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कट्टरपंथी सोच – क्या काली पूजा या दूसरे धर्म के सम्मान से इस्लाम खतरे में आ जाएगा?

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उस सोच को क्या कहें जो दूसरे धर्म का सम्मान करने पर मार देना चाहे, क्या दूसरे धर्म के सम्मान से आपका धर्म कमजोर हो जाता है? या क्या काली पूजा से इस्लाम खतरे में आ जाएगा? ये सवाल इसलिए क्योंकि बांग्लादेश के स्टार क्रिकेटर शाकिब अल हसन को कट्टरपंथियों के सामने सरेंडर करना पड़ा या कहें कि झुकना पड़ा, क्योंकि वे काली पूजा में गए थे….जिस कारण कट्टरपंथी उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे थे.

शाकिब को बांग्लादेश पुलिस ने सुरक्षा का भरोसा भी दिलाया, लेकिन कट्टरपंथियों की ताकत के आगे शाकिब को अपने देश की पुलिस पर भी भरोसा नहीं हुआ और उन्होंने माफी मांग ली.

शाकिब ने माफी मांगते हुए कहा, ‘तो फिर, शायद मुझे उस जगह पर नहीं जाना चाहिए था. और अगर ऐसा है तो आप मेरे खिलाफ हैं और इसके लिए मुझे बहुत खेद है. मैं यह सुनिश्चित करने की कोशिश करूंगा कि ऐसा फिर कभी ना हो.’

शाकिब काली पूजा के उद्घाटन के लिए कोलकाता पहुंचे थे. उन्हें मूर्ति के सामने पूजा करते हुए देखा गया था. बाद में वह बांग्लादेश लौट गए थे. शाकिब ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, ‘सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें है कि मैं वहां समारोह का उद्घाटन करने गया था. लेकिन मैं ऐसा करने के लिए वहां नहीं गया था और ना ही मैंने वहां ऐसा कुछ किया था. आप आसानी से इसे चेक कर सकते हैं. एक जागरूक मुस्लिम होने के नाते मैं ऐसा कभी नहीं करूंगा’.

उन्होंने कहा कि ‘स्पष्ट रूप से मामला बहुत ही संवेदनशील है. मैं यह कहना चाहता हूं कि मैं खुद को एक ‘गर्वित मुस्लिम’ के रूप में मानता हूं और जिसका मैं पालन करता हूं. गलतियां हो सकती हैं. अगर मैंने कोई गलती की है, तो इसके लिए मैं आप सबसे माफी मांगता हूं’. क्रिकेट खिलाड़ी ने कहा कि जब वह वहां पहुंचे थे, तो उससे पहले ही समारोह शुरू हो चुका था और उन्होंने वहां पर केवल समय गुजारा था.

साभार – ज़ी न्यूज़

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