार लगाई. सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे अनुसूचित जाति का अपमान बताया.

ऐसा पहली बार नहीं है कि वामपंथियों ने पत्रकारिता के मूल्यों को ताकपर रखा है. पत्रकारिता का सहारा लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में वामपंथी बिग्रेड ऐसा करती रहती है. झूठी खबरें चलाना और लोगों को गुमराह करना हमेशा से इनका काम रहा है. पिछले दिनों आउटलुक पत्रिका में उमर अहमद ने पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम को केन्द्र में रखकर एक अपमानजनक लेख लिखा था. हालांकि बाद में आउटलुक पत्रिका के एडिटर-इन-चीफ रूबेन बनर्जी ने पत्रिका में प्रकाशित लेख के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी थी. ऐसे अनेकों उदाहरण मिल जाएंगे, जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के आधार पर पत्रकारिता के मूल्यों की धज्जियां वामी पत्रका​रों ने उड़ाई हैं.

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